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Hardoi News: 25 एक्सरे के बाद थम जाती 50 एमए की एक्सरे मशीन
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हरदोई। मेडिकल कॉलेज में एक्सरे की व्यवस्था लंबे समय से मरीजों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। डिजिटल एक्सरे मशीन करीब एक माह से खराब पड़ी है। 100 एमए की पोर्टेबल मशीन भी बंद है, मरीजों का 50 एमए की मशीन से एक्सरे हो रहा है। जो लगातार जांच का भार नहीं उठा पा रही है। करीब 25 एक्सरे होने के बाद मशीन गर्म होकर बंद हो जाती है। जांच कराने पहुंचे मरीज मशीन दोबारा चलने के इंतजार में बैठे रहते हैं।
मेडिकल कॉलेज में वैसे तो रोजाना 160 से 180 मरीजों के करीब 300 से 350 एक्सरे होते थे। बीते 12 अगस्त को मुख्य डिजिटल एक्सरे मशीन ड्रैग बोर्ड खराब होने से बंद हो गई। 100 एमए की पोर्टेबल मशीन से जांच शुरू हो गई। इस मशीन का भी इन्वर्टर खराब हो गया तो यह मशीन भी 12 दिनों से बंद है। अब मरीजों का एक्सरे 50 एमए की मशीन से हो रहा है जिसकी क्षमता सिर्फ 25 एक्सरे की है।
कर्मचारी जैसे-तैसे 28 से 30 एक्सरे करते हैं कि मशीन के डिस्प्ले बोर्ड पर रेड अलर्ट दिखने लगता है और मशीन खुद बंद हो जाती है। जब मशीन सामान्य होती है और उस पर ग्रीन अलर्ट आता है तब जाकर आगे एक्सरे हो पाते हैं। मरीज इस समस्या से रोज ही दो-चार हो रहे हैं। इसके बाद भी मेडिकल कॉलेज प्रशासन लापरवाही की चादर ओढ़े है। मशीन न बनने से तमाम मरीजों को घंटों इंतजार के बाद भी बैरंग होना पड़ता है।
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एक्सरे ट्यूब की वजह से बंद है डिजिटल मशीन
मुख्य डिजिटल एक्सरे मशीन में पहले ड्रैग कंट्रोल बोर्ड में खराबी आई थी। बोर्ड बदलने के बाद एक्सरे ट्यूब में तकनीकी खराबी सामने आ गई। इसके बाद से मशीन का संचालन प्रभावित है। नई मशीन उपलब्ध भी है लेकिन संसाधनों के अभाव में उसके संचालन की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी है।
समय और पैसा खर्च कर रहे मरीज
मरीजों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में जांच की सुविधा मिलने की उम्मीद में आते हैं लेकिन मशीन खराब होने के कारण समय और पैसा दोनों खर्च हो रहे हैं। कई मरीजों को मजबूरी में निजी जांच केंद्रों पर जाना पड़ रहा है। वहां जांच के लिए उन्हें 300 से 500 रुपये की अतिरिक्त रकम खर्च करनी पड़ रही है।
डिजिटल मशीन को बनाने के लिए कार्यदायी संस्था सायरिक्स को निर्देशित किया जा चुका है। बताया गया कि उपकरण आ गया है। तकनीकी समस्या दूर होने के बाद एक्सरे की व्यवस्था सामान्य होने की उम्मीद है। -डॉ. जेबी गोगोई, प्रधानाचार्य
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मेडिकल कॉलेज में वैसे तो रोजाना 160 से 180 मरीजों के करीब 300 से 350 एक्सरे होते थे। बीते 12 अगस्त को मुख्य डिजिटल एक्सरे मशीन ड्रैग बोर्ड खराब होने से बंद हो गई। 100 एमए की पोर्टेबल मशीन से जांच शुरू हो गई। इस मशीन का भी इन्वर्टर खराब हो गया तो यह मशीन भी 12 दिनों से बंद है। अब मरीजों का एक्सरे 50 एमए की मशीन से हो रहा है जिसकी क्षमता सिर्फ 25 एक्सरे की है।
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कर्मचारी जैसे-तैसे 28 से 30 एक्सरे करते हैं कि मशीन के डिस्प्ले बोर्ड पर रेड अलर्ट दिखने लगता है और मशीन खुद बंद हो जाती है। जब मशीन सामान्य होती है और उस पर ग्रीन अलर्ट आता है तब जाकर आगे एक्सरे हो पाते हैं। मरीज इस समस्या से रोज ही दो-चार हो रहे हैं। इसके बाद भी मेडिकल कॉलेज प्रशासन लापरवाही की चादर ओढ़े है। मशीन न बनने से तमाम मरीजों को घंटों इंतजार के बाद भी बैरंग होना पड़ता है।
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एक्सरे ट्यूब की वजह से बंद है डिजिटल मशीन
मुख्य डिजिटल एक्सरे मशीन में पहले ड्रैग कंट्रोल बोर्ड में खराबी आई थी। बोर्ड बदलने के बाद एक्सरे ट्यूब में तकनीकी खराबी सामने आ गई। इसके बाद से मशीन का संचालन प्रभावित है। नई मशीन उपलब्ध भी है लेकिन संसाधनों के अभाव में उसके संचालन की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी है।
समय और पैसा खर्च कर रहे मरीज
मरीजों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में जांच की सुविधा मिलने की उम्मीद में आते हैं लेकिन मशीन खराब होने के कारण समय और पैसा दोनों खर्च हो रहे हैं। कई मरीजों को मजबूरी में निजी जांच केंद्रों पर जाना पड़ रहा है। वहां जांच के लिए उन्हें 300 से 500 रुपये की अतिरिक्त रकम खर्च करनी पड़ रही है।
डिजिटल मशीन को बनाने के लिए कार्यदायी संस्था सायरिक्स को निर्देशित किया जा चुका है। बताया गया कि उपकरण आ गया है। तकनीकी समस्या दूर होने के बाद एक्सरे की व्यवस्था सामान्य होने की उम्मीद है। -डॉ. जेबी गोगोई, प्रधानाचार्य