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सूरज की तपिश से कंठ बेहाल
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
Updated Fri, 24 Apr 2015 12:32 AM IST
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गर्मी शुरू होने के बावजूद खराब पड़े हैंडपंप और बंद
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वाटर कूलरों की मरम्मत न कराने से लोगों को पेयजल संकट का सामना करना पड़
रहा है। शहर के सार्वजनिक स्थलों पर भी हैंडपंप काफी अर्से से खराब हैं, पर
उनकी मरम्मत करने की जहमत अधिकारिक स्तर से नहीं उठाई गई है।
रोडवेज स्टैंड और रेलवे स्टेशन पर भी लोगों को पेयजल के लिए भटकना पड़ रहा है। हैरत की बात है कि रोडवेज बस स्टैंड का वाटर कूलर और हैंडपंप खराब पड़ा है, तो रेलवे स्टेशन पर लगा वाटर कूलर भी बंद है, जिससे यात्रियों को ठंडा पानी नहीं मिल रहा है।
हालांकि, रोडवेज बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन पर पेयजल के लिए टंकी से जुड़े हुए नल तो चल रहे हैं, पर गर्मियों में अब उनका पानी गरम होने लगा है, जिससे इन नलों का पानी यात्रियों की प्यास बुझा नहीं पा रहा है। ऐसे में यात्री कंठ को ठंडे पानी से तर करने को बोतल बंद पानी को खरीदने के लिए मजबूर होते हैं।
जिसकी आड़ में प्यूरीफाइड बोतल बंद पानी की आड़ में साधारण पानी बेंचने का गोरखधंधा भी जमकर फल फूल रहा है। रोडवेज बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को ठंडा पानी नहीं मिल रहा है। इसके बावजूद अफसरों द्वारा कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है। उधर, रोडवेज बस स्टैंड पर यात्रियों को ठंडा पानी नहीं मिल रहा है।
ठंडे पानी से गला तर करने को बस स्टैैंड पर काफी समय पहले एक वाटर कूलर भी लगाया गया, पर कुछ ही दिन सेवा देने के बाद वाटर कूलर मशीन खराब हो गई। इसके बाद से उसे दोबारा बनवाने को अफसरों द्वारा कोई प्रयास नहीं किया गया।
अब स्थिति यह हो गई है कि लाखों रुपये व्यय कर खरीदी गई वाटर कूलर मशीन जंग खा रही है और यात्रियों को ठंडा पानी नहीं मिल रहा है। यहां लगा हैंडपंप भी अर्से से खराब है। ऐसे में यात्रियों को ठंडे पानी को भटकना पड़ रहा है। रोडवेज आने वाले तमाम यात्रियों को या तो पानी के लिए टंकी से लगे नलों का सहारा लेना पड़ता है या फिर जेब ढीली कर बोतल बंद पानी खरीदना पड़ता है।
उधर, रेलवे स्टेशन पर भी मौजूदा समय की मूलभूत जरूरत को पूरा नहीं कर पा रहा है। सूरज की दिनों दिन बढ़ती तपिश से लोगों को अपना गला तर करने को सिर्फ ठंडे पानी की आस ही होती है, पर रेलवे स्टेशन पर अभी तक ठंडे पानी के लिए वाटर कूलरों को शुरू नहीं किया गया।
हालांकि, रेलवे स्टेशन पर पेयजल को काफी संख्या में नल तो लगे हैं, पर सभी पानी की टंकी से जुड़े हैं। ऐसे में सूखते हलकों की प्यास उन नलों के पानी से नहीं बुझ रही, जिससे लोगों को काफी परेशान होना पड़ रहा है।
रोडवेज स्टैंड और रेलवे स्टेशन पर भी लोगों को पेयजल के लिए भटकना पड़ रहा है। हैरत की बात है कि रोडवेज बस स्टैंड का वाटर कूलर और हैंडपंप खराब पड़ा है, तो रेलवे स्टेशन पर लगा वाटर कूलर भी बंद है, जिससे यात्रियों को ठंडा पानी नहीं मिल रहा है।
हालांकि, रोडवेज बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन पर पेयजल के लिए टंकी से जुड़े हुए नल तो चल रहे हैं, पर गर्मियों में अब उनका पानी गरम होने लगा है, जिससे इन नलों का पानी यात्रियों की प्यास बुझा नहीं पा रहा है। ऐसे में यात्री कंठ को ठंडे पानी से तर करने को बोतल बंद पानी को खरीदने के लिए मजबूर होते हैं।
जिसकी आड़ में प्यूरीफाइड बोतल बंद पानी की आड़ में साधारण पानी बेंचने का गोरखधंधा भी जमकर फल फूल रहा है। रोडवेज बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को ठंडा पानी नहीं मिल रहा है। इसके बावजूद अफसरों द्वारा कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है। उधर, रोडवेज बस स्टैंड पर यात्रियों को ठंडा पानी नहीं मिल रहा है।
ठंडे पानी से गला तर करने को बस स्टैैंड पर काफी समय पहले एक वाटर कूलर भी लगाया गया, पर कुछ ही दिन सेवा देने के बाद वाटर कूलर मशीन खराब हो गई। इसके बाद से उसे दोबारा बनवाने को अफसरों द्वारा कोई प्रयास नहीं किया गया।
अब स्थिति यह हो गई है कि लाखों रुपये व्यय कर खरीदी गई वाटर कूलर मशीन जंग खा रही है और यात्रियों को ठंडा पानी नहीं मिल रहा है। यहां लगा हैंडपंप भी अर्से से खराब है। ऐसे में यात्रियों को ठंडे पानी को भटकना पड़ रहा है। रोडवेज आने वाले तमाम यात्रियों को या तो पानी के लिए टंकी से लगे नलों का सहारा लेना पड़ता है या फिर जेब ढीली कर बोतल बंद पानी खरीदना पड़ता है।
उधर, रेलवे स्टेशन पर भी मौजूदा समय की मूलभूत जरूरत को पूरा नहीं कर पा रहा है। सूरज की दिनों दिन बढ़ती तपिश से लोगों को अपना गला तर करने को सिर्फ ठंडे पानी की आस ही होती है, पर रेलवे स्टेशन पर अभी तक ठंडे पानी के लिए वाटर कूलरों को शुरू नहीं किया गया।
हालांकि, रेलवे स्टेशन पर पेयजल को काफी संख्या में नल तो लगे हैं, पर सभी पानी की टंकी से जुड़े हैं। ऐसे में सूखते हलकों की प्यास उन नलों के पानी से नहीं बुझ रही, जिससे लोगों को काफी परेशान होना पड़ रहा है।