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Hardoi News: करोड़ों के संयंत्र हो रहे कबाड़, आक्सीजन सिलिंडरों पर हर माह खर्च हो रहे दो लाख

Thu, 06 Mar 2025 11:39 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हरदोई
संवाद न्यूज एजेंसी, हरदोई Updated Thu, 06 Mar 2025 11:39 PM IST
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Plants worth crores are becoming junk, two lakhs are being spent every month on oxygen cylinders
फोटो-03- इमरजेंसी कक्ष में मरीजों को कंसंट्रेटर से दी जा रही ऑक्सीजन। संवाद
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फोटो-04- मेडिकल कॉलेज में बंद ऑक्सीजन प्लांट। संवाद
- इमरजेंसी, पुरुष और महिला अस्पताल में 20 से 24 आक्सीजन सिलेंडर
- एक सिलेंडर को भरवाने में खर्च हो रहे 350 से 400 रुपये
संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। मेडिकल कॉलेज परिसर में कई करोड़ रुपये की लागत से स्थापित किए गए ऑक्सीजन संयंत्र इस्तेमाल न होने के कारण कबाड़ हो रहे हैं। उधर, हर माह दो लाख रुपये तक का खर्च ऑक्सीजन सिलिंडरों को भरवाने में किया जा रहा है।
आकस्मिक चिकित्सा कक्ष समेत कई वार्डाें में ऑक्सीजन की आपूर्ति के लिए पाइप पड़े हैं, लेकिन मरीजों काे सिलिंडर और कंसंट्रेटर से ऑक्सीजन दी जा रही है। मेडिकल कॉलेज परिसर में चार ऑक्सीजन संयंत्र हैं। इनमें से दो संयंत्र पीएम केयर फंड से स्थापित कराए गए थे।
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एचसीएल फाउंडेशन व एक अन्य संस्था की ओर से भी दो ऑक्सीजन संयंत्र स्थापित कराए गए थे। इनमें से मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी के पास स्थित संयत्र की क्षमता 500 लीटर प्रति मिनट है, जबकि महिला चिकित्सालय के पास लगे प्लांट में 250 लीटर प्रति मिनट और 375 लीटर प्रति मिनट की क्षमता है।
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मेडिकल कॉलेज में ही लगे एक और संयंत्र की क्षमता भी पांच सौ मीटर प्रति मिनट की है। उक्त कोई भी संयंत्र सही ढंग से काम नहीं कर रहे हैं। इनकी स्थापना में लगभग चार करोड़ रुपये खर्च हुए थे। इनकी मरम्मत के लिए कई बार अभियंता आए, लेकिन समस्या को दूर नहीं कर पाए। मरम्मत में बजट की कमी आड़े आने की बात भी सामने आई है।


भर्ती मरीजों को सिलिंडर सेे देते ऑक्सीजन
केस-1- बावन के जगदीशपुर गांव निवासी चंद्रपाल करीब नौ दिन पहले इमरजेंसी में सांस लेने में दिक्कत के कारण भर्ती हुए थे। अस्पताल में आने के बाद से कंसंट्रेटर और सिलिंडर से ही ऑक्सीजन दी जा रही है।


केस-2- शहर के मिल कालोनी निवासी सोनी को शुक्रवार को इमरजेंसी में भर्ती कराया गया। उन्हें सांस लेने में काफी परेशानी हो रही थी। कंसंट्रेटर और सिलिंडर की मदद से ऑक्सीजन दी जा रही है।

इनसेट

प्लांट से गुणवत्तापूर्ण नहीं हो रहा था उत्पादन

करोड़ों रुपये खर्च खर्च कर लगे ऑक्सीजन प्लांट शोपीस साबित हो रहे हैं। संयंत्रों पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं लेकिन प्लांट से गुणवत्तापूर्ण ऑक्सीजन का उत्पादन ही नहीं हो रहा है। मेडिकल कॉलेज के द्वार के पास लगे प्लांट से इमरजेंसी को ऑक्सीजन की सप्लाई होती है। दो बार उत्पादन भी किया गया लेकिन दोनों बार ऑक्सीजन की गुणवत्ता मानकों के अनुसार नहीं रही। इस वजह से प्लांट बंद कर दिया गया।


वर्जन
दो माह में पाइपों से बेड तक शुरू हो जाएगी आपूर्ति
मेडिकल कॉलेज में इमरजेंसी के लिए 500 एलएमपी संयंत्र को चलाने का प्रयास किया जा रहा है। इस संयंत्र के चालू होने से इमरजेंसी सहित कई वार्डों में ऑक्सीजन की समस्या का समाधान हो जाएगा। अगले डेढ़ से दो माह में संयंत्र को चालू करवाकर पाइपों से मरीजों के बेड तक ऑक्सीजन पहुंचना शुरू हो जाएगी।-डॉ. जेविन बिष्णु गोगोई, प्रधानाचार्य, मेडिकल कॉलेज
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