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Hardoi News: इमरजेंसी से ऑपरेशन थिएटर तक उपचार के लिए मरीज लाचार
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फोटो-02- मेडिकल कॉलेज का इमरजेंसी कक्ष। संवाद
हरदोई। मेडिकल कॉलेज में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। डॉक्टरों की मनमानी कहें या फिर प्रशासनिक रार इसकी सीधी कीमत किसी और को नहीं बल्कि दूर-दराज के गांवों से भारी उम्मीदें लेकर आने वाले गरीब मरीजों और उनके परिजन को चुकानी पड़ रही है। स्थिति यह है कि इमरजेंसी से लेकर ऑपरेशन थिएटर तक की व्यवस्थाएं चरमराई हैं। अस्पताल में जीवनरक्षक उपकरण, संसाधन और विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध होने के बावजूद मरीजों को इलाज देने के बजाय टरकाने और लखनऊ रेफर करने का खेल बदस्तूर जारी है।
मेडिकल कॉलेज में गंभीर हालत में पहुंचने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों को इमरजेंसी में बेहतर इलाज मिलने की उम्मीद लगी रहती है लेकिन डॉक्टरों के बीच तालमेल की कमी और आपसी विवाद की चर्चाओं के बीच मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है। मरीजों को कभी दवा तो कभी उपकरण उपलब्ध न होने की बात कहकर रेफर करने की सलाह दी जाती है। पिछले दिनों कई मरीजों के रेफर किए जाने के मामले सामने आने के बाद इलाज पर सवाल उठने लगे हैं।
केस-1
खून चढ़ाने के लिए बना दिया रेफरल पर्चा
सांडी क्षेत्र निवासी रमाकांत को जब गंभीर हालत में परिजन मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे तो उन्हें उम्मीद थी कि तुरंत राहत मिलेगी। परिजन के पास खून की दो यूनिट पहले से उपलब्ध थीं ताकि मरीज को बिना देरी के चढ़ाया जा सके लेकिन इमरजेंसी स्टाफ ने मरीज की सुध लिए बिना पहले तो परिजन को दिन भर दौड़ाया और फिर खून चढ़ाने के बजाय सीधा लखनऊ रेफर करने का पर्चा बना दिया। हालांकि बाद में प्रशासनिक हस्तक्षेप पर इमरजेंसी में ही उन्हें खून चढ़ाया गया।
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केस-2
गले में अटका सिक्का तो भेज दिया निजी अस्पताल
दूसरा मामला टोडरपुर ब्लॉक के सैदपुर गांव का है जहां एक बच्चे के गले में सिक्का फंस जाने के बाद परिजन बदहवास हालत में बच्चे को लेकर मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी वार्ड पहुंचे। ऐसी आपातकालीन स्थिति में भी वहां उपकरण और दवाओं की कमी बताकर परिजन को निजी अस्पताल जाने की सलाह दी गई। मजबूरी में तीमारदारों को महंगे दामों पर निजी अस्पताल का रुख करना पड़ा।
केस-3
ओटी में भी किसी न किसी कमी से टल रहे ऑपरेशन
ऑपरेशन थिएटर में भी मरीजों के ऑपरेशन बड़े मुश्किल से हो पा रहे हैं। बृहस्पतिवार को बघौली निवासी एक मरीज को ऑपरेशन के लिए कई घंटों तक ओटी के बाहर बिठाकर रखा गया। यह तर्क दिया गया कि बीपी मशीन का पफ दुरुस्त नहीं है। जब मामला प्रशासनिक हस्तक्षेप तक पहुंचा तब जाकर कहीं मरीज का ऑपरेशन हो सका। तीमारदारों का आरोप है कि कभी एनेस्थेटिस्ट की अनुपलब्धता तो कभी उपकरणों की मामूली खराबी का बहाना बनाकर एन वक्त पर ऑपरेशन टाल दिए जाते हैं।
मेडिकल कॉलेज में दवाओं और उपकरणों की कोई कमी नहीं है। इमरजेंसी और ऑपरेशन थिएटर से जुड़ी इन शिकायतों को गंभीरता से लिया गया है। संबंधित स्तर पर विस्तृत जांच कराई जा रही है। डॉक्टर या स्वास्थ्यकर्मी के स्तर पर लापरवाही पर कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. जेबी गोगोई, प्रधानाचार्य
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मेडिकल कॉलेज में गंभीर हालत में पहुंचने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों को इमरजेंसी में बेहतर इलाज मिलने की उम्मीद लगी रहती है लेकिन डॉक्टरों के बीच तालमेल की कमी और आपसी विवाद की चर्चाओं के बीच मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है। मरीजों को कभी दवा तो कभी उपकरण उपलब्ध न होने की बात कहकर रेफर करने की सलाह दी जाती है। पिछले दिनों कई मरीजों के रेफर किए जाने के मामले सामने आने के बाद इलाज पर सवाल उठने लगे हैं।
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केस-1
खून चढ़ाने के लिए बना दिया रेफरल पर्चा
सांडी क्षेत्र निवासी रमाकांत को जब गंभीर हालत में परिजन मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे तो उन्हें उम्मीद थी कि तुरंत राहत मिलेगी। परिजन के पास खून की दो यूनिट पहले से उपलब्ध थीं ताकि मरीज को बिना देरी के चढ़ाया जा सके लेकिन इमरजेंसी स्टाफ ने मरीज की सुध लिए बिना पहले तो परिजन को दिन भर दौड़ाया और फिर खून चढ़ाने के बजाय सीधा लखनऊ रेफर करने का पर्चा बना दिया। हालांकि बाद में प्रशासनिक हस्तक्षेप पर इमरजेंसी में ही उन्हें खून चढ़ाया गया।
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केस-2
गले में अटका सिक्का तो भेज दिया निजी अस्पताल
दूसरा मामला टोडरपुर ब्लॉक के सैदपुर गांव का है जहां एक बच्चे के गले में सिक्का फंस जाने के बाद परिजन बदहवास हालत में बच्चे को लेकर मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी वार्ड पहुंचे। ऐसी आपातकालीन स्थिति में भी वहां उपकरण और दवाओं की कमी बताकर परिजन को निजी अस्पताल जाने की सलाह दी गई। मजबूरी में तीमारदारों को महंगे दामों पर निजी अस्पताल का रुख करना पड़ा।
केस-3
ओटी में भी किसी न किसी कमी से टल रहे ऑपरेशन
ऑपरेशन थिएटर में भी मरीजों के ऑपरेशन बड़े मुश्किल से हो पा रहे हैं। बृहस्पतिवार को बघौली निवासी एक मरीज को ऑपरेशन के लिए कई घंटों तक ओटी के बाहर बिठाकर रखा गया। यह तर्क दिया गया कि बीपी मशीन का पफ दुरुस्त नहीं है। जब मामला प्रशासनिक हस्तक्षेप तक पहुंचा तब जाकर कहीं मरीज का ऑपरेशन हो सका। तीमारदारों का आरोप है कि कभी एनेस्थेटिस्ट की अनुपलब्धता तो कभी उपकरणों की मामूली खराबी का बहाना बनाकर एन वक्त पर ऑपरेशन टाल दिए जाते हैं।
मेडिकल कॉलेज में दवाओं और उपकरणों की कोई कमी नहीं है। इमरजेंसी और ऑपरेशन थिएटर से जुड़ी इन शिकायतों को गंभीरता से लिया गया है। संबंधित स्तर पर विस्तृत जांच कराई जा रही है। डॉक्टर या स्वास्थ्यकर्मी के स्तर पर लापरवाही पर कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. जेबी गोगोई, प्रधानाचार्य