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महिला अस्पताल में उपेक्षा की हद : चादर न सफाई... बदहाली में भर्ती गर्भवती
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फोटो- 29- महिला अस्पताल में घर से लाई चादर बिछाए प्रसूता। संवाद
हरदोई। जिला महिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं के दावों की हवा निकल रही है। इलाज कराने पहुंच रहीं गर्भवती और प्रसूता महिलाओं को चिकित्सकीय देखभाल के बजाय अव्यवस्थाओं से जूझना पड़ रहा है। वार्डों में साफ-सफाई का नामोनिशान नहीं है और बिस्तरों पर बिछाने के लिए एक साफ चादर तक उपलब्ध नहीं कराई जा रही। तीमारदार घर से चादर लाकर काम चला रहे हैं। अस्पताल के वार्डों में मरीज सुविधाओं के बजाय मूलभूत जरूरतों के लिए तरस रहे हैं।
जिला महिला अस्पताल के जिम्मेदारों की उदासीनता और लापरवाही के चलते वार्डाें में अव्यवस्थाएं फैली हुई हैं वहीं प्रसूताएं दो से तीन दिन के नवजात को लेकर संक्रमण के बीच भर्ती रहने को मजबूर हैं। अस्पताल की जमीनी हकीकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वार्डों में भर्ती कई गर्भवती महिलाओं को बिस्तरों पर बिछाने के लिए चादर तक नसीब नहीं हो रही है। तीमारदार अपनों के लिए घर से चादर लाने या गंदे गद्दों पर ही मरीज को लिटाने के लिए मजबूर हैं। एक तरफ जहां प्रसूताओं को संक्रमण से बचाने के लिए विशेष सतर्कता बरतने के दावे किए जाते हैं वहीं दूसरी ओर अस्पताल प्रशासन की इस अनदेखी से मरीजों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
संक्रमण को न्योता देती गंदगी
अस्पताल के विभिन्न वार्डों में बदइंतजामी का आलम यह है कि बेडों के पास रखी मेजों पर गंदगी जमा है और जगह-जगह सामान बिखरा पड़ा है। नियमित रूप से सफाई न होने के कारण वार्डों का वातावरण दुर्गंधयुक्त और असुविधाजनक बना हुआ है। तीमारदारों का आरोप है कि शिकायत करने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी इस ओर ध्यान देने के बजाय मौन साधे हुए हैं।
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प्रसूताओं का छलका दर्द
-सीतापुर बाईपास निवासी वार्ड में भर्ती सुशीला ने बताया कि अस्पताल में बेड तो मिल गया लेकिन उस पर बिछाने के लिए साफ चादर नहीं दी गई। मजबूरन घर से लाया गया कपड़ा बिछाकर लेटना पड़ा। यहां की गंदगी देखकर लगता है कि ठीक होने की जगह कहीं और बीमार न पड़ जाएं।
-एक अन्य तीमारदार सुरेश का कहना है कि वार्ड में इतनी गंदगी है कि नवजात बच्चे को इंफेक्शन होने का डर बना रहता है। टेबल पर बायोमेडिकल वेस्ट पड़ा है। सफाई के लिए कर्मचारियों से कहो तो वे अनसुना कर देते हैं। इलाज के नाम पर सिर्फ खानापूरी हो रही है। अस्पताल में बिस्तर भी साफ न मिले तो मरीज कहां जाए।
एक दूसरे पर डाली जाती जिम्मेदारियां
महिला अस्पताल अब मेडिकल कॉलेज से संबद्ध हो गया है। ऐसे में अब वहां के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुबोध स्वयं पर कोई जिम्मेदारी न लेकर मेडिकल कॉलेज प्रशासन पर डाल देते हैं जबकि मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने अस्पताल की व्यवस्थाओं को संभालने की जिम्मेदारी सीएमएस को दे रखी है।
महिला अस्पताल में अगर बिस्तरों पर चादरें नहीं बिछाई जा रही हैं तो इसकी जानकारी करेंगे और सुधार करवाएंगे। साफ-सफाई कराने के लिए भी निर्देशित किया जाएगा। -डॉ. जेबी गोगोई, प्रधानाचार्य
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जिला महिला अस्पताल के जिम्मेदारों की उदासीनता और लापरवाही के चलते वार्डाें में अव्यवस्थाएं फैली हुई हैं वहीं प्रसूताएं दो से तीन दिन के नवजात को लेकर संक्रमण के बीच भर्ती रहने को मजबूर हैं। अस्पताल की जमीनी हकीकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वार्डों में भर्ती कई गर्भवती महिलाओं को बिस्तरों पर बिछाने के लिए चादर तक नसीब नहीं हो रही है। तीमारदार अपनों के लिए घर से चादर लाने या गंदे गद्दों पर ही मरीज को लिटाने के लिए मजबूर हैं। एक तरफ जहां प्रसूताओं को संक्रमण से बचाने के लिए विशेष सतर्कता बरतने के दावे किए जाते हैं वहीं दूसरी ओर अस्पताल प्रशासन की इस अनदेखी से मरीजों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
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संक्रमण को न्योता देती गंदगी
अस्पताल के विभिन्न वार्डों में बदइंतजामी का आलम यह है कि बेडों के पास रखी मेजों पर गंदगी जमा है और जगह-जगह सामान बिखरा पड़ा है। नियमित रूप से सफाई न होने के कारण वार्डों का वातावरण दुर्गंधयुक्त और असुविधाजनक बना हुआ है। तीमारदारों का आरोप है कि शिकायत करने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी इस ओर ध्यान देने के बजाय मौन साधे हुए हैं।
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प्रसूताओं का छलका दर्द
-सीतापुर बाईपास निवासी वार्ड में भर्ती सुशीला ने बताया कि अस्पताल में बेड तो मिल गया लेकिन उस पर बिछाने के लिए साफ चादर नहीं दी गई। मजबूरन घर से लाया गया कपड़ा बिछाकर लेटना पड़ा। यहां की गंदगी देखकर लगता है कि ठीक होने की जगह कहीं और बीमार न पड़ जाएं।
-एक अन्य तीमारदार सुरेश का कहना है कि वार्ड में इतनी गंदगी है कि नवजात बच्चे को इंफेक्शन होने का डर बना रहता है। टेबल पर बायोमेडिकल वेस्ट पड़ा है। सफाई के लिए कर्मचारियों से कहो तो वे अनसुना कर देते हैं। इलाज के नाम पर सिर्फ खानापूरी हो रही है। अस्पताल में बिस्तर भी साफ न मिले तो मरीज कहां जाए।
एक दूसरे पर डाली जाती जिम्मेदारियां
महिला अस्पताल अब मेडिकल कॉलेज से संबद्ध हो गया है। ऐसे में अब वहां के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुबोध स्वयं पर कोई जिम्मेदारी न लेकर मेडिकल कॉलेज प्रशासन पर डाल देते हैं जबकि मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने अस्पताल की व्यवस्थाओं को संभालने की जिम्मेदारी सीएमएस को दे रखी है।
महिला अस्पताल में अगर बिस्तरों पर चादरें नहीं बिछाई जा रही हैं तो इसकी जानकारी करेंगे और सुधार करवाएंगे। साफ-सफाई कराने के लिए भी निर्देशित किया जाएगा। -डॉ. जेबी गोगोई, प्रधानाचार्य

फोटो- 29- महिला अस्पताल में घर से लाई चादर बिछाए प्रसूता। संवाद

फोटो- 29- महिला अस्पताल में घर से लाई चादर बिछाए प्रसूता। संवाद