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यूक्रेन में फंसे मेडिकल के तीन छात्र और दो छात्राएं

Thu, 24 Feb 2022 11:17 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 24 Feb 2022 11:17 PM IST
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Three medical students and two girl students trapped in Ukraine
हरदोई/सांडी/संडीला। यूक्रेन और रूस के बीच हो रहे युद्ध की दहशत हरदोई तक आ गई है। मेडिकल की पढ़ाई करने की वजह से यहां की दो छात्राएं और तीन छात्र यूक्रेन में फंसे हैं।
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परिजन टीवी के न्यूज चैनलों पर टकटकी लगाए हैं। मोबाइल पर फोन की घंटी बजते ही वह चौंक जा रहे हैं। उधर, भारतीय दूतावास ने उनके दस्तावेज जमा किए हैं।
शहर के रेलवेगंज मोहल्ले में रहने वाले डॉ. डीपी सिंह की बेटी अपेक्षा सिंह यूक्रेन के खरकी शहर में नेशनल खरकी यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस छात्रा है। उन्होंने बताया कि अगस्त 2016 में बेटी का एडमिशन कराया था।
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युद्ध होने से उन्होंने अपने परिवार को भगवान को समर्पित कर दिया है। विश्वास है कि वह जैसा भी करेंगे, उचित करेंगे। अपेक्षा उनकी बड़ी बेटी है। छोटा बेटा अविरल सिंह दिल्ली में बीटेक छात्र है।
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दोपहर करीब दो बजे बेटी अपेक्षा से बात हुई तो वह मार्केट में थी। यूक्रेन में इमरजेंसी लगी है। ऑनलाइन क्लासेज चल रही हैं। बेटी सकुशल है, अब उसका पांच महीने का ही कोर्स बाकी है।
अब तो बेटी डिग्री लेकर आएगी या... यह कहते हुए उनकी आंखें भर आ रही हैं। अभी वापस आने का मतलब है डिग्री छोड़ देना। भारतीय दूतावास ने उसके दस्तावेज जमा करा लिए हैं।
इसी तरह हरदोई के सांडी ब्लाक में रहने वाले पूर्व ब्लाक प्रमुख महेंद्र यादव की बेटी वैशाली भी उक्रेन में फंसी है। वैशाली तेरा पुरसौली की वर्तमान प्रधान भी है।
वैशाली उक्रेन के इवेनो में फ्रांकिविज नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस थर्ड ईयर की छात्रा है। महेंद्र ने बताया कि बेटी अभी सितंबर माह में घर आई थी।
अब वह अपने फ्लैट में फंसी हुई है। हालात भयावह हैं। शुक्रवार को वैशाली की कीव से दिल्ली की फ्लाइट थी, जो कैंसिल हो गई। अब वापस आने का कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा है।
वैशाली ने एक वीडियो भी बनाकर भेजा है, जिसमें वहां की भयावह स्थिति दिख रही है। भारत सरकार से मदद की अपील भी वहां के लोग कर रहे हैं। उक्रेन में फंसा तीसरा छात्र संडीला के मुख्य मार्ग स्थित जहाज कोठी निवासी राजेश कुमार का बेटा जय सक्सेना (25) है।
वह यूक्रेन के शहर टेरनोपिल में टेरनोपिल नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस कर रहा है। छोटा भाई इंटर की पढ़ाई लखनऊ में कर रहा है। माता रूपा सक्सेना का निधन 2019 में हो गया था। पिता की मोबाइल की दुकान है।
जय चार साल से उक्रेन में पढ़ाई कर रहा है। वह 24 अक्टूबर 2021 को यूक्रेन गया था। पिता राजेश ने बताया कि बेटे को बुलाना चाह रहे थे, लेकिन फ्लाइट टिकट के दाम बढ़ गए। अब वहां युद्ध छिड़ गया है और फ्लाइट भी बंद है।
हम लोगों की निगाह बस टीवी पर ही लगी है। सरकार से अपील है कि हमारे बच्चों को किसी तरह से वापस भारत लाया जाए। परिवार के अन्य सदस्य रो-रो कर बेहाल हैं।
इसी तरह कस्बे के रामप्यारी स्कूल वाली गली के निवासी डॉ. सुशील कुमार का बेटा सुमित (26) भी यूक्रेन की इवनो फ़्रांकिवस्क यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस कर रहा है।
अभी फरवरी 2022 में ही वह उक्रेन गया था। दीपावली में वह घर आया था। अब फ्लाइट बंद होने के कारण आ नहीं पा रहा है। सुमित की माता ऊषा देवी का बीमारी के चलते 2016 में निधन हो गया था। परिवार में दो बेटे एक बेटी है। सभी परेशान हैं कि अब क्या होगा।

शहर के शिवम वर्मा भी यूक्रेन में फंसे हैं। यह शहर कोतवाली क्षेत्र के चीलपुरवा निवासी महेंद्र पाल वर्मा के बेटे हैं। महेंद्र पाल ने बताया कि बेटा एमबीबीएस प्रथम वर्ष का छात्र है।
युद्ध के चलते परिवार के लोगों की निगाह न्यूज चैनलों पर टिकी हुई है। आसपास के शुभचिंतक लोग भी परिवार के पास आकर बेटे के बारे में जानकारी ले रहे हैं।
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