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‘दर्द का इतिहास है हिंदी गायन’
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
Updated Sun, 28 Dec 2014 11:07 PM IST
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सामाजिक संस्था ‘अनुभूति’ के तत्वावधान मेें रविवार
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को आर्य समाज मंदिर में कवि गोष्ठी व साहित्यकारों को सम्मानित करने को
कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसका शुभारंभ संस्थाध्यक्ष डा. ईश्वर चंद्र
वर्मा ने किया। उसके बाद डा. निशानाथ अवस्थी ने मां सरस्वती की वंदना की।
कार्यक्रम में साहित्यकार बृजराज सिंह तोमर, डा. रोहिताश्व अस्थाना, रामरूप द्विवेदी को संस्था की ओर से अंगवस्त्र, प्रतीत चिन्ह एवं सम्मान पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस मौके पर तीनोें साहित्यकारोें के व्यक्तित्व और कृतित्व पर एक परिपत्र भी संस्थाध्यक्ष द्वारा वितरित किया गया, साथ ही साहित्य के क्षेत्र में तीनों की प्रशंसा की गई।
संस्थाध्यक्ष ने कहा कि संस्था साहित्यक ारों के सम्मान की यह श्रृंखला अनवरत जारी रखेगी। समय समय पर विचार गोष्ठी, पुस्तक समीक्षा, काव्य गोष्ठी के आयोजनों के साथ साथ नवोदित साहित्यकारों/कवियोें को आगे बढ़ाने का हर संभव प्रयास किया जाएगा। वरिष्ठ कवि सुरेश पाल सोमवंशी की अध्यक्षता में काव्य गोष्ठी शुरू हुई, जिसमें कवि रामरूप त्रिवेदी की कविता ‘विश्व मेें चिर शांति का संदेश हो कविता हमारी’।
डा. रोहिताश्व अस्थाना की गजल ‘दर्द का इतिहास है हिंदी गायन’। बृजराज सिंह तोमर की कविता ‘राष्ट्र भावना का हुआ इतना अधिक अभाव’। निशानाथ अवस्थी का दोहा ‘निज बोली में ओज और राष्ट्र भक्ति का भाव’ आदि कविताओं को श्रोताओं ने खूब सराहा।
इसके अलावा रामचंद्र सिंह, डा. बैरिस्टर सिंह यादव, जयशंकर मिश्र, राजकुमार सिंह, डा. राजेंद्र सिंह, वेदप्रकाश अवस्थी, अरविंद मिश्र, आदर्श द्विवेदी, गिरीश चंद्र श्रीवास्तव, संत पांडेय, कृष्ण गोपाल पांडेय, चंद्र शेखर प्रसाद मिश्र, हरिश्याम शर्मा, डा. ईश्वर चंद्र वर्मा ने अपनी काव्य रचनाओं से श्रोताओें को भाव विभोर कर दिया।
इस मौके पर डा. शिवशरण सिंह चौहान, डा. ब्रह्मस्वरूप पांडेय, सुमत प्रसाद जैन, डा. सुरेश अग्निहोत्री, राजीव मोहन अवस्थी, अशोक बाजपेयी, राकेश सेठ, सतीश चंद्र शुक्ल, गिरीश चंद्र बाजपेयी, डा. शिवशंकर द्विवेदी, विवेकानंद झा, भजनलाल गुप्ता, रामनरेश बाजपेयी आदि मौजूद थे। उपस्थित सभी श्रोताओें को संस्था की ओर से कैलेंडर व सदस्यों को डायरी वितरित की गई। राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
कार्यक्रम में साहित्यकार बृजराज सिंह तोमर, डा. रोहिताश्व अस्थाना, रामरूप द्विवेदी को संस्था की ओर से अंगवस्त्र, प्रतीत चिन्ह एवं सम्मान पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस मौके पर तीनोें साहित्यकारोें के व्यक्तित्व और कृतित्व पर एक परिपत्र भी संस्थाध्यक्ष द्वारा वितरित किया गया, साथ ही साहित्य के क्षेत्र में तीनों की प्रशंसा की गई।
संस्थाध्यक्ष ने कहा कि संस्था साहित्यक ारों के सम्मान की यह श्रृंखला अनवरत जारी रखेगी। समय समय पर विचार गोष्ठी, पुस्तक समीक्षा, काव्य गोष्ठी के आयोजनों के साथ साथ नवोदित साहित्यकारों/कवियोें को आगे बढ़ाने का हर संभव प्रयास किया जाएगा। वरिष्ठ कवि सुरेश पाल सोमवंशी की अध्यक्षता में काव्य गोष्ठी शुरू हुई, जिसमें कवि रामरूप त्रिवेदी की कविता ‘विश्व मेें चिर शांति का संदेश हो कविता हमारी’।
डा. रोहिताश्व अस्थाना की गजल ‘दर्द का इतिहास है हिंदी गायन’। बृजराज सिंह तोमर की कविता ‘राष्ट्र भावना का हुआ इतना अधिक अभाव’। निशानाथ अवस्थी का दोहा ‘निज बोली में ओज और राष्ट्र भक्ति का भाव’ आदि कविताओं को श्रोताओं ने खूब सराहा।
इसके अलावा रामचंद्र सिंह, डा. बैरिस्टर सिंह यादव, जयशंकर मिश्र, राजकुमार सिंह, डा. राजेंद्र सिंह, वेदप्रकाश अवस्थी, अरविंद मिश्र, आदर्श द्विवेदी, गिरीश चंद्र श्रीवास्तव, संत पांडेय, कृष्ण गोपाल पांडेय, चंद्र शेखर प्रसाद मिश्र, हरिश्याम शर्मा, डा. ईश्वर चंद्र वर्मा ने अपनी काव्य रचनाओं से श्रोताओें को भाव विभोर कर दिया।
इस मौके पर डा. शिवशरण सिंह चौहान, डा. ब्रह्मस्वरूप पांडेय, सुमत प्रसाद जैन, डा. सुरेश अग्निहोत्री, राजीव मोहन अवस्थी, अशोक बाजपेयी, राकेश सेठ, सतीश चंद्र शुक्ल, गिरीश चंद्र बाजपेयी, डा. शिवशंकर द्विवेदी, विवेकानंद झा, भजनलाल गुप्ता, रामनरेश बाजपेयी आदि मौजूद थे। उपस्थित सभी श्रोताओें को संस्था की ओर से कैलेंडर व सदस्यों को डायरी वितरित की गई। राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।