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गोली तीनों को लगी, पर आज जिंदा हूं तो बस मैं...
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फोटो-3-जानकारी देते जिले के संडीला लोहरी निवासी कर्नल आदित्य प्रताप सिंह। संवाद
- फोटो : HARDOI
हरदोई। शहीद विक्रम बत्रा व अमित सेमवाल जैसे जांबाजों के साथ गुजारे लम्हों को याद करके जिले के संडीला निवासी कर्नल आदित्य की आंखें भर आईं। उनका कहना है कि अपनों से बिछड़ने का दर्द हमेशा सताता है। गोली हम तीनों को लगी पर मैं बच गया। साथियों की शहादत हमेशा याद रहेगी।
कारगिल विजय दिवस पर संडीला के लोहरी ग्राम निवासी कर्नन आदित्य प्रताप सिंह ने कहा कि पालमपुर बस स्टैंड पर उनका विक्रम बत्रा व अमित सेमवाल से बिछड़ने का लम्हा वह भूल नहीं सकते। शहीद विक्रम को परमवीर और अमित सेमवाल को कीर्ति चक्र मिला। दोनों हमेशा के लिए देश वासियों के दिलों में जगह बना गए। युद्ध से पहले विक्रम बत्रा के घर पर वह दो दिन रुके थे। दोनों उनके बैच मैट थे। उन्होंने कारगिल की याद ताजा कर कहा कि 14 हजार फिट की ऊंचाई तक ले जाकर दुश्मनों को मार गिराने का आर्डर। दिल दिमाग में कुछ नहीं बस देश की खातिर दुश्मनों की सीना छलनी करना ही लक्ष्य था। कारगिल युद्ध के दौरान उनकी पोस्टिंग राजोरी प्वाइंट पर थी। उनकी सिक्स लाइट इन कंट्री रेजीमेंट को आर्डर मिला कि उन्हें कारगिल युद्ध के लिए जाना है। पहले उन्हें रिजर्व में लगाया गया फिर तीसरे दिन ही आगे भेज दिया गया।
दांयी आंख की रोशनी गई पर जीत का गर्व
कारगिल के बाद सितंबर-अक्तूबर में उनको मिलाकर एक कमांडो की फौज पीर पंजाल के पास ऑपरेशन को भेज दी गई। यहां जंग के दौरान उनकी दांयी आंख के नीचे एक गोली लगी। जिसके बाद उनकी आंख की रोशनी चली गई लेकिन आज भी इस बात का गर्व है कि वहां भी जीत उन्हीं की टीम की रही।
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युवा भी देशहित में करें कार्य
कर्नल आदित्य ने देश के युवाओं को संदेश दिया कि कभी-कभी वह एकांत में सोचते हैं कि नौकरी तो सभी कर रहे पर फौजी जान को दांव पर लगाते हैं। इसका देश के युवाओं को थोड़ा सम्मान रखना चाहिए। युवा भी कुछ ऐसा कर दें जो देशहित में हो। युवा नशा, भ्रष्टाचार आदि में लगकर जवानों की कुर्बानियों को यूं न जाया होने दें।
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कारगिल विजय दिवस पर संडीला के लोहरी ग्राम निवासी कर्नन आदित्य प्रताप सिंह ने कहा कि पालमपुर बस स्टैंड पर उनका विक्रम बत्रा व अमित सेमवाल से बिछड़ने का लम्हा वह भूल नहीं सकते। शहीद विक्रम को परमवीर और अमित सेमवाल को कीर्ति चक्र मिला। दोनों हमेशा के लिए देश वासियों के दिलों में जगह बना गए। युद्ध से पहले विक्रम बत्रा के घर पर वह दो दिन रुके थे। दोनों उनके बैच मैट थे। उन्होंने कारगिल की याद ताजा कर कहा कि 14 हजार फिट की ऊंचाई तक ले जाकर दुश्मनों को मार गिराने का आर्डर। दिल दिमाग में कुछ नहीं बस देश की खातिर दुश्मनों की सीना छलनी करना ही लक्ष्य था। कारगिल युद्ध के दौरान उनकी पोस्टिंग राजोरी प्वाइंट पर थी। उनकी सिक्स लाइट इन कंट्री रेजीमेंट को आर्डर मिला कि उन्हें कारगिल युद्ध के लिए जाना है। पहले उन्हें रिजर्व में लगाया गया फिर तीसरे दिन ही आगे भेज दिया गया।
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दांयी आंख की रोशनी गई पर जीत का गर्व
कारगिल के बाद सितंबर-अक्तूबर में उनको मिलाकर एक कमांडो की फौज पीर पंजाल के पास ऑपरेशन को भेज दी गई। यहां जंग के दौरान उनकी दांयी आंख के नीचे एक गोली लगी। जिसके बाद उनकी आंख की रोशनी चली गई लेकिन आज भी इस बात का गर्व है कि वहां भी जीत उन्हीं की टीम की रही।
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युवा भी देशहित में करें कार्य
कर्नल आदित्य ने देश के युवाओं को संदेश दिया कि कभी-कभी वह एकांत में सोचते हैं कि नौकरी तो सभी कर रहे पर फौजी जान को दांव पर लगाते हैं। इसका देश के युवाओं को थोड़ा सम्मान रखना चाहिए। युवा भी कुछ ऐसा कर दें जो देशहित में हो। युवा नशा, भ्रष्टाचार आदि में लगकर जवानों की कुर्बानियों को यूं न जाया होने दें।