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Hardoi News: अतिक्रमण की जद में अस्तित्व खो रहे तालाब

Sat, 27 May 2023 11:59 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 27 May 2023 11:59 PM IST
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Ponds are losing existence due to encroachment
संवाद न्यूज एजेंसी
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हरदोई। जिले के तालाब कभी पूरे साल पानी से लबालब रहा करते थे, लेकिन अब सिर्फ नाम ही बचा है। इन तालाबों पर लोगों ने कब्जा कर या तो खेती में उपयोग करना शुरू कर दिया है या इन्हें पाट कर दूसरे उपयोग में लाना शुरू किया है।
जनपद में विभागीय आंकड़ों की माने तो 3628 से अधिक तालाब थे। इनमें ज्यादातर का अस्तित्व समाप्त हो चुका है। मौजूदा समय में शहर में 283 और गांवों में एक हजार तालाब वजूद में है। इनके अलावा अन्य तालाबों का नामोनिशान मिट गया या फिर अतिक्रमण से सिमट चुके हैं।
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यह है शहरी तालाबों की दशा-
शहर के मुहल्ला खजांची टोला स्थित तालाब को जल संग्रहण एवं संरक्षण से अधिक भूमि रूप में उपयोग के लिए कूड़ा-कचरा और निर्माण सामग्री का मलबा डाल-डाल कर समतल बना दिया गया है। अब एक कोने में खड़ी खरपतवार नाम के लिए तालाब होने की गवाही दे रही है। रेलवे गंज में बाबा का तालाब काफी बड़ा था, जो सिकुड़ता जा रहा है। वहीं, शहर के सांडी रोड पर तालाब था, जो आधा पट चुका है और शेष सूखा पड़ा है। इसके अलावा शहर के चौहान थोक, आलू थोक, अशराफ टोला, सुभाष नगर, नुमाइश पुरवा के तालाब का अस्तित्व समाप्त हो गया है।
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तालाब होने से शहर का पानी जमा नहीं होता था और तालाब व पोखरों में एकत्रित हो जाता है। इससे भूमि का जल स्तर भी सामान्य रहता था और लोगों को जलभराव से भी निजात मिलती थी। तालाबों के न होने से जल निकासी समस्या बन रही है।
रामदेव शुक्ला, अधिवक्ता
गांव में तालाब व पोखर का पानी का प्रयोग किया जाता था। गांव के तालाब शुद्ध हुआ करते थे। जिसका पानी पीने और अन्य कार्यों में प्रयोग किया जाता था। बहुत कम घरों में हैंडपंप हुआ करते थे।

क्षितिज पाठक, बैंक कर्मी

तालाब सूखने से पशु-पक्षी बेहाल
कछौना। नगर समेत ग्रामीण इलाकों में अब तालाब अपना अस्तित्व ही खोते जा रहे इसका प्रमुख कारण यह है कि तालाबों को पाटकर नए मकानों का निर्माण किया जा रहा है। अमृत सरोवर योजना के तहत विकासखंड में दर्जनों तालाबों का निर्माण कराया गया, लेकिन इन तालाबों में बूंद भर पानी नहीं है, तालाब सूखे पड़े हैं। पानी में होने के कारण आसपास के पशु पक्षी जानवर पानी की तलाश में भटक रहे हैं। (संवाद)
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