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Hardoi News: वेल्डिंग का मिस्त्री बनाकर सऊदी अरब भेजने की थी तैयारी
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हरदाई। मुजफ्फरनगर के एक मदरसे में साढ़े सात साल से बंधक किशोर को वेल्डिंग का काम सिखा कर सऊदी अरब भेजने की तैयारी थी। इसके लिए जब आधार कार्ड में नाम, पता संशोधन की बारी आई तो पूरा सच सामने आ गया। फिलहाल किशोर के घर वापस आने से न सिर्फ परिजनों में बल्कि पूरे गांव में खुशी का माहौल है।
हरदोई के एक गांव में रहने वाला व्यक्ति अपनी पत्नी और तीन बच्चों के साथ चंडीगढ़ में किराये के मकान में रहता था। 17 मार्च 2016 को जब उसका साढ़े आठ साल का बेटा लापता हो गया, तो उसके मिलने की आस में वह परिवार सहित वहीं गुजर बसर करता रहा। वर्ष 2020 में कोरोना संक्रमण फैलने पर परिवार सहित वापस गांव आ गया और यहीं खेती करने लगा।
संवाद न्यूज एजेंसी से बातचीत में किशोर ने बताया कि मदरसे में उसका धर्मपरिवर्तन कराकर नाम बदल दिया गया। मदरसे में ही हर समय उसे रखा जाता था। कुछ दिनों के लिए उसे वेल्डिंग का काम सिखाने के लिए फरीदाबाद ले जाया जाता, लेकिन वहां भी कुछ लोग हर वक्त उसके साथ रहते थे। किशोर के मुताबिक, धर्म बदलकर उसे सऊदी अरब भेजने की तैयारी की जा रही थी। इसीलिए आधार कार्ड में नाम संशोधन कराने के दौरान सच सामने आ गया।
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इनसेट
दिल कहता था वापस आएगा कलेजे का टुकड़ा
किशोर की मां से जब बात की गई तो वह खुशी के चलते रो पड़ीं। उन्होंने बताया कि तीन बच्चों में सबसे बड़ी बेटी है। इसके बाद दो बेटे हैं। गायब हुआ बेटा दूसरे नंबर का था। वह जब लापता हुआ था तो कई माह तक वह चैन से सो भी नहीं पाईं, लेकिन उनका दिल कहता था कि कलेजे का टुकड़ा वापस आएगा। किशोर की मां कहती हैं कि साढ़े सात साल बाद सही मायने में वह दिवाली मनाएंगी।
इनसेट
जब किशोर ने पूछा यह कौन... जवाब मिला बहन है
किशोर जब लापता हुआ था, या यूं कहें कि उसका अपहरण हुआ था, तो उससे बड़ी बहन और छोटा भाई ही परिवार में थे। गांव वापस आने पर उसे घर के आंगन में एक बच्ची खेलत हुए मिली, तो किशोर ने पूछा कि यह कौन है। इस पर पिता और मां ने जवाब दिया कि छोटी बहन है। दरअसल किशोर के जाने के बाद चौथे बच्चे का जन्म हुआ था।
इनसेट
बेटे को मिलाने वाले हमारे लिए भगवान
किशोर के पिता कहते हैं कि मुजफ्फरनगर की एक ग्राम पंचायत के प्रधान भगवान बनकर आए। दरअसल, बेटे का धर्म परिवर्तन होने की जानकारी आधार कार्ड सेंटर के संचालक ने सबसे पहले प्रधान को ही दी थी। प्रधान मुजफ्फरनगर में एक संगठन से जुड़ा है। उन्होंने ही पूरे मामले की जानकारी पुलिस को दी और तभी मामला खुला।
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हरदोई के एक गांव में रहने वाला व्यक्ति अपनी पत्नी और तीन बच्चों के साथ चंडीगढ़ में किराये के मकान में रहता था। 17 मार्च 2016 को जब उसका साढ़े आठ साल का बेटा लापता हो गया, तो उसके मिलने की आस में वह परिवार सहित वहीं गुजर बसर करता रहा। वर्ष 2020 में कोरोना संक्रमण फैलने पर परिवार सहित वापस गांव आ गया और यहीं खेती करने लगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी से बातचीत में किशोर ने बताया कि मदरसे में उसका धर्मपरिवर्तन कराकर नाम बदल दिया गया। मदरसे में ही हर समय उसे रखा जाता था। कुछ दिनों के लिए उसे वेल्डिंग का काम सिखाने के लिए फरीदाबाद ले जाया जाता, लेकिन वहां भी कुछ लोग हर वक्त उसके साथ रहते थे। किशोर के मुताबिक, धर्म बदलकर उसे सऊदी अरब भेजने की तैयारी की जा रही थी। इसीलिए आधार कार्ड में नाम संशोधन कराने के दौरान सच सामने आ गया।
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दिल कहता था वापस आएगा कलेजे का टुकड़ा
किशोर की मां से जब बात की गई तो वह खुशी के चलते रो पड़ीं। उन्होंने बताया कि तीन बच्चों में सबसे बड़ी बेटी है। इसके बाद दो बेटे हैं। गायब हुआ बेटा दूसरे नंबर का था। वह जब लापता हुआ था तो कई माह तक वह चैन से सो भी नहीं पाईं, लेकिन उनका दिल कहता था कि कलेजे का टुकड़ा वापस आएगा। किशोर की मां कहती हैं कि साढ़े सात साल बाद सही मायने में वह दिवाली मनाएंगी।
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जब किशोर ने पूछा यह कौन... जवाब मिला बहन है
किशोर जब लापता हुआ था, या यूं कहें कि उसका अपहरण हुआ था, तो उससे बड़ी बहन और छोटा भाई ही परिवार में थे। गांव वापस आने पर उसे घर के आंगन में एक बच्ची खेलत हुए मिली, तो किशोर ने पूछा कि यह कौन है। इस पर पिता और मां ने जवाब दिया कि छोटी बहन है। दरअसल किशोर के जाने के बाद चौथे बच्चे का जन्म हुआ था।
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बेटे को मिलाने वाले हमारे लिए भगवान
किशोर के पिता कहते हैं कि मुजफ्फरनगर की एक ग्राम पंचायत के प्रधान भगवान बनकर आए। दरअसल, बेटे का धर्म परिवर्तन होने की जानकारी आधार कार्ड सेंटर के संचालक ने सबसे पहले प्रधान को ही दी थी। प्रधान मुजफ्फरनगर में एक संगठन से जुड़ा है। उन्होंने ही पूरे मामले की जानकारी पुलिस को दी और तभी मामला खुला।