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Hardoi News: बारिश ने धान रोपाई को दी रफ्तार और मक्का व तिल के लिए बनी आफत
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हरदोई। रुक-रुककर हो रही बारिश ने जलभराव, गांवों और निकायों में गंदगी कारण तो बनी ही है, साथ ही इसके धान रोपाई के लिए राहत दी है। बारिश गन्ना की फसल के लिए वरदान है। मक्का और तिल्ली की पौध के लिए नुकसान पहुंचा रही है। बारिश के कारण खेतों में होने वाले जलभराव से मक्का और तिल्ली की पौध पूरी तरह से गल जाने की आशंका बनी हुई है।
पांच जुलाई से अब तक करीब 72 मिमी बारिश ने गांवों से लेकर शहर तक को लबालब कर दिया है। बारिश से धान के लिए तैयार किए जाने वाले खेतों में जलभराव ने पलेवा करा दिया। किसानों ने धान की पौध की रोपाई तेजी से शुरू करा दी है। माधौगंज क्षेत्र के बढ़ैयाखेड़ा, धनीगंज, सौहार, महुवापुरवा, हरियावां, सुरसा, टड़ियावां और बावन आदि क्षेत्र के गांवों में किसानों की ओर से धान की पौध की रोपाई कराई जाने लगी है।
बारिश ने मक्का और तिल्ली की पौध को नुकसान पहुंचाया है। शहब्दा के किसान बबलू सिंह, कमल सिंह, पृथ्वी, सुंदरलाल, संजीव सिंह, शिवकांत तिवारी आदि ने बताया कि उन लोगों ने मक्का और तिल्ली बोयी है। बारिश के पानी में अव्वल तो बीज बह गए। पहले बोयी गई फसल की पौध पानी भरने से खराब होने लगी है।
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कृषि विज्ञान केंद्र तत्योरा के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. सीपीएन गौतम ने बताया कि बारिश गन्ना, धान की रोपाई के लिए अच्छी रही है। भूड़ के एरिया के किसानों के लिए फायदेमंद है। मक्का, तिल, उर्द व मूंग और खीरा और सब्जियों की पौध को जलभराव से नुकसान पहुंच सकता है। किसानों को सलाह दी कि मक्का, तिल, उर्द व मूंग और खीरा आदि की फसलों वाले खेत में जलभराव न होने दें। कहा कि जुलाई के दूसरे सप्ताह में तिल की बुआई करनी चाहिए। इससे पैदावार बढ़ता है।
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गंगा और रामगंगा में 1.23 लाख क्यूसेक छोड़ा गया पानी
बैराजों से गंगा और रामगंगा नदियों में एक लाख 23241 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। बारिश और बैराजों से छोड़े जाने वाले पानी के आगे निकल जाने से गंगा, रामगंगा और गर्रा नदियों में अभी बाढ़ जैसे हालात नहीं है।
बाढ़ नियंत्रण कंट्रोल रूम से प्राप्त जानकारी में बताया गया कि गंगा में हरिद्वार से 44116, बिजनौर से 29853 व नरौरा बैराज से 35320 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। रामगंगा नदी में खो बैराज से 9280, हरेबली से 840 और रामनगर बैराज से 3922 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। डीएम एमपी सिंह ने बताया कि नदियों में जलस्तर की स्थिति नियंत्रण में है और बाढ़ जैसे हालात नहीं है। सवायजपुर और बिलग्राम के एसडीएम से कहा गया है कि वह नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रखें। राजस्व कर्मियों की टीम के माध्यम से बाढ़ चौकियों व प्रभावित गांवों के संबंध में जानकारी नियमित जानकारी लेकर रिपोर्ट प्राप्त कराएंगे।
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पांच जुलाई से अब तक करीब 72 मिमी बारिश ने गांवों से लेकर शहर तक को लबालब कर दिया है। बारिश से धान के लिए तैयार किए जाने वाले खेतों में जलभराव ने पलेवा करा दिया। किसानों ने धान की पौध की रोपाई तेजी से शुरू करा दी है। माधौगंज क्षेत्र के बढ़ैयाखेड़ा, धनीगंज, सौहार, महुवापुरवा, हरियावां, सुरसा, टड़ियावां और बावन आदि क्षेत्र के गांवों में किसानों की ओर से धान की पौध की रोपाई कराई जाने लगी है।
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बारिश ने मक्का और तिल्ली की पौध को नुकसान पहुंचाया है। शहब्दा के किसान बबलू सिंह, कमल सिंह, पृथ्वी, सुंदरलाल, संजीव सिंह, शिवकांत तिवारी आदि ने बताया कि उन लोगों ने मक्का और तिल्ली बोयी है। बारिश के पानी में अव्वल तो बीज बह गए। पहले बोयी गई फसल की पौध पानी भरने से खराब होने लगी है।
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कृषि विज्ञान केंद्र तत्योरा के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. सीपीएन गौतम ने बताया कि बारिश गन्ना, धान की रोपाई के लिए अच्छी रही है। भूड़ के एरिया के किसानों के लिए फायदेमंद है। मक्का, तिल, उर्द व मूंग और खीरा और सब्जियों की पौध को जलभराव से नुकसान पहुंच सकता है। किसानों को सलाह दी कि मक्का, तिल, उर्द व मूंग और खीरा आदि की फसलों वाले खेत में जलभराव न होने दें। कहा कि जुलाई के दूसरे सप्ताह में तिल की बुआई करनी चाहिए। इससे पैदावार बढ़ता है।
गंगा और रामगंगा में 1.23 लाख क्यूसेक छोड़ा गया पानी
बैराजों से गंगा और रामगंगा नदियों में एक लाख 23241 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। बारिश और बैराजों से छोड़े जाने वाले पानी के आगे निकल जाने से गंगा, रामगंगा और गर्रा नदियों में अभी बाढ़ जैसे हालात नहीं है।
बाढ़ नियंत्रण कंट्रोल रूम से प्राप्त जानकारी में बताया गया कि गंगा में हरिद्वार से 44116, बिजनौर से 29853 व नरौरा बैराज से 35320 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। रामगंगा नदी में खो बैराज से 9280, हरेबली से 840 और रामनगर बैराज से 3922 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। डीएम एमपी सिंह ने बताया कि नदियों में जलस्तर की स्थिति नियंत्रण में है और बाढ़ जैसे हालात नहीं है। सवायजपुर और बिलग्राम के एसडीएम से कहा गया है कि वह नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रखें। राजस्व कर्मियों की टीम के माध्यम से बाढ़ चौकियों व प्रभावित गांवों के संबंध में जानकारी नियमित जानकारी लेकर रिपोर्ट प्राप्त कराएंगे।