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एचआईवी ऑन स्पॉट जांच करने वाला दूसरा जिला बनेगा हरदोई

Wed, 24 Aug 2016 12:14 AM IST
अमर उजाला ब्यूराो/हरदोई
अमर उजाला ब्यूराो/हरदोई Updated Wed, 24 Aug 2016 12:14 AM IST
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The second district will conduct a spot check on HIV Hardoi
blood - फोटो : amarujala

हरदोई। एचआईवी पॉजीटिव को उसके विंडो पीरिएड में भी खोज निकालने वाले न्यूक्लिक एसिड टेस्ट की सुविधा जल्द जिला चिकित्सालय के ब्लड बैंक को मुहैया करा दी जाएगी। आईएमए बरेली के बाद प्रदेश का यह दूसरा मेजर ब्लड बैंक होगा जहां राज्य रक्त संचरण परिषद स्पेशल नाट की अनुमित मुहैया कराएगा।

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प्रदेश में सिर्फ आठ मेजर ब्लड बैंकें ही चिह्नित हैं। जिसमें जिला शामिल है। राज्य रक्त संचरण परिषद ने इस जिले के ब्लड बैंक को नाट टेस्ट की सुविधाएं व अनुमति प्रदान करने की हामी भर दी है। जल्द ही इस ओर जिले के स्वास्थ्य महकमे को निर्देश भी प्राप्त हो जाएंगे।
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मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. आरके मिश्रा ने बताया कि एचआईवी पॉजीटिव संक्रमित के ब्लड की जांचों में छह माह तक निगेटिव ही आता था, जिससे संक्रमण की पुष्टि नहीं हो पाती। जिसे दूसरों को भी चढ़ा दिया जाता है। इसके बाद चढ़ाए गए ब्लड में एंटीबाडी डेवलप होने में करीब छह माह का समय लगता है जिसके बाद एचआईवी की जांच में संक्रमण पकड़ में आता है लेकिन तब तक देर हो चुकी होती है। ‘नाट’ एचआईवी पॉजीटिव को तत्काल पकड़ेगा।
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अभी तक दो माडल और एक मेजर को अनुमति
स्वास्थ्य विभाग के रिकार्डों की बात करें तो अभी तक प्रदेश में राज्य रक्त संचरण परिषद ने दो माडल ब्लड बैंकों और एक मेजर ब्लड बैंक को अनुमति दी है। माडल ब्लड बैंकों में पीजीआई लखनऊ व केजीएमसी लखनऊ शामिल हैं जबकि मेजर ब्लड बैंक में सिर्फ आईएमए बरेली को मान्यता दी गई है।

क्यों विशेष है न्यूक्लिक एसिड टेस्ट की जांच
ब्लड की एचआईवी, हेपेटाइटिस बी, सी, विड्राल, मलेरिया एवं फाइलेरिया की जांच की जाती है। सब कुछ नार्मल होने पर उसे व्यक्ति को चढ़ा दिया जाता है। लेकिन इस प्रणाली में भी एचआईवी जांच में तुरंत संक्रमित हुआ ब्लड पॉजीटिव नहीं आता। क्योंकि विंडो पीरिएड में इस साधारण जांच में उसे नहीं पकड़ा जा सकता। इसलिए न्यूक्लिक एसिड टेस्ट को खोजा गया है और जल्द ही बड़ी ब्लड बैंकों को इसकी सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।

यह मिलेगा टेस्ट से फायदा
ब्लड बैंक के लैब टेक्नीशियन मो. अकील खान ने बताया कि अभी तक एचआईवी टेस्ट होने के बाद जो ब्लड संक्रमित रह जाता था, वह पकड़ में नहीं आता था, और लोगों को चढ़ा दिया जाता था। यह टेस्ट होने के बाद ब्लड पकड़ में जा जाएगा और बेकार घोषित कर दिया जाएगा। उसे किसी को भी नहीं चढ़ाया जाएगा।


अनुमित के बाद उपलब्ध कराई जाएंगी किटें
परिषद की अनुमति मिलने के बाद इस टेस्ट के लिए किटें उपलब्ध कराई जाएंगी। जो काफी महंगी हैं। इसका प्रयोग करने के लिए संबंधित टेक्नीशियन व चिकित्सक को प्रशिक्षित किया जाएगा।

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