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Hardoi News: 14 साल से अधूरे राजकीय पॉलीटेक्निक में होगी प्राइवेट पढ़ाई

Thu, 12 Sep 2024 10:23 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 12 Sep 2024 10:23 PM IST
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Private studies will be done in Government Polytechnic which has been incomplete for 14 years.
हरदोई। संडीला के युवाओं को प्राविधिक शिक्षा स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 14 साल पहले राजकीय पॉलीटेक्निक खोले जाने का प्रस्ताव मंजूर किया गया था। 14 साल में कभी जमीन की अड़चन तो कभी शासन सत्ता की अनदेखी से निर्माण पूरा नहीं हुआ और अब इस राजकीय पॉलीटेक्निक में प्राइवेट पढ़ाई कराने की तैयारी कर ली गई है।
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ने पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत इस पॉलीटेक्निक के संचालन की जिम्मेदारी इंदिरा गांधी कंप्यूटर साक्षरता मिशन को सौंप दी है। यहां सिर्फ चालीस फीसदी विद्यार्थियों को सरकारी फीस पर प्रवेश मिलेगा, जबकि साठ फीसदी को प्राइवेट पॉलीटेक्निक जैसा शुल्क देना होगा।
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संडीला तहसील क्षेत्र में कछौना, बेहंदर, भरावन, कोथावां और संडीला विकास खंड आते हैं। इन इलाकों में तकरीबन 130 अनुदानित और वित्त विहीन इंटर काॅलेज हैं। औसतन हर वर्ष 38 हजार विद्यार्थी हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा पास करते हैं। आगे की पढ़ाई के लिए इनका इस दौर में प्राविधिक शिक्षा खासतौर पर पॉलीटेक्निक की तरफ रुझान ज्यादा होता है। संडीला के ज्यादातर विद्यार्थियों को पॉलीटेक्निक में दाखिले के लिए लखनऊ और हरदोई शहर में दौड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं रहता। वित्तीय वर्ष 2009-10 में संडीला में राजकीय पॉलीटेक्निक का निर्माण कराए जाने का प्रस्ताव शासन ने मंजूर किया था।
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अव्वल तो 14 वर्ष बाद भी पॉलीटेक्निक भवन का निर्माण पूरा नहीं हो पाया। वहीं सरकारी कालेज में तकनीकी शिक्षा की आस लगाए छात्रों को अब निराशा होना पड़ेगा क्योंकि शासन ने संडीला के राजकीय पॉलीटेक्निक का संचालन पीपीपी मॉडल पर कराने का निर्णय ले लिया है। इसके लिए कंपनी भी नामित कर दी गई है। मतलब यह कि नाम तो राजकीय पॉलीटेक्निक होगा, लेकिन यहां पढ़ाई के लिए शिक्षक से लेकर अन्य संसाधन तक प्राइवेट ही होंगे। इतना ही नहीं राजकीय पॉलीटेक्निक की अपेक्षा दो गुने से अधिक शुल्क भी विद्यार्थियों को यहां पढ़ाई के लिए देना होगा।



राजकीय पॉलीटेक्निक का संचालन प्राइवेट कंपनी के पास आ गया है। कक्षाएं संचालित करने के लिए भी कंपनी ने अपनी स्तर से ट्रेड निर्धारित कर दी हैं। इनमें इलेक्टि्रकल, मैकेनिकल, सिविल इंजीनियरिंग और रैनेवेबल एनर्जी शामिल हैं। इन चारों ही ट्रेड में 90-90 सीटें रखी गई हैं। 40 फीसदी सीटों पर सरकारी फीस देनी होगी, जबकि साठ फीसदी पर प्राइवेट पॉलीटेक्निक की फीस लगेगी। प्राइवेट और सरकारी सीट का चयन ज्वाइंट इंट्रेंस एग्जामिनेशन काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश (पॉलीटेक्निक) के परिणाम और काउंसलिंग के आधार पर कर सकेंगे।



राजकीय पॉलीटेक्निक की प्राइवेट सीट पर अभ्यर्थियों को बड़ा बजट खर्च करना पड़ेगा। सरकारी सीट पर दाखिला मिलने पर अभ्यर्थी को 13 हजार रुपये फीस प्रतिवर्ष अदा करनी होगी, जबकि प्राइवेट सीट के अभ्यर्थी को 30150 रुपये खर्च करने होंगे। इनमें से 15 हजार रुपये दाखिले के समय जमा करने होंगे और बाकी रुपये जमा कराने का विशेषाधिकार परिस्थितियों के हिसाब से पॉलीटेक्निक का संचालन करने वाली संस्था करेगी।




संडीला में पॉलीटेक्निक का संचालन पीपीपी मोड पर किए जाने का निर्णय शासन स्तर से हुआ है। दिल्ली की इंदिरा गांधी कंप्यूटर साक्षरता मिशन नाम की कंपनी को संचालन की जिम्मेदारी दी गई है। प्रवेश प्रक्रिया भी शुरू कराई गई है, लेकिन भवन का निर्माण अभी पूरा नहीं हो पाया है। प्राइवेट सीट पर अभ्यर्थी को तीस हजार रुपये से अधिक की फीस देनी होगी। सरकारी सीट पर 13 हजार रुपये फीस पड़ती है।



कविता त्रिपाठी, प्रधानाचार्या, राजकीय पॉलीटेक्निक
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