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Hardoi News: प्रधानी की चाहत में पहले टूटा परिवार और अब हो गई हत्या
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फोटो
हरपालपुर। प्रधान की कुर्सी हासिल करने की चाहत ने पहले परिवार में विघटन कराया और अब एक जान भी ले ली। कोतवाली क्षेत्र के अर्जुनपुर में अधेड़ की हत्या के पीछे की वजह कुछ यही है। लगभग तीन दशक से पंचायत की राजनीति में यही परिवार हावी रहा है। अब परिवार के ही दो लोग प्रधान पद के लिए आमने सामने आ गए, तो विवाद तूल पकड़ गया।
अर्जुनपुर निवासी अशोक सिंह और उनके बड़े भाई कैलाश सिंह का गांव में खासा दबदबा रहा है। अशोक और कैलाश सगे भाई हैं। वर्ष 1995 के पंचायत चुनाव में इनकी मां रामबेटी प्रधान निर्वाचित हुई थीं। वर्ष 2000 में हुए चुनाव में अशोक की भाभी यानी कैलाश की पत्नी बड़ी बिटिया प्रधान निर्वाचित हुई थीं। वर्ष 2005 में गांव के ही सुरेंद्र सिंह प्रधान बने थे। सुरेंद्र सिंह मौजूदा समय में नगरिया कट के प्रधान हैं। वर्ष 2010 के पंचायत चुनाव में फिर से कैलाश और अशोक मिलकर अपने कर्मचारी करन को आरक्षित सीट पर जिताने में कामयाब रहे।
वर्ष 2015 के चुनाव में कैलाश के पुत्र श्यामेंद्र सिंह मैदान में उतरे और एकजुटता से जीत हासिल करने में सफल रहे। वर्ष 2021 में हुए पंचायत चुनाव में पद महिला के लिए आरक्षित होने पर श्यामेंद्र की पत्नी आरती मैदान में उतरीं। वह भी जीत गईं। पिछले कुछ समय से अशोक और कैलाश के बीच मनमुटाव हो गया। इस बीच अशोक के बेटे अरविंद ने भी प्रधान का चुनाव लड़ने की तैयारी शुरू कर दी। अरविंद को चुनावी गणित की पूरी जानकारी थी और बीते दिनों उसने मतदाता सूची में 142 नाम फर्जी होने की शिकायत करदी। इसको लेकर मनमुटाव बढ़ गया। इस मनमुटाव का परिणाम अशोक की हत्या के तौर पर सामने आया।
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अर्जुनपुर निवासी अशोक सिंह और उनके बड़े भाई कैलाश सिंह का गांव में खासा दबदबा रहा है। अशोक और कैलाश सगे भाई हैं। वर्ष 1995 के पंचायत चुनाव में इनकी मां रामबेटी प्रधान निर्वाचित हुई थीं। वर्ष 2000 में हुए चुनाव में अशोक की भाभी यानी कैलाश की पत्नी बड़ी बिटिया प्रधान निर्वाचित हुई थीं। वर्ष 2005 में गांव के ही सुरेंद्र सिंह प्रधान बने थे। सुरेंद्र सिंह मौजूदा समय में नगरिया कट के प्रधान हैं। वर्ष 2010 के पंचायत चुनाव में फिर से कैलाश और अशोक मिलकर अपने कर्मचारी करन को आरक्षित सीट पर जिताने में कामयाब रहे।
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वर्ष 2015 के चुनाव में कैलाश के पुत्र श्यामेंद्र सिंह मैदान में उतरे और एकजुटता से जीत हासिल करने में सफल रहे। वर्ष 2021 में हुए पंचायत चुनाव में पद महिला के लिए आरक्षित होने पर श्यामेंद्र की पत्नी आरती मैदान में उतरीं। वह भी जीत गईं। पिछले कुछ समय से अशोक और कैलाश के बीच मनमुटाव हो गया। इस बीच अशोक के बेटे अरविंद ने भी प्रधान का चुनाव लड़ने की तैयारी शुरू कर दी। अरविंद को चुनावी गणित की पूरी जानकारी थी और बीते दिनों उसने मतदाता सूची में 142 नाम फर्जी होने की शिकायत करदी। इसको लेकर मनमुटाव बढ़ गया। इस मनमुटाव का परिणाम अशोक की हत्या के तौर पर सामने आया।
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