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मेरी नसों में है संघ और भाजपा : रजनी

Sun, 02 Oct 2016 11:54 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, हरदोई
अमर उजाला ब्यूरो, हरदोई Updated Sun, 02 Oct 2016 11:54 PM IST
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RSS and the BJP is in my veins: Rajni
रजनी तिवारी - फोटो : अमर उजाला

हरदोई। भाजपा और संघ की विचारधारा मेरी नसों हैं। मैं विचारों से हमेशा भाजपाई ही रही हूं। पति के सपनों को पूरा करने और उनसे जुड़़े लोगों की भावनाओं के चलते बसपा से चुनाव लड़ी थी। अब उसी जनता की मांग पर अपने मूल घर भाजपा में वापसी की है। ये बात भाजपा ज्वाइन करने के बाद रजनी तिवारी ने अमर उजाला से बातचीत में कही।

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रजनी तिवारी के पति उपेंद्र तिवारी कट्टर संघी विचारधारा के थे। इसके चलते 1999 में विश्व हिंदू परिषद का कोषाध्यक्ष बना दिया गया। इसके बाद वह विहिप के जिलाध्यक्ष बनाए गए। इस दौरान जिले के बड़े हिंदू नेताओं उनका नाम गिना जाने लगे।
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उनके साथ युवाओं का बड़ी टीम थी। भाजपा से टिकट न मिलने पर उपेंद्र तिवारी बसपा ज्वाइनकर ली। वर्ष 2007 में बसपा ने उन्हें बिलग्राम सीट से मैदान में उतारा। बसपा की आंधी में उपेंद्र ने सपा के विश्राम सिंह यादव को 12469 वोटों से शिकस्त दी। उपेंद्र को 61703 और विश्राम को 49234 वोट मिले।
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चुनाव जीतने के करीब आठ महीने बाद उपेंद्र तिवारी की मौत हो गई। वर्ष 2008 में हुए उपचुनाव में बसपा ने उपेंद्र की पत्नी रजनी तिवारी को मैदान में उतारा। सहानुभुति लहर रजनी लहर में रजनी 38168 वोट से चुनाव जीत गईं।

रजनी को 92196 और सपा के विश्राम सिंह को 54028 वोट मिले। वर्ष 2012 में परिसीमन में नई बनी सीट सवायजपुर से चुनाव लड़ीं। इसमें ज्यादातर हिस्सा बिलग्राम का ही था। प्रदेश में सपा की आंधी के बावजूद रजनी चुनाव जीतने में कामयाब रहीं।

करीब 12 साल तक नीले झंडे के नीचे चल रहे बृजेश वर्मा ने 27 जुलाई को बसपा से बगावत कर दी थी। उन्होंने मायावती पर टिकट बेचने तक का आरोप लगा दिया था। करीब दो महीने से राजनीतिक वनवास में रहे बृजेश वर्मा ने रविवार को लखनऊ में भगवा चोला ओढ़ लिया।

बृजेश वर्मा ने 2002 में तत्कालीन विधायक और रिश्ते के भाई सतीश वर्मा के साथ बसपा में काम शुरू किया। 2004 में सतीश ने उन्हें अपना प्रतिनिधि बना दिया। 2005 में सतीश की  बदौलत ही बृजेश वर्मा मल्लावां से ब्लॉक प्रमुख बन गए।


2010 के ब्लॉक प्रमुख चुनाव में सतीश और बृजेश की दूरिया बढ़ गईं। सतीश ने पत्नी अंजू बाला के सामने बृजेश ने करीबी रामकोरा को चुनाव लड़वाया था। सतीश के सपा में जाने पर बसपा को बृजेश को टिकट दे दिया और वह विधायक बन गए। इस साल हुए ब्लॉक प्रमुख चुनाव में फिर बृजेश की मां ब्लॉक प्रमुख चुनी गई थीं।

 

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