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नवोदय की तर्ज पर चलेगा सैनिक स्कूल
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हरदोई। जिले में सैनिक स्कूल की स्थापना नवोदय स्कूल और केंद्रीय विद्यालयों की तर्ज पर होगी। स्कूल में छह से 12वीं तक कक्षाएं संचालित की जाएंगी।
स्कूल संचालन में सरकार की भूमिका उतनी ही होगी जितनी रेलवे या रक्षा विभाग में होती है। यानी प्रबंधन और संचालन प्राइवेट सेक्टर के हाथों में होगा, लेकिन नियम भारत सरकार के अधीन होंगे।
रक्षा मंत्रालय स्कूल संचालन के लिए प्राइवेट सेक्टर के एनजीओ, ट्रस्ट, प्राइवेट स्कूल या राज्य सरकार के अधीन किसी शिक्षण संस्थान से आवेदन प्राप्त कर रहा है।
पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर जिले में सैनिक स्कूल की स्थापना की जानी है। माध्यमिक शिक्षा विभाग के सहयोग से प्राइवेट सेक्टर के शैक्षणिक संस्थानों, सोसाइटी, एनजीओ आदि को आमंत्रित किया जा रहा है।
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इसके अलावा सैनिक स्कूल सोसाइटी की वेबसाइट पर भी आवेदन के लिए खुला लिंक दिया गया है। आवेदक इस लिंक से सीधे स्कूल संचालन के लिए आवेदन कर सकते हैं।
डीआईओएस वीके दुबे ने बताया कि शैक्षिक दृढ़ता, अनुशासन व मूल आधारित शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से सैनिक स्कूल की स्थापना की जा रही है।
बताया कि स्थापना पब्लिक व प्राइवेट दोनों सेक्टरों की संयुक्त सहभागिता के आधार पर होनी है, इसलिए पब्लिक सपोर्ट के लिए एनजीओ, सभी विद्यालय, राज्य सरकार के शैक्षणिक संस्थान और निवेशकों से आवेदन की अपील की जा रही कि जो भी इच्छुक हों, वह रक्षा मंत्रालय की वेबसाइट सैनिक स्कूल डॉट एनसीओ डॉट जीओवी डॉट इन पर आवेदन कर सकते हैं।
सैनिक स्कूल को रक्षा मंत्रालय के सैनिक स्कूल सोसाइटी से संबद्ध कर संचालित कराया जाएगा। इसी सोसाइटी के निर्देशों व मानकों के आधार पर स्कूल में शिक्षण एवं अनुशासन कार्य संपन्न होंगे।
सैनिक स्कूल संचालन के नियम
सैनिक स्कूल की स्थापना के लिए जिस प्राइवेट सेक्टर की फर्ज, सोसाइटी या एनजीओ की सहभागिता होगी, उसे सैनिक स्कूल सोसाइटी के कई नियम पूरे करने होंगे।
स्कूल के कक्षा कक्षों की क्षमता से 50 फीसदी से अधिक का बैच नहीं बनाया जा सकेगा। बैच में छात्रों की अधिकतम सीमा 50 होगी। छात्रों से अधिकतम फीस 40 हजार रुपये वार्षिक के सापेक्ष 50 प्रतिशत फीस ही वसूली जाएगी।
नियम छह से 12 तक की सभी कक्षाओं में समान होंगे। इसके अलावा स्कूल के टीचर्स की ट्रेनिंग सैनिक स्कूल सोसायटी से होगी।
वन स्कूल, वन स्पोर्ट्स सिस्टम होगा लागू
सैनिक स्कूल में कई स्पोर्ट्स गतिविधियों के साथ वन स्कूल-वन स्पोर्ट व्यवस्था भी लागू होगी। यानी स्कूल में किसी एक स्पोर्ट विधा पर बच्चों की विशेष ट्रेनिंग होगी। इस विधा में यहां के बच्चों को निपुण किया जाएगा।
इसी स्पोर्ट्स विधा से स्कूल की पहचान खेल की दुनिया में होगी। स्कूल के बच्चे इस विशेष गेम में प्रशिक्षित होकर राज्य, देश और विदेशों तक स्पोर्ट्स में नाम कमाएंगे।
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स्कूल संचालन में सरकार की भूमिका उतनी ही होगी जितनी रेलवे या रक्षा विभाग में होती है। यानी प्रबंधन और संचालन प्राइवेट सेक्टर के हाथों में होगा, लेकिन नियम भारत सरकार के अधीन होंगे।
रक्षा मंत्रालय स्कूल संचालन के लिए प्राइवेट सेक्टर के एनजीओ, ट्रस्ट, प्राइवेट स्कूल या राज्य सरकार के अधीन किसी शिक्षण संस्थान से आवेदन प्राप्त कर रहा है।
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पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर जिले में सैनिक स्कूल की स्थापना की जानी है। माध्यमिक शिक्षा विभाग के सहयोग से प्राइवेट सेक्टर के शैक्षणिक संस्थानों, सोसाइटी, एनजीओ आदि को आमंत्रित किया जा रहा है।
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इसके अलावा सैनिक स्कूल सोसाइटी की वेबसाइट पर भी आवेदन के लिए खुला लिंक दिया गया है। आवेदक इस लिंक से सीधे स्कूल संचालन के लिए आवेदन कर सकते हैं।
डीआईओएस वीके दुबे ने बताया कि शैक्षिक दृढ़ता, अनुशासन व मूल आधारित शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से सैनिक स्कूल की स्थापना की जा रही है।
बताया कि स्थापना पब्लिक व प्राइवेट दोनों सेक्टरों की संयुक्त सहभागिता के आधार पर होनी है, इसलिए पब्लिक सपोर्ट के लिए एनजीओ, सभी विद्यालय, राज्य सरकार के शैक्षणिक संस्थान और निवेशकों से आवेदन की अपील की जा रही कि जो भी इच्छुक हों, वह रक्षा मंत्रालय की वेबसाइट सैनिक स्कूल डॉट एनसीओ डॉट जीओवी डॉट इन पर आवेदन कर सकते हैं।
सैनिक स्कूल को रक्षा मंत्रालय के सैनिक स्कूल सोसाइटी से संबद्ध कर संचालित कराया जाएगा। इसी सोसाइटी के निर्देशों व मानकों के आधार पर स्कूल में शिक्षण एवं अनुशासन कार्य संपन्न होंगे।
सैनिक स्कूल संचालन के नियम
सैनिक स्कूल की स्थापना के लिए जिस प्राइवेट सेक्टर की फर्ज, सोसाइटी या एनजीओ की सहभागिता होगी, उसे सैनिक स्कूल सोसाइटी के कई नियम पूरे करने होंगे।
स्कूल के कक्षा कक्षों की क्षमता से 50 फीसदी से अधिक का बैच नहीं बनाया जा सकेगा। बैच में छात्रों की अधिकतम सीमा 50 होगी। छात्रों से अधिकतम फीस 40 हजार रुपये वार्षिक के सापेक्ष 50 प्रतिशत फीस ही वसूली जाएगी।
नियम छह से 12 तक की सभी कक्षाओं में समान होंगे। इसके अलावा स्कूल के टीचर्स की ट्रेनिंग सैनिक स्कूल सोसायटी से होगी।
वन स्कूल, वन स्पोर्ट्स सिस्टम होगा लागू
सैनिक स्कूल में कई स्पोर्ट्स गतिविधियों के साथ वन स्कूल-वन स्पोर्ट व्यवस्था भी लागू होगी। यानी स्कूल में किसी एक स्पोर्ट विधा पर बच्चों की विशेष ट्रेनिंग होगी। इस विधा में यहां के बच्चों को निपुण किया जाएगा।
इसी स्पोर्ट्स विधा से स्कूल की पहचान खेल की दुनिया में होगी। स्कूल के बच्चे इस विशेष गेम में प्रशिक्षित होकर राज्य, देश और विदेशों तक स्पोर्ट्स में नाम कमाएंगे।