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अभिभावकों को नहीं पता, चालक कौन

Sat, 12 Mar 2022 10:59 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 12 Mar 2022 10:59 PM IST
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Parents do not know who is the driver
हरदोई। ऑटो वाले अंकल, ड्राइवर अंकल और रिक्शे वाले चाचा..। मासूम स्कूली बच्चों के मुंह से अपनों की तरह पुकारे जाने वाले इन नामों को बच्चों के मां-बाप जानते ही नहीं। खास बात यह है कि अभिभावक इनके बारे में जानकारी जुटाने का प्रयास भी नहीं करते।
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खुद मां-बाप कलेजे के टुकड़ों को इन अनजानों के हाथ सौंप रहे हैं। यह कौन हैं, इनकी पहचान क्या है, कहां रहते हैं, इसका कोई रिकार्ड न तो अभिभावकों के पास है और न ही स्कूलों ने इनकी लिखा-पढ़ी अपने पास रखी है।
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स्कूल जाने और ले जाने की व्यवस्था में शहर में करीब 240 रिक्शे संचालित हैं। इनमें सुरक्षा के कोई मानक नहीं हैं। न तो वह बच्चों के बैठने की सुरक्षित व्यवस्था उपलब्ध कराते हैं और न ही ऑटो की क्षमता के अनुसार बच्चों को बैठाया जाता है।
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एक ऑटो पर आठ से नौ बच्चों तक को एक बार में बैठाकर स्कूल तक ले जाने का जोखिम हर रोज उठाया जा रहा है।
खास बात यह है कि अभिभावक खुद पैसों की बचत या अपना समय बचाने के लिए इन अनजान ऑटो ड्राइवरों के हवाले बच्चों कर देते हैं।
स्कूल संचालकों का कहना है कि ऑटो से बच्चों को अभिभावक स्वयं की व्यवस्था पर स्कूल भेजते हैं। वह बच्चों को लाने-जाने के लिए ऑटो का प्रयोग नहीं करते।
रोजाना 200 से ज्यादा बच्चे करते ऑटो से यात्रा
ऑटो और बैटरी रिक्शे से हर रोज शहर में 200 से ज्यादा बच्चे स्कूल आते-जाते हैं। इसके लिए 24 ऑटो और ई-रिक्शे सेवाएं दे रहे हैं। एक ऑटो पर औसतन आठ से नौ बच्चों को बैठाकर स्कूल लाया और घर छोड़ा जाता है।

कई बार ऑटो ड्राइवर दो बच्चों को अपनी बगल वाली एक सीट पर सटाकर बैठा लेते हैं। इससे कई बार धक्का लगने से बच्चे चलते ऑटो से गिर भी चुके हैं।
स्कूली बच्चों को लाने और ले जाने की व्यवस्था में ऑटो और ई-रिक्शा का प्रयोग सुरक्षा की दृष्टि से सही नहीं है। आपके द्वारा मामला संज्ञान में आया है। इनकी रोकथाम के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम किया जाएगा।
- राजेश द्विवेदी, पुलिस अधीक्षक
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