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Hardoi News: सौ साल पहले खुद मंचन कर शुरू की रामलीला, अब भव्यता है पहचान
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संडीला। मर्यादा पुरुषोत्तम के जीवन चरित को जीवंत रखने के लिए कस्बा के लोगों ने स्वयं ही श्रीरामलीला का मंचन शुरू किया। शीतला माता के मंदिर में श्रीरामलीला की पड़ी नींव ने सौ साल पूरे कर लिए हैं। अब भव्यता ही रामलीला की पहचान बन गई है।
शीतला माता मंदिर स्थित श्रीरामलीला मैदान पर सौ साल से श्रीरामलीला का मंचन होता आ रहा है। यहां पर 12 दिन तक श्रीरामलीला होती है। दशहरा के दिन प्रभु श्रीराम व रावण के बीच युद्ध की लीला होती है और रावण व कुंभकरण के पुतलों का दहन होता है। श्रीरामलीला का मंचन देखने के लिए कस्बा समेत आसपास के ग्रामीण अंचलों से बड़ी संख्या में लोग आते हैं। दशहरा वाले दिन भीड़ का अनुमान लगाना मुश्किल हो जाता है।
श्रीरामलीला कमेटी के प्रबंधक प्रेम बाबा ने बताया कि सबसे पहले पंडितों की ओर से श्रीरामलीला शुरू की गई थी। लोग रामायण का पाठ करते थे, साथ ही चौपाइयों को याद करते फिर श्रीरामलीला का मंचन करते थे। सन 1960 में कानपुर के मोहल्ला दर्शनपुरवा से आए कलाकारों की ओर से श्रीरामलीला का मंचन किया जाने लगा। इसके बाद 22 साल से लगातार मथुरा-वृंदावन के कलाकारों की ओर से श्रीरामलीला की गई।
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परशुराम-लक्ष्मण संवाद की लीला के लिए कानपुर से ही कलाकार बुलाए जाते हैं।श्रीरामलीला कमेटी में संरक्षक गंगा शरण गुप्ता, प्रबंधक प्रेम बाबा, अध्यक्ष अभय गुप्ता, महामंत्री आनंद प्रकाश गुप्ता, नरोत्तम गुप्ता, चंद्र मोहन आहूजा, सरजू प्रसाद चौरसिया, मनोज कुमार गुप्ता, राजेंद्र गुप्ता, आलोक मेहरोत्रा, गुरजीत सिंह, आशीष प्रकाश व राहुल मेहरोत्रा सदस्य पद की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
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शीतला माता मंदिर स्थित श्रीरामलीला मैदान पर सौ साल से श्रीरामलीला का मंचन होता आ रहा है। यहां पर 12 दिन तक श्रीरामलीला होती है। दशहरा के दिन प्रभु श्रीराम व रावण के बीच युद्ध की लीला होती है और रावण व कुंभकरण के पुतलों का दहन होता है। श्रीरामलीला का मंचन देखने के लिए कस्बा समेत आसपास के ग्रामीण अंचलों से बड़ी संख्या में लोग आते हैं। दशहरा वाले दिन भीड़ का अनुमान लगाना मुश्किल हो जाता है।
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श्रीरामलीला कमेटी के प्रबंधक प्रेम बाबा ने बताया कि सबसे पहले पंडितों की ओर से श्रीरामलीला शुरू की गई थी। लोग रामायण का पाठ करते थे, साथ ही चौपाइयों को याद करते फिर श्रीरामलीला का मंचन करते थे। सन 1960 में कानपुर के मोहल्ला दर्शनपुरवा से आए कलाकारों की ओर से श्रीरामलीला का मंचन किया जाने लगा। इसके बाद 22 साल से लगातार मथुरा-वृंदावन के कलाकारों की ओर से श्रीरामलीला की गई।
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परशुराम-लक्ष्मण संवाद की लीला के लिए कानपुर से ही कलाकार बुलाए जाते हैं।श्रीरामलीला कमेटी में संरक्षक गंगा शरण गुप्ता, प्रबंधक प्रेम बाबा, अध्यक्ष अभय गुप्ता, महामंत्री आनंद प्रकाश गुप्ता, नरोत्तम गुप्ता, चंद्र मोहन आहूजा, सरजू प्रसाद चौरसिया, मनोज कुमार गुप्ता, राजेंद्र गुप्ता, आलोक मेहरोत्रा, गुरजीत सिंह, आशीष प्रकाश व राहुल मेहरोत्रा सदस्य पद की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।