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‘प्रभु की दया पाने को जीवों पर दया करें’
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
Updated Tue, 17 Mar 2015 12:23 AM IST
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हाजीपुर गांव में जारी श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन
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कथावाचक पंडित संतोष कुमार द्विवेदी ने कहा कि यदि हम चाहते हैं कि हम पर
दया की जाए तो हमें जीवों के प्रति दया का भाव अपनाना होगा।
हाजीपुर गांव में स्थित शिव मंदिर पर जारी कथा में कथावाचक ने कहा कि अपने माता-पिता और वृद्धजनों की सेवा सबसे बड़ा परोपकार है। इससे भगवान प्रसन्न होते हैं। ऐसे घरों में जहां वृद्धों के साथ अच्छा बरताव किया जाता है, वह धरती के स्वर्ग बन जाते हैं। जहां बुजुर्गों का अपमान हो ऐसे घरों में सुख-शांति कभी नहीं आ सकती।
अपने अपने लिए सुख की तलाश को इधर उधर भटकते हैं, पर सुकून चाहिए तो भूखों का खाना खिलाएं। असहाय और निशक्तों की सेवा करने में जो सुकून मिलता है, उसे पैसे से नहीं खरीदा जा सकता। कहा कि हर जीव को जीने का अधिकार है।
कहा कि जिस तरह से हम संसार में अपने जीने के अधिकार के साथ सिर उठा कर चलते हैं, बेजुबान जीवों को भी यह अधिकार मिला है। उनके प्रति दया का भाव अपनाएं। जीवों पर दया करने वालोें के साथ परमात्मा भी दया का व्यवहार करता है। कार्यक्रम में आयोजक हरिशंकर मिश्रा समेत कृष्णपाल, जयशंकर, रमेश शुक्ला आदि का योगदान रहा।
हाजीपुर गांव में स्थित शिव मंदिर पर जारी कथा में कथावाचक ने कहा कि अपने माता-पिता और वृद्धजनों की सेवा सबसे बड़ा परोपकार है। इससे भगवान प्रसन्न होते हैं। ऐसे घरों में जहां वृद्धों के साथ अच्छा बरताव किया जाता है, वह धरती के स्वर्ग बन जाते हैं। जहां बुजुर्गों का अपमान हो ऐसे घरों में सुख-शांति कभी नहीं आ सकती।
अपने अपने लिए सुख की तलाश को इधर उधर भटकते हैं, पर सुकून चाहिए तो भूखों का खाना खिलाएं। असहाय और निशक्तों की सेवा करने में जो सुकून मिलता है, उसे पैसे से नहीं खरीदा जा सकता। कहा कि हर जीव को जीने का अधिकार है।
कहा कि जिस तरह से हम संसार में अपने जीने के अधिकार के साथ सिर उठा कर चलते हैं, बेजुबान जीवों को भी यह अधिकार मिला है। उनके प्रति दया का भाव अपनाएं। जीवों पर दया करने वालोें के साथ परमात्मा भी दया का व्यवहार करता है। कार्यक्रम में आयोजक हरिशंकर मिश्रा समेत कृष्णपाल, जयशंकर, रमेश शुक्ला आदि का योगदान रहा।