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Hardoi News: बढ़ते तापमान से मक्का की फसल पर मंडराया संकट, खेतों से गायब हो रही नमी

Tue, 22 Apr 2025 11:04 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 22 Apr 2025 11:04 PM IST
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Rising temperatures pose a threat to the maize crop, moisture disappearing from the fields
हरदोई। अप्रैल माह में भीषण गर्मी का आलम यह है कि पारा 40 डिग्री पार कर गया है। तेज धूप और गर्मी से आम जनमानस तो बेहाल हैं, साथ ही खेती पर भी खतरा मंडराने लगा है।
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गेहूं की फसल तैयार हो चुकी है, लेकिन मूंग, उरद और ग्रीष्मकालीन मूंगफली बोई गई है। मक्का की फसल अगले माह तैयार हो जाएगी। भीषण गर्मी का सबसे अधिक असर मक्के की फसल पर पड़ रहा है। फूलों में परागीकरण प्रक्रिया न होने से दाने कमजोर होने की संभावना है।
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तापमान में लगातार बढ़ोतरी से फसलों को काफी नुकसान हो रहा है। जायद वाली मक्का की फसल में भी नुकसान होने की संभावना जताई जा रही है। मक्का की बुआई मार्च व अप्रैल में होती है, इस साल भी बुआई तो की गई, लेकिन अब तापमान लगातार बढ़ रहा है। इस वजह से मक्का की फसल में दाने न पड़ने का संकट मंडरा रहा है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. सीपीएन गौतम ने बताया कि अधिक तापमान की वजह से खेतों की नमी गायब हो जाती है।
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इस समय मूंग, उरद और ग्रीष्मकालीन मूंगफली की बुआई तो कर दी गई, लेकिन अब मक्का की फसल तैयार हाेने लगी है। फूलों में परागीकरण प्रक्रिया चल रही है, लेकिन अधिक तापमान की वजह से प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। किसानों को अपने खेतों में सिंचाई की पर्याप्त व्यवस्था कर चार से छह दिन पर पानी देकर नमी को बनाए रखना होगा। तभी मक्का की बेहतर फसल हो सकती है। अन्यथा भुट्टे में दाने होना मुश्किल हाे सकता है।


मक्का पर बाल तो आए पर दाना कमजोर
हरदोई। किसान महिपाल ने बताया कि मकई के पौधे अब बड़े होने लगे हैं और भुट्टा बाल भी पकड़ने लगा है, लेकिन दाना अभी तैयार नहीं हुआ है। तेज धूप से बचाव के लिए खेतों में नमी को बनाने का प्रयास लगातार कर रहे हैं। समय-समय पर सिंचाई से दाना तैयार हो जाएगा। फसल की ऊंचाई अभी बढ़नी है, ऐसे में उम्मीद है कि मकई के दाने पड़ जाएंगे। बताया कि हर साल मक्के की फसल बोते हैं। फसल बहुत अच्छी होती है। अगर सिंचाई छोड़ दी जाए तो मकई के बाल में दाने नहीं आएंगे।




किसान नीतेश शर्मा बताते हैं कि लगभग एक माह पहले मकई के खेतों में खाद डाल दिया गया है। अब सिर्फ सिंचाई की आवश्यकता है, ताकि खेतों की नमी बरकरार रहे। चार से छह दिन पर फसल को पानी देते रहते हैं, ताकि दाना मजबूत बने और पैदावार अच्छी हो सके।



किसान नीरज कुमार ने बताया कि इस साल चना की कटाई कर मक्का की बुआई मार्च में कर दी थी। शुरू में तो हर पौधे में तीन से चार बालियां लगीं, लेकिन दाने नहीं पड़े। जानकारी करने पर नमी की कमी आई। अब नियमित अंतराल पर सिंचाई कर रहे हैं।
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