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हर जुबां पर होगा शहीद शिवरतन, जैराम का नाम
अमर उजाला ब्यूरो/हरदोई
Updated Thu, 15 Dec 2016 12:15 AM IST
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विजय दिवस पर फिर याद आये जिले के रणबांकुरे।
- फोटो : अमर उजाला
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शहीदों की चिताओं पर लगेगें हर बरस मेले, वतन पे मिटने वालों का यही बाकी निशां होगा...। 1971 को हुए भारत- पाक युद्ध में दिसंबर के उन यादगार वीरगाथाओं और जिले के शहीद सिपाही शिवरतन, जैराम समेत देश भर के वीर सपूतों को नमन करने के लिए पूरे देश की तरह हरदोई में भी 45 वां विजय दिवस श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा।
स्वतंत्रता संग्राम में जनपद के क्र ांतिकारियों व आंदोलनकारियों का एक गौरवशाली इतिहास रहा है। यही नहीं, आजाद हिंदुस्तान में भी भारत माता की सीमा पर जब-जब विपत्ति आई तब देश के सपूतों ने जान की बाजी लगाकर अपने देश की रक्षा की है।
जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कमांडर गुरसरन गौर ने बताया कि वर्ष 1971 के भारत-पाक युद्ध में पाकिस्तान ने 16 दिसंबर के दिन भारत के जांबाजों के सामने घुटने टेके थे।
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पाकिस्तान के अधिकारियों समेत हजारों सैनिकों ने समर्पण किया। लेकिन इस युद्ध में भारत के हजारों जांबाज शहीद हुए थे।
पाक ने भारत पर वर्ष 1965 व 1971 दो बार हमले किए थे। दोनों ही बार उसे मुंह की खानी पड़ी थी। दोनों जंगों के दौरान फाजिल्का सेक्टर में लड़ी गई लड़ाई में भी जाट रेजीमेंट, असम रायफल के सैकड़ों जवान शहीद हुए थे। जिसके बाद वहां उन सब शहीदों को नमन करने के लिए संयुक्त समाधि आसफवाला समाधि को निर्मित किया था।
जहां 16 दिसंबर के दिन सभी शहीदों को श्रद्वांजलि देने के बाद नमन भी किया गया। जिले में भी 16 दिसंबर को 45वें विजय दिवस पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित होगें व शहीदों को
नमन किया जाएगा।
स्वतंत्रता संग्राम में जनपद के क्र ांतिकारियों व आंदोलनकारियों का एक गौरवशाली इतिहास रहा है। यही नहीं, आजाद हिंदुस्तान में भी भारत माता की सीमा पर जब-जब विपत्ति आई तब देश के सपूतों ने जान की बाजी लगाकर अपने देश की रक्षा की है।
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जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कमांडर गुरसरन गौर ने बताया कि वर्ष 1971 के भारत-पाक युद्ध में पाकिस्तान ने 16 दिसंबर के दिन भारत के जांबाजों के सामने घुटने टेके थे।
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पाकिस्तान के अधिकारियों समेत हजारों सैनिकों ने समर्पण किया। लेकिन इस युद्ध में भारत के हजारों जांबाज शहीद हुए थे।
पाक ने भारत पर वर्ष 1965 व 1971 दो बार हमले किए थे। दोनों ही बार उसे मुंह की खानी पड़ी थी। दोनों जंगों के दौरान फाजिल्का सेक्टर में लड़ी गई लड़ाई में भी जाट रेजीमेंट, असम रायफल के सैकड़ों जवान शहीद हुए थे। जिसके बाद वहां उन सब शहीदों को नमन करने के लिए संयुक्त समाधि आसफवाला समाधि को निर्मित किया था।
जहां 16 दिसंबर के दिन सभी शहीदों को श्रद्वांजलि देने के बाद नमन भी किया गया। जिले में भी 16 दिसंबर को 45वें विजय दिवस पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित होगें व शहीदों को
नमन किया जाएगा।