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Hardoi News: झुलसे मरीजों के लिए नहीं है बर्न वार्ड, इमरजेंसी में इलाज

Mon, 03 Mar 2025 11:45 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हरदोई
संवाद न्यूज एजेंसी, हरदोई Updated Mon, 03 Mar 2025 11:45 PM IST
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There is no burn ward for burnt patients, treatment is done in emergency
फोटो-13- मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती बर्न मरीज। संवाद
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- गंभीर झुलसे मरीजों को लखनऊ कर दिया जाता रेफर

- सामान्य मरीजों के साथ बर्न मरीजों के भर्ती होने से संक्रमण का खतरा
संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। मेडिकल कॉलेज में झुलसे मरीजों के लिए अलग से बर्न वार्ड न होने से आग से झुलसे मरीजों की मुश्किलें बढ़ गईं हैं। मरीजों को सर्जिकल वार्ड या फिर इमरजेंसी में ही भर्ती किया जा रहा है। जिनमें बर्न वार्ड जैसी कोई भी सुविधा उपलब्ध नहीं है। ऐसे मरीजों में सबसे ज्यादा खतरा इंफेक्शन फैलने का रहता है। जबकि गंभीर मरीजों को भर्ती ही नहीं किया जाता है और लखनऊ रेफर कर दिया जाता है।
मेडिकल कालेज बनने से जिले के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा तो मिलने लगी हैं, लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही की वजह से अभी भी कुछ उम्मीद पूरी नहीं हो पाई हैं। आज भी मेडिकल कालेज में बहुत सी मूलभूत सुविधाएं मरीजों को नही मिल पा रही है।
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मेडिकल कॉलेज में निर्माण कार्य के चलते बर्न वार्ड को तोड़ दिया गया और मरीजों को सर्जिकल या फिर इमरजेंसी वार्ड में भर्ती किया जाने लगा है। सभी मरीजों के साथ आग से झुलसे मरीजों के भर्ती होने से संक्रमण का खतरा बना हुआ है।
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केस-1- कराही निवासी प्रीती बिजली के तार से करंट लग गया था। इसमें उनका चेहरा झुलसा गया। मेडिकल कॉलेज में उन्हें बीते शुक्रवार को भर्ती कराया गया। वह अभी भी इमरजेंसी में ही भर्ती हैं। उनके आसपास दुर्घटना और अन्य बीमारियों के मरीज भी भर्ती हैं। अस्पताल प्रशासन ने संक्रमण से बचाव को कोई प्रयास भी नहीं किए हैं।

केस-2- टड़ियावां के जयराजपुर निवासी मुकेश का डेढ वर्षीय पुत्र अनमोल भी गंभीर रूप से झुलस गया था। बच्चे को इमरजेंसी ही भर्ती कराया गया। दो दिनों तक उसका उपचार किया गया। बच्चे को भी सामान्य मरीजों के साथ ही भर्ती किया गया है। हालांकि इसके बाद बच्चे को छुट्टी दे दी गई।

सर्जिकल वार्ड में गंदगी के चलते संक्रमण का रहता खतरा
सर्जिकल वार्ड में न तो बुनियादी सुविधा है और न ही बर्न वार्ड जैसी सफाई हो पाती है। वार्ड में जले हुए भर्ती मरीजों को न तो मच्छरदानी दी गयी है और न ही शरीर के जले हुए हिस्से में जलन होने पर राहत की व्यवस्था की गई है। ऐसी स्थिति में भर्ती मरीज अपने घरों से चादर लाकर या फिर वार्ड में ओढ़ने के लिए मिले कंबल से ही अपने घावों को ढक कर सुरक्षित करने का प्रयास कर रहे हैं। वहीं कई मरीज बाजारों से मारकीन का कपड़ा खरीदकर उसे अपने बेडों के चारों तरफ से रस्सियों के सहारे बांधकर जले शरीर को ढकंते हैं। जबकि वार्ड में फैली गंदगी से मरीजों में संक्रमण फैलने का भी डर बना रह रहा है।

बर्न वार्ड में यह संसाधन होने जरूरी
सर्जन डॉ. अरविंद शर्मा ने बताया कि बर्न मरीजों के लिए विशेष व्यवस्था होनी चाहिए। न्यूरो सर्जन, आर्थोपेडिक्स सहित अन्य विशेषज्ञ डॉक्टरों व स्टाफ की अलग से नियुक्ति होती है। उच्चस्तरीय उपकरण जीवनरक्षक मशीनें लगाई जाती हैं। बर्न वार्ड झुलसने वाले घायलों को बर्न वार्ड में गहन चिकित्सकीय देखरेख में रखा जाता है। वार्ड पूरी तरह से कीटाणुमुक्त होनी चाहिए है। इसमें चिकित्सकीय स्टाफ के अलावा अन्य लोगों के प्रवेश पर प्रतिबंध रहता है। उच्च स्तरीय सुविधाओं और विशेषज्ञ डॉक्टरों व स्टाफ की देखरेख से मरीजों के स्वस्थ होने की संभावना ज्यादा रहती है।


वर्जन
- आईपीडी की नवीन भवन में बर्न मरीजों की अलग यूनिट बनाई गई है, जिसमें सभी सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा गया है। लेकिन इमारत अभी बिजली कनेक्शन न हो पाने की वजह से हैंडओवर नहीं हो पाई है। कोशिश कर जल्द ही कनेक्शन कराकर यूनिट शुरू की जाएगी।-डॉ. जेविन बिष्णु गोगोई, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
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