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किसी ने सराहा, तो कोई हुआ निराश

Tue, 01 Feb 2022 11:15 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 01 Feb 2022 11:15 PM IST
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Some appreciated, some disappointed
हरदोई। केंद्रीय बजट को किसी ने किसानों को विकास की ओर ले जाने वाला बताया तो किसी ने निराश करने वाला। चार्टर्ड अकाउंटेंट कार्तिकेय गुप्ता ने कहा कि करदाताओं के लिए बजट पूरी तरह से निराश करने वाला रहा।
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सरकार द्वारा करदाताओं के लिए विशेष रियायत की घोषणा नहीं की गई, नहीं टैक्स स्लैब में बदलाव किया गया है।
इनकम टैक्स के एडवोकेट उमेश गुप्ता ने कहा कि सरकार ने बजट में करदाताओं के लिए हाउस टैक्स में कोई रियायत की घोषणा नहीं की न ही टैक्स स्लैब में कोई बदलाव किया जो निराश करने वाला है।
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व्यापारी नेता विमलेश दीक्षित ने कहा कि बजट में व्यापारियों के लिए राहत वाली कोई बात सामने नहीं आई। कोरोना काल में व्यापारियों को आयकर में विशेष छूट दी जानी चाहिए थी।
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पूर्व जिला शासकीय अधिवक्ता अविनाश गुप्ता ने कहा कि बजट से मध्य वर्ग को फिर से निराशा हुई है। गोसंवर्धन को लेकर भी कोई खास योजना नहीं लाई गई, जिससे काफी निराशा हुई है।
रिटायर्ड प्रोफेसर अखिलेश वाजपेयी का कहना है कि उदारवादी रवैये से अर्थ व्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ता है। बजट में गांव गरीब किसान के लिए उदारवादी रुख है, मगर मध्य वर्ग और आयकर दाताओं के लिए उदारता न दिखाने से बजट को लेकर मिलीं जुली प्रतिक्रियाएं होना स्वाभाविक है।
प्रदेश राइस मिलर्स के अध्यक्ष राकेश अग्रवाल ने कहा कि व्यापारियों के लिए भले ही बजट में कुछ खास नहीं, लेकिन गांव, गरीब और किसानों के लिए बजट अच्छा है।
इनर व्हील संस्था की पूर्व चेयरमैन अनुराधा मिश्रा ने कहा कि बजट में ई विद्या के साथ किसानों और गरीबों के लिए की गई घोषणाएं सराहनीय हैं। इंटरनेशनल वेटलिफ्टिंग खिलाड़ी रहीं पूनम तिवारी ने कहा कि गांव, गरीब के लिहाज से बजट ठीक है।
यूपी बैंक इंप्लाइज यूनियन के सचिव आरके पांडेय ने कहा कि वेतनभोगी वर्ग आयकर की दरों में परिवर्तन की उम्मीद कर रहा था, मगर उसे भारी निराशा हाथ लगी है।
स्नातक के छात्र देवाशीष सिंह ने कहा कि ई विद्या अच्छी योजना है, मगर बेहतर होता कि गांवों और छोटे शहरों में तकनीकी शिक्षा के कालेज खोलने एवं गांव-गांव केंद्रीय विद्यालय खोले जाएं।

किसान नेता भाकियू अध्यक्ष राजबहादुर ने कहा कि बजट को किसानों गरीबों के हितों वाला बताया जा रहा, मगर इससे पहले भी ऐसा कहा जाता रहा और सभी किसानों को लाभ नहीं मिल पाता है।
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