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आबोहवा में घुल रहा धुएं का जहर
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हरदोई। जिले की आबोहवा में धुएं का धीमा जहर घुल रहा है। हजारों वाहन बिना किसी प्रदूषण मुक्त प्रमाणपत्र के सड़कों पर फर्राटा भर रहे हैं। तमाम खटारा वाहन तो दमघोंटू देने वाला धुआं उगल रहे हैं। इसके बाद भी जिम्मेदार बेखबर हैं।
नियमानुसार ई-वाहनों को छोड़कर सभी वाहनों के लिए निर्धारित अवधि में वाहनों की प्रदूषण जांच अनिवार्य है। यदि वाहन निर्धारित मानकों से ज्यादा धुआं उगल रहा है तो उसे दुरुस्त कराए बिना सड़कों पर चलाना नियमों के खिलाफ है।
अब बाइकों का भी नियमित रूप से प्रदूषण प्रमाणपत्र बनना है। नए नियम के मुताबिक यह प्रमाणपत्र नहीं होने पर 10 हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है। जिले में करीब पांच लाख के आसपास वाहन होने का अनुमान है।
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इनमें परिवहन विभाग के आंकड़ों में करीब पौने चार लाख वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं। परिवहन विभाग के आंकड़ों में वह वाहन शामिल नहीं, जो गैर जनपदों के जिले में चल रहे हैं।
जिले में 50 हजार से अधिक वाहनों का अनुमान है, जो पिछले कई वर्षों से नवीनीकृत नहीं हुए हैं। इनमें ज्यादातर स्कूटर एवं बाइक हैं। करीब तीन लाख 40 हजार बाइकें हैं।
इनमें 80 फीसदी बाइक बीएस-6 तकनीक से पुरानी वाली हैं। विभाग के मुताबिक, नए वाहनों की खरीद के एक साल बाद हर छह महीने में प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र अनिवार्य है।
विभाग के अनुसार प्रदूषण कम करने के लिए ही पूरे देश में बीएस-6 तकनीक के वाहनों के साथ ई-वाहनों को बढ़ावा दिया जा रहा है। नियम कड़े हैं, मगर लोग जागरूक नहीं हो रहे हैं। ऐसे में अधिकतर वाहन बिना पीयूसी प्रमाणपत्र के दौड़ रहे हैं।
वाहन स्वामियों को ट्रैफिक नियमों का पालन करना चाहिए। हर छह माह में वाहनों की जांच कराकर प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र वाहनों के साथ रखना चाहिए। ऐसा न होने पर 10 हजार रुपये जुर्माने का प्राविधान है।
जानकारी मिली है कि तमाम वाहन बिना फिटनेस एवं पीयूसी के चल रहे हैं। ऐसे वाहनों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी। फिटनेस न कराने वाले वाहनों को नोटिस भेजी जाएगी।
- सुशील कुमार, उपसंभागीय निरीक्षक, परिवहन विभाग
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नियमानुसार ई-वाहनों को छोड़कर सभी वाहनों के लिए निर्धारित अवधि में वाहनों की प्रदूषण जांच अनिवार्य है। यदि वाहन निर्धारित मानकों से ज्यादा धुआं उगल रहा है तो उसे दुरुस्त कराए बिना सड़कों पर चलाना नियमों के खिलाफ है।
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अब बाइकों का भी नियमित रूप से प्रदूषण प्रमाणपत्र बनना है। नए नियम के मुताबिक यह प्रमाणपत्र नहीं होने पर 10 हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है। जिले में करीब पांच लाख के आसपास वाहन होने का अनुमान है।
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इनमें परिवहन विभाग के आंकड़ों में करीब पौने चार लाख वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं। परिवहन विभाग के आंकड़ों में वह वाहन शामिल नहीं, जो गैर जनपदों के जिले में चल रहे हैं।
जिले में 50 हजार से अधिक वाहनों का अनुमान है, जो पिछले कई वर्षों से नवीनीकृत नहीं हुए हैं। इनमें ज्यादातर स्कूटर एवं बाइक हैं। करीब तीन लाख 40 हजार बाइकें हैं।
इनमें 80 फीसदी बाइक बीएस-6 तकनीक से पुरानी वाली हैं। विभाग के मुताबिक, नए वाहनों की खरीद के एक साल बाद हर छह महीने में प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र अनिवार्य है।
विभाग के अनुसार प्रदूषण कम करने के लिए ही पूरे देश में बीएस-6 तकनीक के वाहनों के साथ ई-वाहनों को बढ़ावा दिया जा रहा है। नियम कड़े हैं, मगर लोग जागरूक नहीं हो रहे हैं। ऐसे में अधिकतर वाहन बिना पीयूसी प्रमाणपत्र के दौड़ रहे हैं।
वाहन स्वामियों को ट्रैफिक नियमों का पालन करना चाहिए। हर छह माह में वाहनों की जांच कराकर प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र वाहनों के साथ रखना चाहिए। ऐसा न होने पर 10 हजार रुपये जुर्माने का प्राविधान है।
जानकारी मिली है कि तमाम वाहन बिना फिटनेस एवं पीयूसी के चल रहे हैं। ऐसे वाहनों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी। फिटनेस न कराने वाले वाहनों को नोटिस भेजी जाएगी।
- सुशील कुमार, उपसंभागीय निरीक्षक, परिवहन विभाग