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Hardoi News: झोलाछाप के इलाज से शिक्षक के सात वर्षीय इकलौते बेटे की मौत
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पाली। कस्बे में बुधवार को झोलाछाप के इलाज से शिक्षक के सात वर्षीय इकलौते बेटे की मौत हो गई। बीते चार दिन से बुखार से पीड़ित बच्चे की सुबह हालत बिगड़ने पर परिजन उसे मोहल्ला इमाम चौक स्थित क्लीनिक लेकर पहुंचे। इलाज के दौरान बच्चे की हालत बिगड़ने लगी तो झोलाछाप ने कहीं और दिखाने की बात कही। परिजन उसे लेकर जा रहे थे कि बच्चे की मौत हो गई। घटना के बाद संचालक क्लीनिक बंद कर भाग गया।
पालीनगर के मोहल्ला रामनगर निवासी चंद्रहास कुशवाहा दिव्यांग हैं और निजी स्कूल में शिक्षक हैं। उनका बेटा चंद्रकांत (7) बीते चार-पांच दिनों से बुखार से पीड़ित था। परिजन इमाम चौक स्थित क्लीनिक पर उसका इलाज करा रहे थे। बुधवार सुबह करीब छह बजे अचानक तबीयत बिगड़ने पर उसे क्लीनिक पर ले जाया गया। वहां उपचार के दौरान इंजेक्शन और ग्लूकोज की ड्रिप लगाई गई। करीब 11 बजे हालत गंभीर होने पर झोलाछाप ने उसे बाहर ले जाने को कहा। कुछ देर बाद चंद्रकांत की मौत हो गई। बच्चे की मौत के बाद संचालक क्लीनिक बंद कर भाग गया।
पिता चंद्रहास ने बताया कि चंद्रकांत दो बहनों के बीच इकलौता था। बेटे की मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। परिजन शव लेकर घर चले गए और पुलिस या स्वास्थ्य विभाग में शिकायत करने से इन्कार कर दिया। पाली पीएचसी प्रभारी डॉक्टर आनंद शुक्ला ने बताया क्लीनिक का रजिस्ट्रेशन नहीं है। संचालक के पास यूनानी आयुर्वेदाचार्य की डिग्री है जबकि वह एलोपैथिक इलाज कर रहा था। मामले की जांच कर शिकायत के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
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छह माह पहले भी हुई थी मरीज की मौत
करीब छह माह पहले भी थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी मरीज की भी इसी क्लीनिक पर इलाज के दौरान मौत होने की बात कही जा रही है। हालांकि इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई।
बढ़ गई थी बच्चे की टीएलसी
पाली पीएचसी प्रभारी डॉक्टर आनंद शुक्ला ने बच्चे की जांच रिपोर्ट देखकर बताया कि चंद्रकांत की 34 हजार टीएलसी थी जबकि सामान्य तौर पर 4000 से 11,000 तक होनी चाहिए। झोलाछाप के पास संसाधन नहीं थे, उसे मरीज को रोकना नहीं चाहिए था। बताया कि ऐसे मरीजों का तत्काल प्रशिक्षित डॉक्टर के पास पहुंचकर इलाज कराना चाहिए।
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पालीनगर के मोहल्ला रामनगर निवासी चंद्रहास कुशवाहा दिव्यांग हैं और निजी स्कूल में शिक्षक हैं। उनका बेटा चंद्रकांत (7) बीते चार-पांच दिनों से बुखार से पीड़ित था। परिजन इमाम चौक स्थित क्लीनिक पर उसका इलाज करा रहे थे। बुधवार सुबह करीब छह बजे अचानक तबीयत बिगड़ने पर उसे क्लीनिक पर ले जाया गया। वहां उपचार के दौरान इंजेक्शन और ग्लूकोज की ड्रिप लगाई गई। करीब 11 बजे हालत गंभीर होने पर झोलाछाप ने उसे बाहर ले जाने को कहा। कुछ देर बाद चंद्रकांत की मौत हो गई। बच्चे की मौत के बाद संचालक क्लीनिक बंद कर भाग गया।
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पिता चंद्रहास ने बताया कि चंद्रकांत दो बहनों के बीच इकलौता था। बेटे की मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। परिजन शव लेकर घर चले गए और पुलिस या स्वास्थ्य विभाग में शिकायत करने से इन्कार कर दिया। पाली पीएचसी प्रभारी डॉक्टर आनंद शुक्ला ने बताया क्लीनिक का रजिस्ट्रेशन नहीं है। संचालक के पास यूनानी आयुर्वेदाचार्य की डिग्री है जबकि वह एलोपैथिक इलाज कर रहा था। मामले की जांच कर शिकायत के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
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छह माह पहले भी हुई थी मरीज की मौत
करीब छह माह पहले भी थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी मरीज की भी इसी क्लीनिक पर इलाज के दौरान मौत होने की बात कही जा रही है। हालांकि इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई।
बढ़ गई थी बच्चे की टीएलसी
पाली पीएचसी प्रभारी डॉक्टर आनंद शुक्ला ने बच्चे की जांच रिपोर्ट देखकर बताया कि चंद्रकांत की 34 हजार टीएलसी थी जबकि सामान्य तौर पर 4000 से 11,000 तक होनी चाहिए। झोलाछाप के पास संसाधन नहीं थे, उसे मरीज को रोकना नहीं चाहिए था। बताया कि ऐसे मरीजों का तत्काल प्रशिक्षित डॉक्टर के पास पहुंचकर इलाज कराना चाहिए।