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गांधी की राह पर चला तो मॉडल बना शिवनगरा

Tue, 29 Mar 2022 11:24 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 29 Mar 2022 11:24 PM IST
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Shivnagara became a model if he followed the path of Gandhi
संडीला। महात्मा गांधी के स्वच्छता आंदोलन और अहिंसा की विचारधारा पर चलकर ब्लॉक के गांव शिवनगरा ने एक नई क्रांति को जन्म दिया। अब शिवनगरा की खूबसूरती प्रदेश में इस गांव की पहचान बन रही है। यहां के ग्रामीणों ने अपनी सोच के बूते यह मुकाम पाया है।
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हालांकि, सरकारी मशीनरी का कोई खास योगदान उन्हें प्राप्त नहीं हुआ। उन्होंने इस बात की शिकायत भी नहीं की। सिस्टम से बिना लड़े, खुद स्वच्छता के लिए झाड़ू उठा ली।
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गांव की गंदगी को समेट कर कूड़ेदान में भर दिया। यही वजह रही कि आजादी के अमृत महोत्सव में इस गांव को विशेष पहचान मिली है। गांव का नाम प्रदेश के उन तीन नामों में शुमार किया गया है, जिन्हें सबसे स्वच्छ और हरे-भरे गांव होने का तमगा हासिल हुआ है।
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आजादी के अमृत महोत्सव आगामी 11 से 17 अप्रैल तक मनाए जाने वाले आइकोनिक वीक के लिए चयनित तीन थीम में से क्लीन एंड ग्रीन विलेज थीम में पंचायती राज के निदेशक ने पंचायती राज मंत्रालय को तीन गांवों में शिवनगरा गांव का नाम भी शामिल किया गया है।
इसलिए नाराज भी हैं ग्रामीण
शिवनगरा के ग्रामीणों को इस बात की खुशी तो है कि उनका गांव प्रदेश में ख्याति बटोरेगा, लेकिन इस बात की नाराजगी भी है कि उनकेे काम की तारीफ में पीठ काम न करने वालों की थपथपाई जा रही है।
गांव के जितेंद्र का कहना है कि पंचायत में ई-गवर्नेंस के तहत आने वाली सभी सुविधाओं का लाभ ग्रामीणों को मिलना चाहिए, लेकिन पंचायत भवन में विद्युत व्यवस्था तक सही नहीं है।
राजकुमार का कहना है कि स्वच्छता को लेकर गांव का नाम हो रहा है, लेकिन सफाई व्यवस्था के लिए सफाई कर्मी हफ्तों तक आता नहीं। वह लोग कूड़ादान में कूड़ा डालते हैं, उसे उठाने भी कोई नहीं आता।
हम लोग सफाई करते हैं, पीठ जिम्मेदारों की थपथपाई जा रही है। प्रेम और सरोज का कहना है कि सरकारी योजनाओं का भी कार्य सही से होने लगे तो छोटे-छोटे कामों के लिए संडीला तक दौड़ नहीं लगानी होगी।
ग्रीन शिवनगरा से विलुप्त हो रही हरियाली
ग्रीन और क्लीन गांव की थीम में शामिल शिवनगरा गांव में हरियाली बचाने के लिए कोई खास प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के मौसम में गांव की एक पशुचर भूमि पर पौधरोपण किया गया था।

संभवतया इसी भूमि पर हरियाली की वजह से ग्रीन विलेज में इसका नाम शामिल हुआ है। हालांकि, अब बहुत कम पौधे इस जमीन पर बचे हैं। ग्रामीणों का मानना है कि यदि अधिक समय तक ध्यान न दिया गया तो गांव की हरियाली विलुप्त हो जाएगी।
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