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यह दुनिया नफरतों की आखिरी स्टेज पर है ... : चरण सिंह बशर
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फोटो 31: संडीला में कलाम पेश करते चरण सिंह बशर। स्रोत : आयोजक
संडीला। सालाना ऑल इंडिया मुशायरे की शुरूआत करते हुए मशहूर शायर चरण सिंह बशर ने कलाम पेश किया कि यह दुनिया नफरतों की आखिरी स्टेज पर है, इलाज इसका मोहब्बत के सिवा कुछ भी नहीं। अध्यक्षता कर रहे जौहर कानपुरी ने पढ़ा कि मुतमइन तू कि तेरे पांव से कांटा निकाल, मैं भी खुश हूं कि तेरी कैद से आजाद हुआ।
बज्म-ए-सलाम संदीलवी फाउंडेशन की तरफ से एक लॉन में 11वें सालाना ऑल इंडिया मुशायरा अंतरराष्ट्रीय शायर जौहर कानपुरी की अध्यक्षता में हुआ। डॉ. जुबैर सिद्दीकी ने सामाजिक संदेश देते हुए कहा कि हम अपने साथ इनको उम्र भर रखते हैं इज्जत से, वो हम में से नहीं मां-बाप को जो बोझ समझे। शबीना अदीब ने अपनी नज्म से महफिल को सजाया कि जो खानदानी रईस हैं, वह मिजाज रखते हैं नरम अपना, तुम्हारा लहजा बता रहा है तुम्हारी दौलत नई-नई है। दावर रजा संडीलवी ने पढ़ा कि तेल सारा अगर जल गया तो लहू दे के रौशन करो इन चिरागों को बुझने न दो वरना रास्ता दिखाएगा कौन।
अफजल इलाहाबादी ने कहा कि रोज आता है वह झरने में नहाने के लिए, आग पानी में लगाता है चला जाता है। वहीं सलमान जफर ने ईमान पर भरोसा जताते हुए पढ़ा कि खुदा की जात पर कितना भरोसा है, इसे देखो, परिंदा सिर्फ खाता है, बचाकर कुछ नहीं रखता। डॉ. मखमूर काकोरवी, असद अख्तर असद, रुस्तम इलाहाबादी, रुबीना अयाज, नौशाद अनगढ़ संभली, शकील गयावी, खलील फरीदी रायबरेली, इरशाद कानपुरी, असगर बिलग्रामी, सत्याधर सत्य, खलील अख्तर लखनवी, रमीज वाहिद मेरठी, फररीदुद्दीन अहमद, सुहैल संडीलवी, मौलाना काजिम नदवी, प्रो. उमर कमालुद्दीन और प्रो. मुशीर हुसैन सिद्दीकी समेत शायरों ने भी अपने-अपने कलाम पेश किए। संचालन असीम काकोरवी ने किया। मुशायरे में शैलेश अग्निहोत्री, कुंवर वीरेंद्र सिंह, अब्दुल वली, जुहैर सिद्दीकी, तबस्सुम, वकार, अतहर, मंसूर आलम मौजूद रहे।
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बज्म-ए-सलाम संदीलवी फाउंडेशन की तरफ से एक लॉन में 11वें सालाना ऑल इंडिया मुशायरा अंतरराष्ट्रीय शायर जौहर कानपुरी की अध्यक्षता में हुआ। डॉ. जुबैर सिद्दीकी ने सामाजिक संदेश देते हुए कहा कि हम अपने साथ इनको उम्र भर रखते हैं इज्जत से, वो हम में से नहीं मां-बाप को जो बोझ समझे। शबीना अदीब ने अपनी नज्म से महफिल को सजाया कि जो खानदानी रईस हैं, वह मिजाज रखते हैं नरम अपना, तुम्हारा लहजा बता रहा है तुम्हारी दौलत नई-नई है। दावर रजा संडीलवी ने पढ़ा कि तेल सारा अगर जल गया तो लहू दे के रौशन करो इन चिरागों को बुझने न दो वरना रास्ता दिखाएगा कौन।
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अफजल इलाहाबादी ने कहा कि रोज आता है वह झरने में नहाने के लिए, आग पानी में लगाता है चला जाता है। वहीं सलमान जफर ने ईमान पर भरोसा जताते हुए पढ़ा कि खुदा की जात पर कितना भरोसा है, इसे देखो, परिंदा सिर्फ खाता है, बचाकर कुछ नहीं रखता। डॉ. मखमूर काकोरवी, असद अख्तर असद, रुस्तम इलाहाबादी, रुबीना अयाज, नौशाद अनगढ़ संभली, शकील गयावी, खलील फरीदी रायबरेली, इरशाद कानपुरी, असगर बिलग्रामी, सत्याधर सत्य, खलील अख्तर लखनवी, रमीज वाहिद मेरठी, फररीदुद्दीन अहमद, सुहैल संडीलवी, मौलाना काजिम नदवी, प्रो. उमर कमालुद्दीन और प्रो. मुशीर हुसैन सिद्दीकी समेत शायरों ने भी अपने-अपने कलाम पेश किए। संचालन असीम काकोरवी ने किया। मुशायरे में शैलेश अग्निहोत्री, कुंवर वीरेंद्र सिंह, अब्दुल वली, जुहैर सिद्दीकी, तबस्सुम, वकार, अतहर, मंसूर आलम मौजूद रहे।
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