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सुहाने सफर में जर्जर सड़कों का ब्रेक
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
Updated Sat, 24 Jan 2015 12:14 AM IST
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ब्लाक क्षेत्र के दर्जनों प्रमुख मार्ग पीडब्ल्यूडी
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की उदासीनता से दिन प्रतिदिन खस्ताहाल होते जा रहे हैं। आलम यह है कि अब इन
सड़कों पर निकलना जान जोखिम भरा साबित हो रहा है। कब कौन हादसे का शिकार
हो जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता। इसके बावजूद जिम्मेदार अनजान बने हैं।
क्षेत्रीय ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधि से लेकर पीडब्ल्यूडी तक को इस संबंध में अवगत कराया, पर नतीजा ढाक के तीन पात ही रहा। राघौपुर-मेंहदीघाट मार्ग का निर्माण तीन साल पहले कराया गया था, पर निर्माण के समय गुणवत्ता का ख्याल न रखने से यह मार्ग कुछ समय में ही उखड़ना शुरू हो गया। अब इसमें जगह जगह गड्ढे हो गए हैं।
प्याऊ कुआं, ठठिया, कल्यानपुर के निकट सड़क पर इतने बड़े-बड़े गड्ढे हैं कि यदि जरा सी भी चूक हुई तो दुर्घटना तय है। यह स्थिति तब है जब यह मार्ग कन्नौज-लखनऊ को जोड़ने में अहम भूमिका अदा करता है। प्रतिदिन इसी मार्ग से कैसर बाग डिपो की दर्जनों बसें कन्नौज होकर दिल्ली जाती हैं। इसके बाद भी जिम्मेदार बेखबर हैं।
करीब चार दशक पहले बने गंजजलालाबाद-नयागांव मार्ग पर निर्माण एजेंसी ने कई जगह पर डामरीकरण नहीं किया। इससे सड़क में गड्ढे हो गए। बरसात के समय इस सड़क से निकलने में राहगीरों व वाहनों को पसीने छूट जाते हैं। कभी-कभार वाहन पलट भी जाते हैं।
लोग हादसों का शिकार हो रहे हैं। जलभराव होने पर गंजमुरादाबाद जाने को लोगों को मल्लावां होकर जाना पड़ता है। इससे 20 किमी का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ता है और आर्थिक नुकसान भी होता है। इस मार्ग पर भइनखेड़ा से लेकर सरैया तक, नसीरपुर चौराहे से लालपुर तक सड़क का अस्तित्व ही समाप्त हो गया है।
ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों से कई बार इस सड़क का निर्माण कराने की मांग की, पर किसी ने कोई ध्यान नहीं दिया। इसी तरह मल्लावां-बरौना मार्ग का निर्माण करीब एक दशक पहले हुआ था। दोनों के बीच की दूरी सात किमी है। निर्माण के बाद से सड़क की मरम्मत न होने से पूरी तरह उखड़ गई है।
बरसात में जगह-जगह हुए गड्ढे आवागमन को दुश्वार किए हैं। साइकिल सवार हो या बड़ा वाहन, या फिर पैदल राहगीर, सभी को यहां से निकलने में नाकाें चने चबाने पड़ते है। यह हालत तब है जब इस मार्ग से क्षेत्र के करीब आधा सैकड़ा गांव के लोगों का मल्लावां आना-जाना होता है, पर जिम्मेदारों को यह दिखाई नहीं दे रहा है।
क्षेत्रीय ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधि से लेकर पीडब्ल्यूडी तक को इस संबंध में अवगत कराया, पर नतीजा ढाक के तीन पात ही रहा। राघौपुर-मेंहदीघाट मार्ग का निर्माण तीन साल पहले कराया गया था, पर निर्माण के समय गुणवत्ता का ख्याल न रखने से यह मार्ग कुछ समय में ही उखड़ना शुरू हो गया। अब इसमें जगह जगह गड्ढे हो गए हैं।
प्याऊ कुआं, ठठिया, कल्यानपुर के निकट सड़क पर इतने बड़े-बड़े गड्ढे हैं कि यदि जरा सी भी चूक हुई तो दुर्घटना तय है। यह स्थिति तब है जब यह मार्ग कन्नौज-लखनऊ को जोड़ने में अहम भूमिका अदा करता है। प्रतिदिन इसी मार्ग से कैसर बाग डिपो की दर्जनों बसें कन्नौज होकर दिल्ली जाती हैं। इसके बाद भी जिम्मेदार बेखबर हैं।
करीब चार दशक पहले बने गंजजलालाबाद-नयागांव मार्ग पर निर्माण एजेंसी ने कई जगह पर डामरीकरण नहीं किया। इससे सड़क में गड्ढे हो गए। बरसात के समय इस सड़क से निकलने में राहगीरों व वाहनों को पसीने छूट जाते हैं। कभी-कभार वाहन पलट भी जाते हैं।
लोग हादसों का शिकार हो रहे हैं। जलभराव होने पर गंजमुरादाबाद जाने को लोगों को मल्लावां होकर जाना पड़ता है। इससे 20 किमी का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ता है और आर्थिक नुकसान भी होता है। इस मार्ग पर भइनखेड़ा से लेकर सरैया तक, नसीरपुर चौराहे से लालपुर तक सड़क का अस्तित्व ही समाप्त हो गया है।
ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों से कई बार इस सड़क का निर्माण कराने की मांग की, पर किसी ने कोई ध्यान नहीं दिया। इसी तरह मल्लावां-बरौना मार्ग का निर्माण करीब एक दशक पहले हुआ था। दोनों के बीच की दूरी सात किमी है। निर्माण के बाद से सड़क की मरम्मत न होने से पूरी तरह उखड़ गई है।
बरसात में जगह-जगह हुए गड्ढे आवागमन को दुश्वार किए हैं। साइकिल सवार हो या बड़ा वाहन, या फिर पैदल राहगीर, सभी को यहां से निकलने में नाकाें चने चबाने पड़ते है। यह हालत तब है जब इस मार्ग से क्षेत्र के करीब आधा सैकड़ा गांव के लोगों का मल्लावां आना-जाना होता है, पर जिम्मेदारों को यह दिखाई नहीं दे रहा है।