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श्रीराम व सीता का प्रथम मिलन पुष्प वाटिका में
अमर उजाला ब्यूरो, हरदोई
Updated Tue, 09 Feb 2016 12:45 AM IST
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नुमाइश मैदान में चल रही रामलीला में सोमवार को कलाकारों ने भगवान श्रीराम और माता सीता के प्रथम मिलन का भावपूर्ण मंचन किया। जिसे देखकर दर्शक काफी भाव विभोर हो गए। इसके पहले गंगा तट दर्शन की लीला से भी कलाकारों ने अपने सशक्त अभिनय से आदि पात्रों केचरित्रों को जीवंत कर दिया।
कलाकारों ने मंचन में मुनि विश्वामित्र सहित राम और लक्ष्मण जनकपुर माता सीता के स्वयंवर में जाते हैं। जहां जाने से पहले श्रीराम गंगा तट का दर्शन कर पूजन अर्चन भी करते हैं। कलाकारों ने जनक पुरी पहुंचने का भावपूर्ण मंचन किया। श्रीराम मुनि विश्वामित्र से जनकपुरी देखने की इच्छा जताते हैं और जनकपुर घूमकर सभी को दर्शन देते हैं। प्रभु श्रीराम को देखकर जनकपुर वासी भी उनके रूप पर मोहित हो जाते हैं। मुनि विश्वामित्र पूजन के लिए श्रीराम से पुष्प वाटिका से फूल लाने को भेजते हैं।
जहां माता सीता भी गौरी पूजन के लिए फूल लेने पहुंचती हैं। यहीं श्रीराम और सीता का मिलन होता है। सीता जी श्रीराम को देखकर माता गौरी से वंदना करती हैं। सीता जी की वंदना सुनकर गौरी माता उन्हें आशीर्वाद देती हैं। कलाकारों ने पुष्प वाटिका केरमणीक मंचन को बड़े ही भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया। इस मौके पर मुख्य आयोजक राम प्रकाश प्रकाश शुक्ला, लीला संयोजक कृष्ण अवतार दीक्षित बाले, वियोग चंद्र मिश्र, राकेश कुमार गुप्ता आदि मौजूद रहे।
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कलाकारों ने मंचन में मुनि विश्वामित्र सहित राम और लक्ष्मण जनकपुर माता सीता के स्वयंवर में जाते हैं। जहां जाने से पहले श्रीराम गंगा तट का दर्शन कर पूजन अर्चन भी करते हैं। कलाकारों ने जनक पुरी पहुंचने का भावपूर्ण मंचन किया। श्रीराम मुनि विश्वामित्र से जनकपुरी देखने की इच्छा जताते हैं और जनकपुर घूमकर सभी को दर्शन देते हैं। प्रभु श्रीराम को देखकर जनकपुर वासी भी उनके रूप पर मोहित हो जाते हैं। मुनि विश्वामित्र पूजन के लिए श्रीराम से पुष्प वाटिका से फूल लाने को भेजते हैं।
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जहां माता सीता भी गौरी पूजन के लिए फूल लेने पहुंचती हैं। यहीं श्रीराम और सीता का मिलन होता है। सीता जी श्रीराम को देखकर माता गौरी से वंदना करती हैं। सीता जी की वंदना सुनकर गौरी माता उन्हें आशीर्वाद देती हैं। कलाकारों ने पुष्प वाटिका केरमणीक मंचन को बड़े ही भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया। इस मौके पर मुख्य आयोजक राम प्रकाश प्रकाश शुक्ला, लीला संयोजक कृष्ण अवतार दीक्षित बाले, वियोग चंद्र मिश्र, राकेश कुमार गुप्ता आदि मौजूद रहे।
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