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जागरुकता के शोर पर भी टूट गई टीकाकरण की डोर
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हरदोई। टीकाकरण अभियान के प्रति अभिभावकों में जागरुकता की कमी है। आंकड़े इसकी गवाही दे रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से चलाए जा रहे विशेष टीकाकरण अभियान के दौरान जिले के नौ ब्लाकों समेत 10 क्षेत्रों में 879 बच्चों के परिजनों ने टीका लगवाने से ही इनकार कर दिया। ऐसे में बच्चों को भविष्य में परेशानी उठानी पड़ सकती है।
चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अधीन विशेष टीकाकरण अभियान चलाए जाते हैं। दो वर्ष के बच्चों को समय-समय पर निर्धारित टीके लगाए जाते हैं। इस वर्ष कोरोना संक्रमण के कारण टीकाकरण काफी हद तक प्रभावित रहा। इसको रफ्तार पर लाने के लिए नवंबर में सभी बच्चों के टीके लगाने का विशेष अभियान चलाया गया। इस दौरान जिले के नौ ब्लॉकों समेत 10 क्षेत्रों में 1332 बच्चों के अभिभावकों ने उन्हें टीके नहीं लगवाए। इस पर जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. प्रशांत रंजन की देखरेख में टीकाकरण न कराने वाले लोगों से संपर्क किया गया तो 453 लोगों ने टीकाकरण करा लिया। इसके बाद भी 879 लोगों ने बच्चों का टीकाकरण नहीं कराया। (ब्यूरो)
शहर मेें स्कोर सिर्फ 23.96 फीसदी
नगरीय क्षेत्र के लोग भी टीकाकरण को लेकर गंभीर नहीं हैं। शहर में ही नवंबर में 192 बच्चों के परिजनों ने टीके लगवाने से इनकार कर दिया। दोबारा इन परिवारों से संपर्क किया गया तो सिर्फ 46 लोगों ने ही टीके लगवाए। सिर्फ 23.96 फीसदी बच्चों के ही टीके लगे।
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टीकाकरण के आंकड़ों पर नजर
- अहिरोरी में 270 बच्चों के परिजनों ने पहले टीका लगवाने से किया मना। समझाने पर इनमें से 47 ने टीके लगवाए।
- बेेंहदर में 33 का इनकार। बाद में 22 ने टीके लगवाए।
- भरावन में 245 का इनकार। समझाने पर 125 माने।
- भरखनी में 74 ने मना किया। समझाने पर 32 माने।
- हरियावां में 137 ने नहीं लगवाया टीका। बाद में 26 ने टीके लगवाए।
- हरपालपुर में 58 बच्चों के परिजनों ने मना किया। समझाने पर 40 माने।
- संडीला में 28 ने इनकार किया। समझाने पर नौ लोग माने।
- टड़ियावां में 183 ने नहीं लगवाए टीके। बाद में 52 ने टीके लगवाए।
- टोडरपुर में 112 का इनकार। समझाने पर 54 ने टीके लगवाए।
वैक्सीन अवायडेंस बिहेवियर से समस्या
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. प्रशांत रंजन का कहना है कि मेडिकल की भाषा में वैक्सीन अवायडेंस बिहेवियर के कारण ऐसी समस्या आती है। इसके लिए लोगों का जागरूक होना जरूरी है। अशिक्षित या कम पढ़े लिखे लोगों के साथ ये दिक्कत अधिक होती है, टीकाकरण के लिए नीयत टीके से कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता है। सभी लोगों को जागरूक होना पड़ेगा।
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चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अधीन विशेष टीकाकरण अभियान चलाए जाते हैं। दो वर्ष के बच्चों को समय-समय पर निर्धारित टीके लगाए जाते हैं। इस वर्ष कोरोना संक्रमण के कारण टीकाकरण काफी हद तक प्रभावित रहा। इसको रफ्तार पर लाने के लिए नवंबर में सभी बच्चों के टीके लगाने का विशेष अभियान चलाया गया। इस दौरान जिले के नौ ब्लॉकों समेत 10 क्षेत्रों में 1332 बच्चों के अभिभावकों ने उन्हें टीके नहीं लगवाए। इस पर जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. प्रशांत रंजन की देखरेख में टीकाकरण न कराने वाले लोगों से संपर्क किया गया तो 453 लोगों ने टीकाकरण करा लिया। इसके बाद भी 879 लोगों ने बच्चों का टीकाकरण नहीं कराया। (ब्यूरो)
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शहर मेें स्कोर सिर्फ 23.96 फीसदी
नगरीय क्षेत्र के लोग भी टीकाकरण को लेकर गंभीर नहीं हैं। शहर में ही नवंबर में 192 बच्चों के परिजनों ने टीके लगवाने से इनकार कर दिया। दोबारा इन परिवारों से संपर्क किया गया तो सिर्फ 46 लोगों ने ही टीके लगवाए। सिर्फ 23.96 फीसदी बच्चों के ही टीके लगे।
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टीकाकरण के आंकड़ों पर नजर
- अहिरोरी में 270 बच्चों के परिजनों ने पहले टीका लगवाने से किया मना। समझाने पर इनमें से 47 ने टीके लगवाए।
- बेेंहदर में 33 का इनकार। बाद में 22 ने टीके लगवाए।
- भरावन में 245 का इनकार। समझाने पर 125 माने।
- भरखनी में 74 ने मना किया। समझाने पर 32 माने।
- हरियावां में 137 ने नहीं लगवाया टीका। बाद में 26 ने टीके लगवाए।
- हरपालपुर में 58 बच्चों के परिजनों ने मना किया। समझाने पर 40 माने।
- संडीला में 28 ने इनकार किया। समझाने पर नौ लोग माने।
- टड़ियावां में 183 ने नहीं लगवाए टीके। बाद में 52 ने टीके लगवाए।
- टोडरपुर में 112 का इनकार। समझाने पर 54 ने टीके लगवाए।
वैक्सीन अवायडेंस बिहेवियर से समस्या
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. प्रशांत रंजन का कहना है कि मेडिकल की भाषा में वैक्सीन अवायडेंस बिहेवियर के कारण ऐसी समस्या आती है। इसके लिए लोगों का जागरूक होना जरूरी है। अशिक्षित या कम पढ़े लिखे लोगों के साथ ये दिक्कत अधिक होती है, टीकाकरण के लिए नीयत टीके से कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता है। सभी लोगों को जागरूक होना पड़ेगा।