{"_id":"2b1d44240868d0f8c2cde022dc00cf82","slug":"tiger-returned-in-atrauli-jniganv-stayed-in-panic-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"फिर अतरौली लौटा बाघ, जनिगांव में ठहरा, दहशत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
फिर अतरौली लौटा बाघ, जनिगांव में ठहरा, दहशत
अमर उजाला ब्यूरो हरदोई।
Updated Sat, 05 Dec 2015 12:49 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जनिगांव से 28 नवंबर की रात लखनऊ की ओर निकला बाघ फिर से वापस अतरौली क्षेत्र में लौट आया है। खास बात तो यह है कि पिछली बार दो दिनों तक जनिगांव के जिस गन्ने के खेत में उसने अपना ठिकाना बनाया था। वापस लौट कर बाघ फिर से उसी गन्ने के खेत में ठहर गया है। जनिगांव के आसपास खेतों में बाघ के पंजों के निशान वन विभाग को मिले जिसके आधार पर विभाग ने बाघ के वापस लौटने की पुष्टि की है।
बताते चलें की 26 नवंबर की रात बाघ ने जनिगांव स्थित शिवकुमार तिवारी की बाग में एक बैल का शिकार किया था। कुछ ग्रामीणों ने शनिवार की सुबह बाघ देखे जाने का दावा किया और वन विभाग को सूचना दी थी। कुत्तों के भौंकने पर श्रीश सिंह के गन्ने के खेत में बाघ के घुस जाने की बात ग्रामीणों ने वन विभाग की टीम को बताई गयी थी। जिसके बाद वन विभाग की टीम ने ग्रामीणों सहित आसपास छानबीन की तो खेत में मिले पंजों के निशान बाघ के होने की पुष्टि की थी।
पंजों के निशान के आधार पर बाघ की आखिरी लोकेशन गन्ने के खेत में बताई थी। शनिवार की रात बाघ वहां से निकलकर मालपुर होते हुए लखनऊ की ओर रवाना हुआ था। जलालपुर गांव में बाघ के पंजों के निशान वन विभाग की टीम को मिले थे। जिसके आधार पर बाघ की आखिरी लोकेशन अतरौली के आसपास बताई गई। यहां से लखनऊ की सीमा करीब दस किमी रह जाती है।
विज्ञापन
वन दरोगा जीवनलाल ने बताया कि अक्तूबर-नवंबर माह के आसपास बाघ के प्रजनन का समय होता है। इस दौरान बाघ अक्सर जंगल से इधर-उधर भटक जाते हैं और वापस जंगल ढूंढने को लेकर भटकते रहते हैं। पिछले साल भी अक्तूबर महीने में एक बाघ ऐसे ही भटक गया था और तीन माह की कडी मशक्कत के बाद वन विभाग की टीम उसे पकड़ने में सफल हो सकी थी।
फिलहाल उन्होंने बाघ के मलिहाबाद के आसपास तक जाकर वापस होने की आशंका व्यक्त की है। बताया कि बाघ लाइट की रोशनी, आग व शोरगुल से डरते हैं, भरावन रजबहा के किनारे चलकर मलिहाबाद के आसपास जाकर रेलते लाइन पड़ जाने के कारण आगे नहीं गया और उसी रास्ते वापस लौट आया है। उधर, बाघ के लौटने की खबर सुनकर ग्रामीणों में दहशत है। देर-सबेर खेतों की ओर जाने में ग्रामीण डर रहे हैं।
विज्ञापन
बताते चलें की 26 नवंबर की रात बाघ ने जनिगांव स्थित शिवकुमार तिवारी की बाग में एक बैल का शिकार किया था। कुछ ग्रामीणों ने शनिवार की सुबह बाघ देखे जाने का दावा किया और वन विभाग को सूचना दी थी। कुत्तों के भौंकने पर श्रीश सिंह के गन्ने के खेत में बाघ के घुस जाने की बात ग्रामीणों ने वन विभाग की टीम को बताई गयी थी। जिसके बाद वन विभाग की टीम ने ग्रामीणों सहित आसपास छानबीन की तो खेत में मिले पंजों के निशान बाघ के होने की पुष्टि की थी।
विज्ञापन
पंजों के निशान के आधार पर बाघ की आखिरी लोकेशन गन्ने के खेत में बताई थी। शनिवार की रात बाघ वहां से निकलकर मालपुर होते हुए लखनऊ की ओर रवाना हुआ था। जलालपुर गांव में बाघ के पंजों के निशान वन विभाग की टीम को मिले थे। जिसके आधार पर बाघ की आखिरी लोकेशन अतरौली के आसपास बताई गई। यहां से लखनऊ की सीमा करीब दस किमी रह जाती है।
विज्ञापन
वन दरोगा जीवनलाल ने बताया कि अक्तूबर-नवंबर माह के आसपास बाघ के प्रजनन का समय होता है। इस दौरान बाघ अक्सर जंगल से इधर-उधर भटक जाते हैं और वापस जंगल ढूंढने को लेकर भटकते रहते हैं। पिछले साल भी अक्तूबर महीने में एक बाघ ऐसे ही भटक गया था और तीन माह की कडी मशक्कत के बाद वन विभाग की टीम उसे पकड़ने में सफल हो सकी थी।
फिलहाल उन्होंने बाघ के मलिहाबाद के आसपास तक जाकर वापस होने की आशंका व्यक्त की है। बताया कि बाघ लाइट की रोशनी, आग व शोरगुल से डरते हैं, भरावन रजबहा के किनारे चलकर मलिहाबाद के आसपास जाकर रेलते लाइन पड़ जाने के कारण आगे नहीं गया और उसी रास्ते वापस लौट आया है। उधर, बाघ के लौटने की खबर सुनकर ग्रामीणों में दहशत है। देर-सबेर खेतों की ओर जाने में ग्रामीण डर रहे हैं।