{"_id":"690386627d1c65205e0b2fe4","slug":"the-villages-raised-rs-40-lakh-from-their-own-income-for-development-hardoi-news-c-213-1-hra1001-139545-2025-10-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"Hardoi News: गांवों ने खुद की आमदनी से जुटाए विकास के लिए 40 लाख","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Hardoi News: गांवों ने खुद की आमदनी से जुटाए विकास के लिए 40 लाख
विज्ञापन
हरदोई। ग्राम पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम शुरू हो गया है। वैसे तो गांवों के विकास के लिए पंचायतीराज विभाग के माध्यम से राज्य वित्त आयोग और केंद्रीय वित्त आयोग में रुपये दिए जाते हैं। वहीं, ग्राम पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए खुद की आमदनी के स्रोत विकसित किए जाने के लिए काम किया जा रहा है। ग्राम पंचायतों ने गांवों के विकास के लिए खुद की आमदनी से करीब 40,00,000 रुपये जुटाए हैं।
गांवों के विकास के लिए ग्राम पंचायतों को अब अपने स्तर से भी आमदनी जुटानी होगी। खुद के स्तर से जुटाई जाने वाली आमदनी पर पंचायतीराज विभाग की तरफ से प्रोत्साहन के तौर पर भी रुपये दिए जाने की व्यवस्था है। जिले में 1,293 ग्राम पंचायतों में से करीब 1,210 ग्राम पंचायतों ने करीब 40,00,000 रुपये की आय की है।
ग्राम पंचायतों ने यह आमदनी स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण में कूड़ा उठान, कॉमन सर्विस सेंटर जारी किए जाने वाले विभिन्न प्रमाण पत्र, पंचायत में संचालित होने वाली दुकानों, बरात घर के किराए आदि से आमदनी के स्रोत विकसित किए हैं। खुद के स्रोत से आमदनी जुटाने वाली ग्राम पंचायतों में बावन, बांसा, गौसगंज, बेगमगंज, गोड़वाखेम, भरावन और औड़ेरी आदि ग्राम पंचायतों ने अन्य ग्राम पंचायतों की अपेक्षा अधिक आमदनी की है।
विज्ञापन
--
ग्राम पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। इसके लिए ग्राम पंचायतों की आमदनी के स्रोत विकसित किए जा रहे हैं। कई ग्राम पंचायतों ने दो से तीन लाख रुपये तक छह माह में आमदनी कर ली है। ग्राम पंचायतों की आमदनी बढ़ाने के लिए बरात घर, दुकान और होटल व रेस्टोरेंट आदि भी बनवाए जा रहे हैं। ग्राम पंचायतों की तरफ से की जानी वाली आमदनी पर पंचायतीराज विभाग की तरफ से भी प्रोत्साहन के तौर पर रुपये दिए जाएंगे। -विनय कुमार सिंह, डीपीआरओ
विज्ञापन
गांवों के विकास के लिए ग्राम पंचायतों को अब अपने स्तर से भी आमदनी जुटानी होगी। खुद के स्तर से जुटाई जाने वाली आमदनी पर पंचायतीराज विभाग की तरफ से प्रोत्साहन के तौर पर भी रुपये दिए जाने की व्यवस्था है। जिले में 1,293 ग्राम पंचायतों में से करीब 1,210 ग्राम पंचायतों ने करीब 40,00,000 रुपये की आय की है।
विज्ञापन
ग्राम पंचायतों ने यह आमदनी स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण में कूड़ा उठान, कॉमन सर्विस सेंटर जारी किए जाने वाले विभिन्न प्रमाण पत्र, पंचायत में संचालित होने वाली दुकानों, बरात घर के किराए आदि से आमदनी के स्रोत विकसित किए हैं। खुद के स्रोत से आमदनी जुटाने वाली ग्राम पंचायतों में बावन, बांसा, गौसगंज, बेगमगंज, गोड़वाखेम, भरावन और औड़ेरी आदि ग्राम पंचायतों ने अन्य ग्राम पंचायतों की अपेक्षा अधिक आमदनी की है।
विज्ञापन
ग्राम पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। इसके लिए ग्राम पंचायतों की आमदनी के स्रोत विकसित किए जा रहे हैं। कई ग्राम पंचायतों ने दो से तीन लाख रुपये तक छह माह में आमदनी कर ली है। ग्राम पंचायतों की आमदनी बढ़ाने के लिए बरात घर, दुकान और होटल व रेस्टोरेंट आदि भी बनवाए जा रहे हैं। ग्राम पंचायतों की तरफ से की जानी वाली आमदनी पर पंचायतीराज विभाग की तरफ से भी प्रोत्साहन के तौर पर रुपये दिए जाएंगे। -विनय कुमार सिंह, डीपीआरओ