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18 किलोमीटर ठेलिया खींच नि:शक्त पिता को कलक्ट्रेट लाया 14 वर्षीय पुत्र
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हरदोई में अपने विकलांग पिता को ठिलिया चलाकर कलक्ट्रेट तक लाया उसका पुत्र अनिके त कुमार। संवाद
- फोटो : HARDOI
हरदोई। नि:शक्त पिता को एक आवास की दरकार है। चलने में लाचार होने के बाद भी वह प्रधानमंत्री आवास के लिए कार्यालयों के चक्कर लगा-लगाकर थक गया। 14 वर्षीय पुत्र से पिता की ये पीड़ा देखी न गई। आटो व टैक्सी के पैसे न होने पर शनिवार को वह नि:शक्त पिता को ठिलिया पर खींचकर 18 किलोमीटर दूर कलक्ट्रेट पहुंचा। जिलाधिकारी को पीड़ा बताकर आवास की मांग की। बेबस पिता का कहना है कि गांव से लेकर ब्लाक तक उसकी नहीं सुनी गई।
बावन ब्लाक के स्वागपुरवा मजरा बेहटाधीरा निवासी नि:शक्त अशोक कुमार राजमिस्त्री का काम करता था। 2015 में चरौली पुलिया पर टेंपो पलटने के कारण उसकी गर्दन व कूल्हे की हड्डी टूट गई थी। उसके परिवार में पत्नी व सात बच्चे हैं। 14 वर्षीय पुत्र अनिकेत जैसे-तैसे खेतों में काम कर परिवार का भरण पोषण कर रहा है।
पिछली बरसात में अशोक का घर भी गिर गया था। किसी तरह झोपड़ी में गुजारा हो रहा है। अशोक ने आरोप लगाया कि गांव में बिना प्रधान की रजामंदी के प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत नहीं होते। आवास के लिए दौड़भाग में उसकी बचत भी खर्च हो गई। आने-जाने का खर्च न होने के कारण बेटा अनिकेत उसे ठिलिया खींचकर डीएम की चौखट तक ले आया। उसने जिलाधिकारी अविनाश कुमार को ज्ञापन देकर परिवार की व्यथा बताई और आवास की मांग की है।
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पांच साल पहले आवेदन के बाद भी विकलांग पेंशन नहीं
नि:शक्त अशोक ने बताया कि पांच साल पहले दुर्घटना में विकलांग होने के बाद ही विकलांग पेंशन के लिए आवेदन किया था। लेकिन एक बार भी विकलांग पेंशन नहीं मिली। विभागीय अधिकारी ने आश्वस्त किया है कि उसकी पेंशन स्वीकृत हो गई है। जल्द ही खाते में राशि भेज दी जाएगी।
80 फीसदी विकलांगता
स्वास्थ्य विभाग के प्रमाण पत्र के मुताबिक अशोक 80 फीसदी तक विकलांगता की श्रेणी में है। इसके बाद भी उसे योजनाओं का लाभ नहीं मिलने पर लोग व्यवस्था पर सवाल भी उठा रहे हैं।
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बावन ब्लाक के स्वागपुरवा मजरा बेहटाधीरा निवासी नि:शक्त अशोक कुमार राजमिस्त्री का काम करता था। 2015 में चरौली पुलिया पर टेंपो पलटने के कारण उसकी गर्दन व कूल्हे की हड्डी टूट गई थी। उसके परिवार में पत्नी व सात बच्चे हैं। 14 वर्षीय पुत्र अनिकेत जैसे-तैसे खेतों में काम कर परिवार का भरण पोषण कर रहा है।
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पिछली बरसात में अशोक का घर भी गिर गया था। किसी तरह झोपड़ी में गुजारा हो रहा है। अशोक ने आरोप लगाया कि गांव में बिना प्रधान की रजामंदी के प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत नहीं होते। आवास के लिए दौड़भाग में उसकी बचत भी खर्च हो गई। आने-जाने का खर्च न होने के कारण बेटा अनिकेत उसे ठिलिया खींचकर डीएम की चौखट तक ले आया। उसने जिलाधिकारी अविनाश कुमार को ज्ञापन देकर परिवार की व्यथा बताई और आवास की मांग की है।
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पांच साल पहले आवेदन के बाद भी विकलांग पेंशन नहीं
नि:शक्त अशोक ने बताया कि पांच साल पहले दुर्घटना में विकलांग होने के बाद ही विकलांग पेंशन के लिए आवेदन किया था। लेकिन एक बार भी विकलांग पेंशन नहीं मिली। विभागीय अधिकारी ने आश्वस्त किया है कि उसकी पेंशन स्वीकृत हो गई है। जल्द ही खाते में राशि भेज दी जाएगी।
80 फीसदी विकलांगता
स्वास्थ्य विभाग के प्रमाण पत्र के मुताबिक अशोक 80 फीसदी तक विकलांगता की श्रेणी में है। इसके बाद भी उसे योजनाओं का लाभ नहीं मिलने पर लोग व्यवस्था पर सवाल भी उठा रहे हैं।