{"_id":"64f8b8cf5c0f4d23c402e524","slug":"supply-of-fodder-and-water-at-khitauli-animal-shelter-hardoi-news-c-213-1-hra1001-3225-2023-09-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"Hardoi News: खितौली पशु आश्रयस्थल में चारा-दाना व पानी का टोटा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Hardoi News: खितौली पशु आश्रयस्थल में चारा-दाना व पानी का टोटा
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
सवायजपुर। क्षेत्र के खितौली का पशु आश्रयस्थल अव्यवस्थाओं का शिकार हो गया है। मवेशियों को भरपेट चारा-दाना भी नहीं मिल पा रहा है और वह दम तोड़ रहे हैं। मवेशियों के शवों को पास में ही डाल दिए जाने से दुर्गंध से ग्रामीण परेशान हैं। शवों चील व कौए नोंचते रहते हैं।
विकास खंड भरखनी के खितौली गांव स्थित पशु आश्रयस्थल की अव्यवस्थाओं को जानते हुए भी अधिकारी खामोश हैं। पशु आश्रयस्थल खितौली में 50 से अधिक मवेशी अभिलेखों में संरक्षित हैं, जबकि बुधवार को 28 मवेशी ही थे। इसमें एक मवेशी तीन दिन से बीमारी के चलते तड़प रही है।
देखरेख के लिए ग्राम पंचायत से दो केयरटेकर लगाए गए हैं। अभिलेखों में मवेशियों को भरपेट चारा, हरा चारा, चोकर आदि दिया जा रहा है। हालत यह है कि पशु बिना चारे के दम तोड़ रहे हैं। चारा के नाम पर उनकी चरही में सूखा भूसा डाल दिया जा रहा है। इससे वह भूखे रह जा रहे हैं। पानी के टैंक में एक से दो इंच काई जम गई है। मवेशी यह पानी पीने को मजबूर हैं।
विज्ञापन
पशु चिकित्साधिकारी डॉ. आरपी शर्मा ने बताया वह नियमित निरीक्षण के साथ ही बीमार मवेशियों का उपचार भी कर रहे हैं। उन्होंने कहा इस समय 30 मवेशी मौजूद हैं। 20 मवेशी बाहर चले जाने की बात कही। एसडीएम डॉ. अरुणिमा श्रीवास्तव ने बताया कि पशु आश्रयस्थल का निरीक्षण कराएंगी और जांच में कमी पर संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
सवायजपुर। क्षेत्र के खितौली का पशु आश्रयस्थल अव्यवस्थाओं का शिकार हो गया है। मवेशियों को भरपेट चारा-दाना भी नहीं मिल पा रहा है और वह दम तोड़ रहे हैं। मवेशियों के शवों को पास में ही डाल दिए जाने से दुर्गंध से ग्रामीण परेशान हैं। शवों चील व कौए नोंचते रहते हैं।
विकास खंड भरखनी के खितौली गांव स्थित पशु आश्रयस्थल की अव्यवस्थाओं को जानते हुए भी अधिकारी खामोश हैं। पशु आश्रयस्थल खितौली में 50 से अधिक मवेशी अभिलेखों में संरक्षित हैं, जबकि बुधवार को 28 मवेशी ही थे। इसमें एक मवेशी तीन दिन से बीमारी के चलते तड़प रही है।
विज्ञापन
देखरेख के लिए ग्राम पंचायत से दो केयरटेकर लगाए गए हैं। अभिलेखों में मवेशियों को भरपेट चारा, हरा चारा, चोकर आदि दिया जा रहा है। हालत यह है कि पशु बिना चारे के दम तोड़ रहे हैं। चारा के नाम पर उनकी चरही में सूखा भूसा डाल दिया जा रहा है। इससे वह भूखे रह जा रहे हैं। पानी के टैंक में एक से दो इंच काई जम गई है। मवेशी यह पानी पीने को मजबूर हैं।
विज्ञापन
पशु चिकित्साधिकारी डॉ. आरपी शर्मा ने बताया वह नियमित निरीक्षण के साथ ही बीमार मवेशियों का उपचार भी कर रहे हैं। उन्होंने कहा इस समय 30 मवेशी मौजूद हैं। 20 मवेशी बाहर चले जाने की बात कही। एसडीएम डॉ. अरुणिमा श्रीवास्तव ने बताया कि पशु आश्रयस्थल का निरीक्षण कराएंगी और जांच में कमी पर संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।