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Hardoi News: लैब मैटेरियल की खरीद अनियमितता में तत्कालीन सीएमओ और डीटीओ फंसे
Fri, 08 Aug 2025 10:38 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हरदोई
संवाद न्यूज एजेंसी, हरदोई
Updated Fri, 08 Aug 2025 10:38 PM IST
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हरदोई। क्षय रोग विभाग के लिए लैब मैटेरियल की खरीद में हुई अनियमितता की जांच पूरी हो गई है। सीडीओ के नेतृत्व में गठित जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट डीएम को दे दी है। डीएम ने भी विस्तृत जांच रिपोर्ट शासन को भेज दी है। विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक तत्कालीन मुख्य चिकित्सा अधिकारी और जिला क्षय रोग अधिकारी को अनियमितताओं के लिए प्रथम दृष्टया दोषी मनाया गया है। उक्त दोनों अधिकारियों पर क्रय प्रक्रिया में अनियमितता बरतने, अनियमित क्रय आदेश निर्गत करने, अनियमित भुगतान करने, सरकारी धन का अपव्यय करने और बाजार दर से अधिक दर पर सामग्री खरीदने की पुष्टि भी हुई है।
स्वास्थ्य विभाग में नियमों को दरकिनार कर प्रयोगशाला सामग्री की खरीद और भुगतान में अनियमितता का मामला सामने आया था। विभागीय अपर निदेशक ने इस मामले में सीएमओ से आख्या तलब की थी। इस पूरे मामले को अमर उजाला ने एक अगस्त के अंक में प्रकाशित किया था। जिलाधिकारी अनुनय झा ने भी उक्त प्रकरण की विस्तृत जांच कराने के लिए एक अगस्त को सीडीओ सान्या छाबड़ा के नेतृत्व में जांच कमेटी बनाई थी। इस कमेटी में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी विजय प्रताप सिंह, वरिष्ठ कोषाधिकारी अनुराग द्विवेदी समेत चार लोग शामिल थे।
टीम ने पूरे मामले की गहनता से जांच की। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत मिलने वाले बजट से सामग्री खरीद की अनुमति जिला स्वास्थ्य समिति से ली जाती है। सूत्र बताते हैं कि जांच में इस बात की पुष्टि हुई कि जिला स्वास्थ्य समिति के अनुमोदन के बिना ही खरीदारी कर ली गई। ब्रूमस्टिक और सैनिटाइजर जैसी कई सामग्रियां बाजार मूल्य से अधिक पर खरीदे जाने की पुष्टि भी जांच समिति ने की है। भुगतान पत्रावली में किसी भी लेखाकार या वित्तीय अधिकारी के न तो हस्ताक्षर हैं और न ही उनसे इसका परीक्षण कराया गया है। विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि जांच समिति ने इसे भी वित्तीय नियमों का उल्लंघन माना है।
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इनसेट
क्षेत्र पंचायतों की तरह यहां भी टुकड़ों में खरीद
अधिकांश क्षेत्र पंचायतों में फाइल डीएम तक भेजने से बचने के लिए एक ही काम को टुकड़ों में बांट दिया जाता है। क्षेत्र पंचायतों की तरह ही स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों ने भी काम को बांट दिया। विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि खरीदी जाने वाली सामग्री में एक लाख ब्रूमस्टिक खरीदी जानी थी। इसका क्रय आदेश दो टुकड़ों में बांटकर किया गया। मेरठ की दो फर्माें को 50-50 हजार ब्रूमस्टिक का क्रय आदेश जारी कर दिया गया। इसी तरह कई सामग्री खरीदनी कम थीं लेकिन खरीदी ज्यादा गईं।
इनसेट
अनुभवहीन फर्म से हुई खरीदारी
विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि जिन फर्माें से लैब मैटेरियल खरीदा गया, उनके पास बहुत ज्यादा अनुभव नहीं है। दोनों फर्माें के जीएसटी विवरण को जांच समिति ने खंगाला। इसमें पता चला कि दोनों फर्म 2023-24 में ही इस कारोबार में शामिल हुईं हैं। इससे पहले तक यह फर्में चॉकलेट और पेस्ट्री आदि बनाने का ही अनुभव रखती रही हैं। कार्य अनुभव में कमी और विशेषज्ञता की कमी भी जांच टीम को मिली है।
इनसेट
यह खामियां भी मिलीं
- 14 मई 2025 को ही तत्कालीन जिला क्षय रोग अधिकारी के सामने पत्रावली रखी गई। उसी दिन क्षय रोग अधिकारी के साथ ही तत्कालीन सीएमओ ने भी अनुमति देते हुए क्रय आदेश जारी कर दिया।
- पूरा काम मेरठ की दो फर्माें को दिया गया। बजट को छोटे छोटे टुकड़ों में बांटकर क्रय आदेश निर्गत किया गया।
- खरीद के लिए कोई मांग पत्र नहीं दिया गया था।
- जेम पोर्टल पर वायर और कंसाइनी एक ही व्यक्ति को बनाया गया था।
- खरीद पत्रावली में क्रय समिति के किसी सदस्य के हस्ताक्षर नहीं हैं।
- 17 मई को सामग्री की आपूर्ति दर्शाई गई है। स्टाॅकबुक में इसे दर्ज किया गया है, लेकिन संख्यात्मक और गुणात्मक परीक्षण नहीं हुआ है।
- स्टाॅक बुक में कई जगह ओवर राइटिंग है।
- सामग्री प्राप्त करने वाले और वितरित करने वाले कर्मचारी के हस्ताक्षर भी नहीं मिले।
वर्जन
पूरे मामले की जांच सीडीओ की अध्यक्षता वाली जांच कमेटी से कराई है। जांच रिपोर्ट मिल गई है और जांच रिपोर्ट को शासन भेज दिया गया है। आगे की कार्रवाई शासन स्तर से ही होगी।
अनुनय झा
डीएम, हरदोई
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स्वास्थ्य विभाग में नियमों को दरकिनार कर प्रयोगशाला सामग्री की खरीद और भुगतान में अनियमितता का मामला सामने आया था। विभागीय अपर निदेशक ने इस मामले में सीएमओ से आख्या तलब की थी। इस पूरे मामले को अमर उजाला ने एक अगस्त के अंक में प्रकाशित किया था। जिलाधिकारी अनुनय झा ने भी उक्त प्रकरण की विस्तृत जांच कराने के लिए एक अगस्त को सीडीओ सान्या छाबड़ा के नेतृत्व में जांच कमेटी बनाई थी। इस कमेटी में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी विजय प्रताप सिंह, वरिष्ठ कोषाधिकारी अनुराग द्विवेदी समेत चार लोग शामिल थे।
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टीम ने पूरे मामले की गहनता से जांच की। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत मिलने वाले बजट से सामग्री खरीद की अनुमति जिला स्वास्थ्य समिति से ली जाती है। सूत्र बताते हैं कि जांच में इस बात की पुष्टि हुई कि जिला स्वास्थ्य समिति के अनुमोदन के बिना ही खरीदारी कर ली गई। ब्रूमस्टिक और सैनिटाइजर जैसी कई सामग्रियां बाजार मूल्य से अधिक पर खरीदे जाने की पुष्टि भी जांच समिति ने की है। भुगतान पत्रावली में किसी भी लेखाकार या वित्तीय अधिकारी के न तो हस्ताक्षर हैं और न ही उनसे इसका परीक्षण कराया गया है। विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि जांच समिति ने इसे भी वित्तीय नियमों का उल्लंघन माना है।
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इनसेट
क्षेत्र पंचायतों की तरह यहां भी टुकड़ों में खरीद
अधिकांश क्षेत्र पंचायतों में फाइल डीएम तक भेजने से बचने के लिए एक ही काम को टुकड़ों में बांट दिया जाता है। क्षेत्र पंचायतों की तरह ही स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों ने भी काम को बांट दिया। विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि खरीदी जाने वाली सामग्री में एक लाख ब्रूमस्टिक खरीदी जानी थी। इसका क्रय आदेश दो टुकड़ों में बांटकर किया गया। मेरठ की दो फर्माें को 50-50 हजार ब्रूमस्टिक का क्रय आदेश जारी कर दिया गया। इसी तरह कई सामग्री खरीदनी कम थीं लेकिन खरीदी ज्यादा गईं।
इनसेट
अनुभवहीन फर्म से हुई खरीदारी
विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि जिन फर्माें से लैब मैटेरियल खरीदा गया, उनके पास बहुत ज्यादा अनुभव नहीं है। दोनों फर्माें के जीएसटी विवरण को जांच समिति ने खंगाला। इसमें पता चला कि दोनों फर्म 2023-24 में ही इस कारोबार में शामिल हुईं हैं। इससे पहले तक यह फर्में चॉकलेट और पेस्ट्री आदि बनाने का ही अनुभव रखती रही हैं। कार्य अनुभव में कमी और विशेषज्ञता की कमी भी जांच टीम को मिली है।
इनसेट
यह खामियां भी मिलीं
- 14 मई 2025 को ही तत्कालीन जिला क्षय रोग अधिकारी के सामने पत्रावली रखी गई। उसी दिन क्षय रोग अधिकारी के साथ ही तत्कालीन सीएमओ ने भी अनुमति देते हुए क्रय आदेश जारी कर दिया।
- पूरा काम मेरठ की दो फर्माें को दिया गया। बजट को छोटे छोटे टुकड़ों में बांटकर क्रय आदेश निर्गत किया गया।
- खरीद के लिए कोई मांग पत्र नहीं दिया गया था।
- जेम पोर्टल पर वायर और कंसाइनी एक ही व्यक्ति को बनाया गया था।
- खरीद पत्रावली में क्रय समिति के किसी सदस्य के हस्ताक्षर नहीं हैं।
- 17 मई को सामग्री की आपूर्ति दर्शाई गई है। स्टाॅकबुक में इसे दर्ज किया गया है, लेकिन संख्यात्मक और गुणात्मक परीक्षण नहीं हुआ है।
- स्टाॅक बुक में कई जगह ओवर राइटिंग है।
- सामग्री प्राप्त करने वाले और वितरित करने वाले कर्मचारी के हस्ताक्षर भी नहीं मिले।
वर्जन
पूरे मामले की जांच सीडीओ की अध्यक्षता वाली जांच कमेटी से कराई है। जांच रिपोर्ट मिल गई है और जांच रिपोर्ट को शासन भेज दिया गया है। आगे की कार्रवाई शासन स्तर से ही होगी।
अनुनय झा
डीएम, हरदोई