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समर्थकों में जोश, मतदाता खामोश

Sat, 12 Feb 2022 11:09 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 12 Feb 2022 11:09 PM IST
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samarthakon mein josh, matadaata khaamosh
हरदोई। अबकी विधानसभा चुनाव के नजारे बदले बदले से नजर आते हैं। एक ओर निर्वाचन आयोग की कार्रवाई का डर, तो दूसरी तरफ वोटरों की खामोशी है। इसके चलते चुनाव को लेकर वोट दिलाने का ठेका लेने वाले भी वोटों की मठाधीशी नहीं कर पा रहे हैं।
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दरअसल कोविड की बंदिशों के चलते खुली दावत खुला सपोर्ट का चक्कर फिलहाल कहीं भी खुलेआम नहीं हो पा रहा है। चुप्पी संग लोग घर-घर दस्तक तो दे रहे हैं, लेकिन ये दस्तकें खुली दावतों में तब्दील नहीं हो पा रही हैं।
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20 से अधिक लोगों की संख्या को लेकर लागू गाइडलाइन का ही मसला है कि पूर्व में घरों पर होने वाली छोटी-छोटी दावतों का भी अबकी आयोजन नहीं हो पा रहा है।
चुनाव को लेकर दलों के कार्यकर्ता एवं प्रत्याशियों के समर्थक तो उत्साह में नजर आते हैं, लेकिन उनका उत्साह मतदाताओं की खामोशी को फिलहाल नहीं तोड़ पा रहा है। मतदाताओं की खामोशी एवं जागरुकता इस बार चुनाव में खासी अहम होती जा रही है।
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सियासत से जुड़े लोग मानते हैं कि संचार क्रांति और सोशल मीडिया के इस युग में अब गांव-गांव हर बात पहुंचते हुए देर नहीं लगती है। पिछले एक दशक में जिस तरह से जिले में मोबाइल फोन की पहुंच घर-घर हो गई है।
सोशल मीडिया की पहुंच भी नगरीय क्षेत्रों से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक हो चुकी है। जिससे नगरीय क्षेत्रों से लेकर गांवों तक सूचना के तंत्र को काफी मजबूत कर दिया है। ऐसे में लोगों में काफी जागरुकता आई है।
निर्वाचन आयोग के निर्देशों से लेकर चुनावी माहौल के बारे में लोगों तक खबर पहुंचने में अब कोई देरी नहीं होती, जिससे अबकी इस बार विधानसभा चुनावों में वोट के तथा कथित वोटों के ठेकेदारों से लेकर वोटरों के बीच उनकी मठाधीशी करने वालों में खलबली सी है।
दरअसल वोटरों के मन में क्या है, इसका अहसास कर पाना अब संभव नहीं हो पाता है। ज्यादातर की खामोशी और जो बोलते भी उनकी सभी से हां-हां की बात से चुनावी माहौल पहले जैसा रंगत वाला या फिर लहर चलने जैसा नहीं दिख रहा है।
निर्वाचन आयोग निष्पक्ष एवं भय मुक्त माहौल में चुनाव कराने के लिए लोगों को बेहतर माहौल दे रहा। उससे लोगों में मतदान करने के प्रति जागरुकता बढ़ रही है।

इसी का नतीजा है कि मतदाता खामोश है और उसकी मंशा की टोह न मिलने से दलीय कार्यकर्ताओं एवं समर्थकों को भी इस ओर ज्यादा गुणाभाग लगाना पड़ता है।
सियासी जानकार कहते हैं कि जब कभी वोटरों के एक बड़े हिस्से में खामोशी हो तो चुनाव परिणाम चौंकाने वाले होने की संभावनाएं बनने लगती हैं। वोटरों की खामोशी में बड़े-बड़े सियासी पंडितों को चुनावी समीकरणों को लेकर गुणाभाग लगाने में खासी मशक्कत करनी पड़ती है।
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