फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Hardoi News ›   The address of only one firm was showing the greed of commission of three lakh rupees per month.

Hardoi News: तीन लाख रुपये महीने के कमीशन का लालच बता रहा था एक ही फर्म का पता

Sun, 26 May 2024 10:31 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 26 May 2024 10:31 PM IST
विज्ञापन
The address of only one firm was showing the greed of commission of three lakh rupees per month.
हरदोई। पोषाहार बनाने के लिए एक विशेष फर्म से एक ही साल में लगभग 10 करोड़ रुपये के कच्चे माल की खरीद का मामला सामने आने के बाद विभाग में खलबली मची है।
विज्ञापन

अनौपचारिक बातचीत और नाम न छापने के अनुरोध पर कुछ कर्मचारी बताते हैं कि सारा खेल कमीशनबाजी का है। संबंधित फर्म से प्रत्येक माह एनआरएलएम के कुछ जिम्मेदारों को तीन लाख रुपये तक का कमीशन दिया जाता है। यही वजह है कि बावन से लेकर बेहंदर तक के टीएचआर प्लांट के कच्चे माल की खरीद एक विशेष फर्म से ही होती है।
विज्ञापन

बाल विकास पुष्टाहार विभाग की ओर से आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषाहार भेजा जाता है। आंगनबाड़ी केंद्रों में पंजीकृत बच्चों, गर्भवती और धात्री महिलाओं को पोषाहार दिया जाता है। पोषाहार तैयार करने के लिए जिले में आठ टीएचआर प्लांट लगे हैं। स्वयं सहायता समूह इनका संचालन करते हैं। पोषाहार तैयार करने के लिए कच्चे माल की खरीद की जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

कच्चे माल की खरीद पिछले एक वर्ष में कोथावां में संचालित एक विशेष फर्म से ही की गई। लगभग 10 करोड़ रुपये का भुगतान फर्म को किया गया। एक ही फर्म से सभी टीएचआर प्लांट ने कच्चा माल खरीदा, तो चर्चाएं तेज हो गईं। डीएम ने इस मामले की जांच के लिए कमेटी का गठन कर दिया। हकीकत तो जांच रिपोर्ट आने के बाद पता चलेगी, लेकिन राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़े जिम्मेदार शक के घेरे में हैं। दरअसल आम चर्चा भी यही है कि तीन लाख रुपये महीने के कमीशन के चलते सारा कच्चा माल एक ही फर्म से खरीदा गया है।

डीएम की ओर से बनाई गई जांच कमेटी में जिला विकास अधिकारी और परियोजना निदेशक शामिल हैं। इनमें से एक अफसर ने संबंधित स्वयं सहायता समूहों के अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष से पूछताछ की। इसमें खुद के साथ ही विभागीय अफसरों को बचाने के लिए गजब का तर्क दिया जा रहा है।

इन लोगों का कहना है कि एक ही दुकान से सस्ता और उधार माल मिल रहा था, इसलिए सबने वहीं से खरीद लिया। हरदोई, संडीला और शाहाबाद में इतनी बड़ी बाजार होने के बाद भी एक छोटे से कस्बे की दुकान में इतना ज्यादा उधार और सस्ता माल मिलने के तर्क पर भी सवाल उठ रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed