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Hardoi News: यह ट्रॉमा सेंटर है...यहां दिन के लिए डॉक्टर की तैनाती नहीं है, रात में तो लगती है ड्यूटी

Sun, 13 Jul 2025 10:45 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 13 Jul 2025 10:45 PM IST
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This is a trauma center...there is no doctor posted here during the day, they are on duty at night
हरदोई। ट्रॉमा सेंटर। यह शब्द जेहन में आते ही चीख पुकार के बीच दौड़भाग करते स्वास्थ्य कर्मियों की तस्वीर उभरती है। अत्याधुनिक मशीनों की आवाजें भी कान में गूंजने लगती हैं। यह बात और कि हरदोई के ट्रॉमा सेंटर यह सब नहीं दिखता। बाकी व्यवस्थाएं तो छोड़िए, यहां ओपीडी के लिए चिकित्सक तक तैनात नहीं हैं। खास बात यह कि रात में यहां चिकित्सकों की ड्यूटी लगातार लगाई जा रही है।
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शहर से लगभग आठ किलोमीटर दूर लखनऊ रोड पर सड़क किनारे ही ट्रॉमा सेंटर बना है। वर्ष 2016 में 2.61 करोड़ रुपये खर्च कर ट्रॉमा सेंटर बनाया गया था। उद्देश्य यह था कि गंभीर मरीजों काे यहीं बेहतर उपचार मिल जाए। कई मामलों में हरदोई से लखनऊ ट्रॉमा सेंटर रेफर किए जाने के दौरान रास्ते में ही मरीजों की मौत होने के मामले सामने आ चुके हैं। कहने को ताे ट्रॉमा सेंटर संचालित हो रहा है, लेकिन इसकी जमीनी हकीकत कुछ और ही है। ट्रॉमा सेंटर में 27 जून के बाद से ओपीडी नहीं हुई।
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ओपीडी के लिए यहां डॉ. रूपेंद्र सिंह की तैनाती थी। सुबह दस बजे से शाम चार बजे तक वह यहां बैठते थे। तीस जून तक का उनका अनुबंध स्वास्थ्य विभाग से था। अनुबंध का नवीनीकरण नहीं हुआ तो उन्होंने बाना बंद कर दिया। 28, 29 और 30 जून को वह नवीनीकरण की भागदौड़ में उलझे रहे, इसलिए ओपीडी नहीं हुई। यहां चार और चिकित्सक भी तैनात हैं। इनकी ड्यूटी नाइट शिफ्ट में होती है। इन सभी की तैनाती दूसरी जगहों पर है, लेकिन ट्रॉमा सेंटर का संचालन करने के लिए इन्हें यहां संबद्ध किया गया था। इनकी ड्यूटी कागजों पर रोटेशन में लगती है।
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ओटी टेक्नीशियन तैनात, सर्जन का पता नहीं
ट्रॉमा सेंटर की जरूरत सबसे ज्यादा दुर्घटनाओं में घायल होने वाले मरीजों को होती है। ट्रॉमा सेंटर में ओटी भी है और दो ओटी टेक्नीशियन की तैनाती भी। आश्चर्य यह कि यहां सर्जन की तैनाती नहीं है। होती भी तो शायद बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ता क्योंकि पिछले लंबे समय से कोई भी गंभीर मरीज ट्रॉमा सेंटर में आया ही नहीं। ऑपरेशन थिएटर में ऑपरेशन टेबल भी है, लेकिन इसका इस्तेमाल लंबे समय से नहीं हुआ।


न सुरक्षा के लिए होमगार्ड न सफाई के लिए सफाईकर्मी
ट्रॉमा सेंटर में स्टाफ की बात करें तो यहां 14 स्टाफ नर्स तैनात हैं। दो फार्मासिस्ट हैं, चार लैब टेक्नीशियन हैं, चार एमपीडब्ल्यू हैं। दो ओटी टेक्नीशियन हैं और चार चिकित्सकों की तैनाती है। 30 जून तक यहां होमगार्ड सुरक्षा के लिए तैनात रहते थे। इसके बाद यह भी आना बंद हो गए। सफाई कर्मी की तैनाती नहीं है। विभागीय कर्मचारी 100 शैय्या संयुक्त चिकित्सालय से सफाई कर्मी 10-15 दिन में एक बार बुलाकर सफाई करा देते हैं।



20 से 26 जून के बीच कितने आए मरीज
तारीख मरीजों की संख्या
20 जून 6 मरीज
21 जून 6 मरीज
22 जून 5 मरीज
23 जून 6 मरीज
24 जून 5 मरीज
25 जून 4 मरीज
26 जून 5 मरीज
27 जून 6 मरीज






ट्रॉमा सेंटर का संचालन करने के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों की आवश्यकता है। इस संबंध में सक्षम अधिकारियों ने शासन में पत्राचार भी किया है। वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर दूसरी जगहों पर तैनात चिकित्सक और स्वास्थ्य कर्मियों को ट्रॉमा सेंटर संबद्ध कर किसी तरह संचालन किया जा रहा है। ओपीडी के लिए चिकित्सक की व्यवस्था भी कराई जा रही है। उपलब्ध संसाधनों से ही यथा संभव व्यवस्था में सुधार कराया जाएगा।
-डॉ. पंकज मिश्रा, नोडल अधिकारी, ट्रॉमा सेंटर
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