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नई सोच से समाज को दिशा दें टीचर
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
Updated Wed, 01 Apr 2015 12:51 AM IST
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ब्लाक संसाधन केंद्र पर आयोजित शैक्षिक संगोष्ठी एवं
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आरटीई मेले में शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाने के तरीकों पर चर्चा की गई।
संगोष्ठी में बच्चाें को स्कूल तक लाने में प्रभावशाली लोगों का सहयोग लेने
की जरूरत पर बल दिया गया।
बीईओ उपेंद्र विश्वकर्मा ने कहा कि समाज को बनाने-बिगाड़ने को एक टीचर की बड़ी जिम्मेदारी होती है, इसलिए टीचर खुद अपना मूल्यांकन करें। सोच बदलें और नई सोच से समाज को एक नई दिशा देने का काम करें। कक्षा के बच्चों को अपना बच्चा जान इन्हें आगे बढ़ाएं। जब समाज तरक्की करेगा तो देश भी तरक्की करेगा।
एबीआरसी अजय दीक्षित ने कहा कि बच्चों का सतत मूल्यांकन किया जाए, जिससे पढ़ाए गए पाठ को बच्चों ने कितना सीखा है, इसका ज्ञान हो सके। संतरी बानो ने शैक्षिक नवाचार पर विचार रखते हुए कहा कि नवीन खोज से बच्चों को सिखाने का कार्य करें। इससे पढ़ाई के प्रति उनकी रुचि बढे़गी।
प्रधानाचार्य राम रघुवीर ने नामांकन और ठहराव में एसएमसी के भूमिका पर चर्चा करते हुए कहा कि एसएमसी अभिभावकों के साथ बैठकें कर ऐसे बच्चों की सूची तैयार करें जो पढ़ने नहीं जा रहे हैं। फिर उन्हें स्कूल भेजने को प्रभावशाली व्यक्तियों का सहयोग लें।
महीने में बच्चों की उपस्थिति की जांच कर कम उपस्थिति वाले बच्चों को चिह्नित कर अभिभावकों से संपर्क किया जाना चाहिए। प्रार्थना से पहले घंटी बजे और छुट्टी के बाद राष्ट्रगान हो ताकि बच्चों के ठहराव की सही जानकारी सामने आ सके। कालीचरन, संजीव कुमार व कमलेश कुमार ने भी विचार रखे।
बीईओ उपेंद्र विश्वकर्मा ने कहा कि समाज को बनाने-बिगाड़ने को एक टीचर की बड़ी जिम्मेदारी होती है, इसलिए टीचर खुद अपना मूल्यांकन करें। सोच बदलें और नई सोच से समाज को एक नई दिशा देने का काम करें। कक्षा के बच्चों को अपना बच्चा जान इन्हें आगे बढ़ाएं। जब समाज तरक्की करेगा तो देश भी तरक्की करेगा।
एबीआरसी अजय दीक्षित ने कहा कि बच्चों का सतत मूल्यांकन किया जाए, जिससे पढ़ाए गए पाठ को बच्चों ने कितना सीखा है, इसका ज्ञान हो सके। संतरी बानो ने शैक्षिक नवाचार पर विचार रखते हुए कहा कि नवीन खोज से बच्चों को सिखाने का कार्य करें। इससे पढ़ाई के प्रति उनकी रुचि बढे़गी।
प्रधानाचार्य राम रघुवीर ने नामांकन और ठहराव में एसएमसी के भूमिका पर चर्चा करते हुए कहा कि एसएमसी अभिभावकों के साथ बैठकें कर ऐसे बच्चों की सूची तैयार करें जो पढ़ने नहीं जा रहे हैं। फिर उन्हें स्कूल भेजने को प्रभावशाली व्यक्तियों का सहयोग लें।
महीने में बच्चों की उपस्थिति की जांच कर कम उपस्थिति वाले बच्चों को चिह्नित कर अभिभावकों से संपर्क किया जाना चाहिए। प्रार्थना से पहले घंटी बजे और छुट्टी के बाद राष्ट्रगान हो ताकि बच्चों के ठहराव की सही जानकारी सामने आ सके। कालीचरन, संजीव कुमार व कमलेश कुमार ने भी विचार रखे।