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Hardoi News: साइलेज फैक्टरी की महिला संचालक से प्रधानमंत्री दिल्ली में करेंगे संवाद
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फोटो 20: कंचन दीक्षित। स्रोत : स्वयं
हरदोई। मवेशियों के लिए प्रोटीनयुक्त साइलेज (आहार) बनाने के लिए प्रदेश की पहली फैक्टरी ने जिले में उत्पादन शुरू कर दिया है। फैक्टरी की महिला संचालक को नई दिल्ली में संवाद कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया है। 11 अक्तूबर को दिल्ली में भारत सरकार की तरफ से प्रधानमंत्री मोदी फैक्टरी संचालक कंचन दीक्षित से संवाद करेंगे।
मवेशियों को साल भर एक जैसा आहार उपलब्ध कराने के लिए कंचन दीक्षित ने विकास खंड कोथावां में साइलेज बनाने की प्रदेश की पहली फैक्टरी न्यूट्री फोडर इंटरप्राइजेज स्थापित की है। बताया कि साइलेज प्रोटीनयुक्त मवेशियों के लिए आहार है। यह हरा चारा और दाने के बीच की कड़ी है। इसको बनाने में कुल मात्रा के 15-20 प्रतिशत तक मक्का के दाने उपयोग में लाए जाते हैं। इसमें फाइबर और स्टार्च दोनों पाया जाता है। प्रोटीन की मात्रा करीब 8-10 प्रतिशत होती है जिससे साइलेज का उपयोग पशुपालक पूरे साल कर सकते हैं और मवेशी भी साइलेज को पसंद करते हैं। साइलेज की कीमत भी 8-10 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास रहती है।
बताया कि साइलेज बनाने के लिए मक्का की फसल के दूधिया दाने की स्थिति में ही भुट्टा सहित काटकर कुट्टी किया जाता है। कुट्टी किए गए चारा को शोधित किया जाता है। बेलर मशीन की मदद से उसे दबाकर एयर टाइट पैक में बंद किया जाता है और यह 21 से 30 दिन में बनकर तैयार हो जाता है।
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सभी मवेशियों को खिलाया जा सकता है साइलेज
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. अशोक कुमार सिंह ने बताया कि हरा चारा पूरे साल नहीं उपलब्ध हो पाता है। शासन ने मवेशियों को पूरे साल प्रोटीनयुक्त आहार उपलब्ध कराने के लिए साइलेज फैक्टरी की स्थापना को प्रोत्साहित किए जाने की व्यवस्था दी है। पशुपालन विभाग की नेशनल लाइव स्टॉक मिशन में न्यूट्री फोडर इंटरप्राइजेज को 50,00,000 रुपये का अनुदान भी दिया है। हरा चारा और दाने के विकल्प के तौर पर दोनों के मिश्रण से बनाए गए साइलेज को सभी मवेशियों को खिलाया जा सकता है। दुधारू मवेशियों को एक दिन में औसतन 10-25 किलोग्राम तक दिया जा सकता है।
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मवेशियों को साल भर एक जैसा आहार उपलब्ध कराने के लिए कंचन दीक्षित ने विकास खंड कोथावां में साइलेज बनाने की प्रदेश की पहली फैक्टरी न्यूट्री फोडर इंटरप्राइजेज स्थापित की है। बताया कि साइलेज प्रोटीनयुक्त मवेशियों के लिए आहार है। यह हरा चारा और दाने के बीच की कड़ी है। इसको बनाने में कुल मात्रा के 15-20 प्रतिशत तक मक्का के दाने उपयोग में लाए जाते हैं। इसमें फाइबर और स्टार्च दोनों पाया जाता है। प्रोटीन की मात्रा करीब 8-10 प्रतिशत होती है जिससे साइलेज का उपयोग पशुपालक पूरे साल कर सकते हैं और मवेशी भी साइलेज को पसंद करते हैं। साइलेज की कीमत भी 8-10 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास रहती है।
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बताया कि साइलेज बनाने के लिए मक्का की फसल के दूधिया दाने की स्थिति में ही भुट्टा सहित काटकर कुट्टी किया जाता है। कुट्टी किए गए चारा को शोधित किया जाता है। बेलर मशीन की मदद से उसे दबाकर एयर टाइट पैक में बंद किया जाता है और यह 21 से 30 दिन में बनकर तैयार हो जाता है।
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सभी मवेशियों को खिलाया जा सकता है साइलेज
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. अशोक कुमार सिंह ने बताया कि हरा चारा पूरे साल नहीं उपलब्ध हो पाता है। शासन ने मवेशियों को पूरे साल प्रोटीनयुक्त आहार उपलब्ध कराने के लिए साइलेज फैक्टरी की स्थापना को प्रोत्साहित किए जाने की व्यवस्था दी है। पशुपालन विभाग की नेशनल लाइव स्टॉक मिशन में न्यूट्री फोडर इंटरप्राइजेज को 50,00,000 रुपये का अनुदान भी दिया है। हरा चारा और दाने के विकल्प के तौर पर दोनों के मिश्रण से बनाए गए साइलेज को सभी मवेशियों को खिलाया जा सकता है। दुधारू मवेशियों को एक दिन में औसतन 10-25 किलोग्राम तक दिया जा सकता है।

फोटो 20: कंचन दीक्षित। स्रोत : स्वयं