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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Hardoi News ›   Today is the first Monday of Sawan, Bam-Bam Bhole will echo from the road to the pagoda.

Hardoi News: सावन का पहला सोमवार आज, सड़क से शिवालय तक गूंजेगा बम-बम भोले

Sun, 21 Jul 2024 10:49 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 21 Jul 2024 10:49 PM IST
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Today is the first Monday of Sawan, Bam-Bam Bhole will echo from the road to the pagoda.
हरदोई। भगवान शिव को समर्पित सावन माह का पहला सोमवार आज है। इस बार पांच सोमवार हैं।
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सावन माह में भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है। श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ श्रद्धानुसार जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और शृंगार भी कराते हैं। मंदिरों में कांवड़ियों के साथ ही श्रद्धालुओं के लिए इसकी भी व्यवस्था की गई है। मंदिर के पुजारियों ने शृंगार के लिए शाम का समय तय किया है, जबकि रुद्राभिषेक पूरे दिन कराए जा सकेंगे।
आषाढ़ माह की एकादशी को हरिशयनी एकादशी भी कहा जाता है। इस दिन भगवान श्रीहरि विष्णु सृष्टि की सत्ता के संचालन का भार भगवान भोलेनाथ को सौंपकर शयन में चले जाते हैं। आषाढ़ के बाद सावन माह से ही भगवान भोलेनाथ के पूजन-अर्चन का विशेष महत्व माना जाता है। सावन माह की शुरुआत ही सोमवार से होने के कारण इस बार कांवड़ियों का जत्था रविवार को ही राजघाट के लिए रवाना होना शुरु हुआ। सड़क से लेकर शिवालय तक बम-बम भोले गूंज रहा है। सकाहा के श्रीशिवसंकट हरण मंदिर, मल्लावां के सुनासीर नाथ महादेव मंदिर, भरावन के श्रीजंगली शिव तीर्थ मंदिर और शहर के बाबा श्रीविश्वनाथ मंदिर आदि शिवालयों में श्रद्धालु जलाभिषेक, शृंगार और रुद्राभिषेक कराएंगे।
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आचार्य उमाकांत शास्त्री, सनत्कुमार मिश्रा, संतोष कुमार मिश्रा ने बताया कि सावन माह में अतिवृष्टि के साथ ही भगवान भोलेनाथ जलाभिषेक से विशेष प्रसन्न होते हैं। बताया कि भगवान भोलेनाथ पर गंगाजल, जल, दूध, देसी घी, दही, शहद, गन्ने का जूस, गुड़, चीनी, भांग, धतूरा, बेलपत्र, शमी पत्र, इत्र, लाल और सफेद चंदन, पुष्प आदि से अभिषेक और शृंगार आदि करने का विधान है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धानुसार भगवान भोलेनाथ को जो भी अर्पित करते हैं इसे वह स्वीकार कर आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
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सकाहा के श्रीशिव संकट हरण मंदिर के पुजारी सूर्यकमल गोस्वामी ने बताया कि मंदिर रात डेढ़ बजे से ही खुल जाएगा। आरती सुबह सात बजे और शाम को आठ बजे होगी। भोलेनाथ का शृंगार सोमवार के स्थान पर सावन माह में बुधवार को किया जाएगा।
श्रीजंगली शिव तीर्थ मंदिर के पुजारी कमलेश गोस्वामी ने बताया कि मंदिर के कपाट सुबह चार बजे खुल जाते हैं और रात 10 बजे तक पूजन-अर्चन के लिए खुले रहते हैं। शृंगार शाम पांच बजे से सात बजे तक होता है।

सुनासीर नाथ मंदिर के आचार्य मंगल प्रसाद मिश्र व रामगोविंद शास्त्री ने बताया कि मंदिर के कपाट सुबह पांच बजे से भक्तों के दर्शन के लिए खोले जाते हैं। रात 10 बजे कपाट बंद किए जाते हैं। सावन माह के सोमवार पर भक्तों की सुविधा के लिए मंदिर के कपाट रविवार रात 12 बजे से खोले जाएंगे। बाबा के रात नौ बजे तक दर्शन कराए जाएंगे। प्रतिदिन रात नौ बजे से रुद्राभिषेक कराया जाएगा।

बाबा विश्वनाथ मंदिर के पुजारी संतोष कुमार मिश्र ने बताया कि मंदिर सुबह पांच बजे से खुल जाता है और श्रद्धालु पूजन-अर्चन करने आते हैं। सावन माह में विशेष शृंगार के लिए शाम का समय निश्चित किया गया है। रुद्राभिषेक के लिए पहले से मंदिर पर संपर्क करना होगा।
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