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फिर भी लाठी खा रहे यात्री
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
Updated Sun, 24 May 2015 12:26 AM IST
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रेलवे स्टेशन पर टिकट वितरण को खोली गई तीन खिड़कियों
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में से एक खिड़की से ही टिकट वितरण होने से यात्रियों को खासी दिक्कतों का
सामना करना पड़ रहा है। आलम यह है कि ट्रेन के आने से पहले ही इस खिड़की
पर टिकट लेने वालों की लंबी कतारें लग जाती हैं, जिससे ट्रेन छूटने तक कई
यात्री टिकट लेने से वंचित रह जाते हैं।
नतीजतन उन्हें दूसरी ट्रेन से ही गंतव्य स्थान पर जाना पड़ता है। यह स्थिति आए दिन रेलवे स्टेशन पर देखने को मिल रही हैं। शुक्रवार की रात टिकट खिड़की पर यात्रियोें की भीड़ अधिक होने के कारण जीआरपी को बुलाया गया। जीआरपी ने डंडे फटकार कर जैसे तैसे भीड़ को काबू में किया, पर अधिकांश यात्रियों की ट्रेन फिर भी छूट गई।
शनिवार को अमूमन ऐसा ही नजारा देखने को मिला। टिकट लेने के लिए लाइन में खड़े रामनिवास को परिवार के साथ रामपुर जाना था, पर टिकट न मिलने के कारण ट्रेन छोड़नी पड़ी। रेलवे अफसरों की माने तो कई दिनों से एक टिकट काउंटर की थिंक लाइन खराब है, जिससे दूसरी खिड़की से टिकट का वितरण नहीं हो पा रहा।
फिलहाल रेलवे प्रशासन की इस लापरवाही का खामियाजा यात्रियों को भुुगतना पड़ रहा है। उध्ार, जम्मू-कश्मीर से कलकत्ता, गुवाहाटी, दिल्ली समेत अन्य स्टेशनों के लिए प्रतिदिन जिले से 10 से 15 हजार यात्री अलग-अलग ट्रेनों से सफर करते हैं, जिनसे रेलवे विभाग को 30 से 35 हजार रुपये आमदनी होती।
इससे अनुमान है कि रेलवे को प्रतिवर्ष 10 से 12 करोड़ रुपये की आमदनी हरदोई रेलवे स्टेशन से होती है। इसके बावजूद यात्रियों की मूलभूत सुविधाओं को नजरंदाज किया जा रहा है। रेलवे स्टेशन के पास एक प्राइवेट सेंटर ने टिकट वितरण का लाइसेंस विभाग से लिया है, पर इस सेंटर पर अकसर सर्वर डाउन रहने से यात्रियों को परेशान होना पड़ता है।
इस सेंटर पर मौजूद दिल्ली जाने वाले यात्री रमेश, सर्वेश, रीना आदि ने बताया कि सर्वर डाउन होने से यहां टिकट नहीं मिला। जब टिकट खिड़की पर पहुंचे तो वहां टिकट नहीं मिला, जिससे ट्रेन छूट गई और अब उन्हें दूसरी ट्रेन से दिल्ली जाना होगा।
नतीजतन उन्हें दूसरी ट्रेन से ही गंतव्य स्थान पर जाना पड़ता है। यह स्थिति आए दिन रेलवे स्टेशन पर देखने को मिल रही हैं। शुक्रवार की रात टिकट खिड़की पर यात्रियोें की भीड़ अधिक होने के कारण जीआरपी को बुलाया गया। जीआरपी ने डंडे फटकार कर जैसे तैसे भीड़ को काबू में किया, पर अधिकांश यात्रियों की ट्रेन फिर भी छूट गई।
शनिवार को अमूमन ऐसा ही नजारा देखने को मिला। टिकट लेने के लिए लाइन में खड़े रामनिवास को परिवार के साथ रामपुर जाना था, पर टिकट न मिलने के कारण ट्रेन छोड़नी पड़ी। रेलवे अफसरों की माने तो कई दिनों से एक टिकट काउंटर की थिंक लाइन खराब है, जिससे दूसरी खिड़की से टिकट का वितरण नहीं हो पा रहा।
फिलहाल रेलवे प्रशासन की इस लापरवाही का खामियाजा यात्रियों को भुुगतना पड़ रहा है। उध्ार, जम्मू-कश्मीर से कलकत्ता, गुवाहाटी, दिल्ली समेत अन्य स्टेशनों के लिए प्रतिदिन जिले से 10 से 15 हजार यात्री अलग-अलग ट्रेनों से सफर करते हैं, जिनसे रेलवे विभाग को 30 से 35 हजार रुपये आमदनी होती।
इससे अनुमान है कि रेलवे को प्रतिवर्ष 10 से 12 करोड़ रुपये की आमदनी हरदोई रेलवे स्टेशन से होती है। इसके बावजूद यात्रियों की मूलभूत सुविधाओं को नजरंदाज किया जा रहा है। रेलवे स्टेशन के पास एक प्राइवेट सेंटर ने टिकट वितरण का लाइसेंस विभाग से लिया है, पर इस सेंटर पर अकसर सर्वर डाउन रहने से यात्रियों को परेशान होना पड़ता है।
इस सेंटर पर मौजूद दिल्ली जाने वाले यात्री रमेश, सर्वेश, रीना आदि ने बताया कि सर्वर डाउन होने से यहां टिकट नहीं मिला। जब टिकट खिड़की पर पहुंचे तो वहां टिकट नहीं मिला, जिससे ट्रेन छूट गई और अब उन्हें दूसरी ट्रेन से दिल्ली जाना होगा।