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Hardoi News: मां की गैर इरादतन हत्या में पुत्र को दस साल की सजा
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- अपर जिला जज कुसुमलता ने सुनाई सजा
संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। मां की गैर इरादतन हत्या के आरोपी पुत्र को अपर जिला जज (कोर्ट संख्या तीन) कुसुमलता ने दोषी करार दिया है। चार साल पहले हुई घटना के अभियुक्त को दस साल की सजा सुनाई है। 10 हजार रुपये का जुर्माना भी किया है। जुर्माना अदा न करने पर दो साल की अतिरिक्त सजा काटनी होगी। जुर्माने की आधी रकम बतौर क्षतिपूर्ति मृतका के वारिसों को देने के भी आदेश अपर जिला जज ने दिए है।
संडीला कोतवाली क्षेत्र के सनई गांव निवासी रामखिलावन ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि उसका पुत्र राजकुमार 30 जून 2022 को अपनी मां के साथ खेत पर गया था। शराब पीने के लिए राजकुमार ने मां रामपती से रुपये मांगे थे। इनकार करने पर राजकुमार ने मां के सिर पर ईंट मार दी थी। गंभीर रूप से घायल रामपती को परिजन लखनऊ ले गए थे। यहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई थी। पुलिस ने राजकुमार के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया था। अभियोजन पक्ष की ओर से सात गवाह पेश किए गए। इसके साथ ही 15 अभिलेखीय साक्ष्य भी पेश किए गए। दोनों पक्षों के तर्को को सुनने के बाद अपर जिला जज कुसुमलता ने सजा सुनाई है।
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इनसेट
प्रत्यक्षदर्शी गवाह मुकरे, पिता की प्राथमिकी व खून से सनी ईट ने दिलाई सजा
महिला की गैर इरादतन हत्या के मामले में घटना के प्रत्यक्षदर्शी अपने बयानों से मुकर गए। पिता रामखेलावन ने अपने ही बेटे राजकुमार के खिलाफ हत्या की प्राथमिकी दर्ज कराई थी लेकिन फैसला आने से पहले उनका भी निधन हो गया। ऐसे में अभियोजन का पूरा मामला वैज्ञानिक साक्ष्यों, चिकित्सकीय रिपोर्ट पर टिका था।
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30 जून 2022 को घटना के तुरंत बाद रामखेलावन ने पुलिस को बताया था कि शराब पीने के लिए पैसे मांगने पर बेटे राजकुमार ने ईट मारकर रामपती की हत्या कर दी है। अदालत ने अपने फैसले में माना कि कोई भी पिता बिना किसी ठोस कारण अपने ही बेटे को हत्या जैसे गंभीर अपराध में झूठा नहीं फंसा सकता। आरोपी भी यह नहीं बता सका कि उसके पिता की उससे ऐसी कौन-सी रंजिश थी, जिसके कारण वह उसे फर्जी मुकदमे में फंसा दिया।
सुनवाई के दौरान मृतका के देवर लालता प्रसाद और गंगा प्रसाद पुलिस को दिए बयानों से पलट गए। अदालत में आरोपी के खिलाफ कुछ भी नहीं बोला। कोर्ट ने माना कि पारिवारिक संबंधों के कारण उन्होंने आरोपी को बचाने की कोशिश की है। इसलिए बदले बयानों पर भरोसा नहीं किया जा सकता। मौके से बरामद हुआ खून से सना ईँट का आधा टुकड़ा अभियोजन के लिए अहम साक्ष्य बना। विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) की रिपोर्ट में ईट और मृतका के कपड़ों पर मानव रक्त मिलने की पुष्टि हुई थी। पोस्टमार्टम करने वाले डॉ. पीयूष वर्मा ने भी स्पष्ट किया कि सिर पर भारी वस्तु से प्रहार के कारण टेम्पोरल बोन टूटने और कोमा में जाने से रामपती की मौत हुई थी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। मां की गैर इरादतन हत्या के आरोपी पुत्र को अपर जिला जज (कोर्ट संख्या तीन) कुसुमलता ने दोषी करार दिया है। चार साल पहले हुई घटना के अभियुक्त को दस साल की सजा सुनाई है। 10 हजार रुपये का जुर्माना भी किया है। जुर्माना अदा न करने पर दो साल की अतिरिक्त सजा काटनी होगी। जुर्माने की आधी रकम बतौर क्षतिपूर्ति मृतका के वारिसों को देने के भी आदेश अपर जिला जज ने दिए है।
संडीला कोतवाली क्षेत्र के सनई गांव निवासी रामखिलावन ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि उसका पुत्र राजकुमार 30 जून 2022 को अपनी मां के साथ खेत पर गया था। शराब पीने के लिए राजकुमार ने मां रामपती से रुपये मांगे थे। इनकार करने पर राजकुमार ने मां के सिर पर ईंट मार दी थी। गंभीर रूप से घायल रामपती को परिजन लखनऊ ले गए थे। यहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई थी। पुलिस ने राजकुमार के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया था। अभियोजन पक्ष की ओर से सात गवाह पेश किए गए। इसके साथ ही 15 अभिलेखीय साक्ष्य भी पेश किए गए। दोनों पक्षों के तर्को को सुनने के बाद अपर जिला जज कुसुमलता ने सजा सुनाई है।
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प्रत्यक्षदर्शी गवाह मुकरे, पिता की प्राथमिकी व खून से सनी ईट ने दिलाई सजा
महिला की गैर इरादतन हत्या के मामले में घटना के प्रत्यक्षदर्शी अपने बयानों से मुकर गए। पिता रामखेलावन ने अपने ही बेटे राजकुमार के खिलाफ हत्या की प्राथमिकी दर्ज कराई थी लेकिन फैसला आने से पहले उनका भी निधन हो गया। ऐसे में अभियोजन का पूरा मामला वैज्ञानिक साक्ष्यों, चिकित्सकीय रिपोर्ट पर टिका था।
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30 जून 2022 को घटना के तुरंत बाद रामखेलावन ने पुलिस को बताया था कि शराब पीने के लिए पैसे मांगने पर बेटे राजकुमार ने ईट मारकर रामपती की हत्या कर दी है। अदालत ने अपने फैसले में माना कि कोई भी पिता बिना किसी ठोस कारण अपने ही बेटे को हत्या जैसे गंभीर अपराध में झूठा नहीं फंसा सकता। आरोपी भी यह नहीं बता सका कि उसके पिता की उससे ऐसी कौन-सी रंजिश थी, जिसके कारण वह उसे फर्जी मुकदमे में फंसा दिया।
सुनवाई के दौरान मृतका के देवर लालता प्रसाद और गंगा प्रसाद पुलिस को दिए बयानों से पलट गए। अदालत में आरोपी के खिलाफ कुछ भी नहीं बोला। कोर्ट ने माना कि पारिवारिक संबंधों के कारण उन्होंने आरोपी को बचाने की कोशिश की है। इसलिए बदले बयानों पर भरोसा नहीं किया जा सकता। मौके से बरामद हुआ खून से सना ईँट का आधा टुकड़ा अभियोजन के लिए अहम साक्ष्य बना। विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) की रिपोर्ट में ईट और मृतका के कपड़ों पर मानव रक्त मिलने की पुष्टि हुई थी। पोस्टमार्टम करने वाले डॉ. पीयूष वर्मा ने भी स्पष्ट किया कि सिर पर भारी वस्तु से प्रहार के कारण टेम्पोरल बोन टूटने और कोमा में जाने से रामपती की मौत हुई थी।