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Hardoi News: तार्किक विसंगति वाले तीन लाख से अधिक लोगों को मताधिकार की आस
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हरदाेई। विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची से बाहर किए गए तीन लाख से अधिक मतदाताओं को मताधिकार मिलने की उम्मीद है।
विधानसभावार फोटोयुक्त मतदाता सूची के विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान में इन मतदाताओं के विवरण में तार्किक विसंगति मिलने पर नाम सूची से बाहर कर दिए गए हैं। आयोग ने नो मैपिंग वाले 2,26,742 लोगों के साथ ही अब तार्किक विसंगति वाले करीब 3,59,005 मतदाताओं को भी सुनवाई और साक्ष्य देने का मौका दिया है।
आयोग ने एसआईआर अभियान में नोटिस और सुनवाई की समयसीमा बढ़ाने के साथ तार्किक विसंगति वाले मतदाताओं को नोटिस देकर उनकी बात सुनने और साक्ष्य को समझने की व्यवस्था दी है। बताया कि अक्तूबर 2025 तक जिले के आठ विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र में 30,19,415 मतदाता शामिल थे। अभियान में यह संख्या 24,74,733 रह गई। साल-2003 की मतदाता सूची में खुद के नाम, माता-पिता, दादी-दादा के नाम का ब्योरा न दे पाने और नाम व पिता-पति के नाम में अंतर के कारण करीब 5.85 लाख नाम सूची से बाहर हो गए थे। आयोग ने नो मैपिंग की श्रेणी में आए 2,26,742 लोगों को नोटिस और सुनवाई के लिए छह जनवरी से प्रक्रिया शुरू कराई अब इसकी समयसीमा एक माह के लिए और बढ़ाकर छह मार्च तक कर दी ग ई है।
बताया कि नो मैपिंग के साथ ही तार्किक विसंगति वाले 3,59,005 मतदाताओं को भी नोटिस दिए जाने की प्रकिया शुरू करा दी गई है। सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों की तरफ से बूथ लेवल ऑफिसर के माध्यम से संबंधित को नोटिस तामील कराए जा रहे हैं। इस पर एक सप्ताह के अंतराल पर सुनवाई भी की जा रही है।
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एसआईआर अभियान में नोटिस पर सुनवाई के लिए भारत निर्वाचन आयोग ने एक माह की अवधि बढ़ा दी है। वहीं, नो मैपिंग वाले मतदाताओं के साथ ही तार्किक विसंगति वाले मतदाताओं को भी नोटिस दिए जा रहे हैं। नोटिस पर सुनवाई भी की जा रही है। सुनवाई के दौरान मतदाताओं को तार्किक विसंगति के समाधान के लिए सही और मजबूत साक्ष्य समय से प्रस्तुत किए जाने के लिए समय भी मिल गया है। ऐसे में मतदाताओं को समय से साक्ष्य और नोटिस का जवाब उपलब्ध कराना चाहिए ताकि उनकी जांच-पड़ताल कर सूची में उनके नाम आदि विवरण की तार्किक विसंगति को दूर किया जा सके। -अनुनय झा, जिला निर्वाचन अधिकारी
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विधानसभावार फोटोयुक्त मतदाता सूची के विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान में इन मतदाताओं के विवरण में तार्किक विसंगति मिलने पर नाम सूची से बाहर कर दिए गए हैं। आयोग ने नो मैपिंग वाले 2,26,742 लोगों के साथ ही अब तार्किक विसंगति वाले करीब 3,59,005 मतदाताओं को भी सुनवाई और साक्ष्य देने का मौका दिया है।
आयोग ने एसआईआर अभियान में नोटिस और सुनवाई की समयसीमा बढ़ाने के साथ तार्किक विसंगति वाले मतदाताओं को नोटिस देकर उनकी बात सुनने और साक्ष्य को समझने की व्यवस्था दी है। बताया कि अक्तूबर 2025 तक जिले के आठ विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र में 30,19,415 मतदाता शामिल थे। अभियान में यह संख्या 24,74,733 रह गई। साल-2003 की मतदाता सूची में खुद के नाम, माता-पिता, दादी-दादा के नाम का ब्योरा न दे पाने और नाम व पिता-पति के नाम में अंतर के कारण करीब 5.85 लाख नाम सूची से बाहर हो गए थे। आयोग ने नो मैपिंग की श्रेणी में आए 2,26,742 लोगों को नोटिस और सुनवाई के लिए छह जनवरी से प्रक्रिया शुरू कराई अब इसकी समयसीमा एक माह के लिए और बढ़ाकर छह मार्च तक कर दी ग ई है।
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बताया कि नो मैपिंग के साथ ही तार्किक विसंगति वाले 3,59,005 मतदाताओं को भी नोटिस दिए जाने की प्रकिया शुरू करा दी गई है। सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों की तरफ से बूथ लेवल ऑफिसर के माध्यम से संबंधित को नोटिस तामील कराए जा रहे हैं। इस पर एक सप्ताह के अंतराल पर सुनवाई भी की जा रही है।
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एसआईआर अभियान में नोटिस पर सुनवाई के लिए भारत निर्वाचन आयोग ने एक माह की अवधि बढ़ा दी है। वहीं, नो मैपिंग वाले मतदाताओं के साथ ही तार्किक विसंगति वाले मतदाताओं को भी नोटिस दिए जा रहे हैं। नोटिस पर सुनवाई भी की जा रही है। सुनवाई के दौरान मतदाताओं को तार्किक विसंगति के समाधान के लिए सही और मजबूत साक्ष्य समय से प्रस्तुत किए जाने के लिए समय भी मिल गया है। ऐसे में मतदाताओं को समय से साक्ष्य और नोटिस का जवाब उपलब्ध कराना चाहिए ताकि उनकी जांच-पड़ताल कर सूची में उनके नाम आदि विवरण की तार्किक विसंगति को दूर किया जा सके। -अनुनय झा, जिला निर्वाचन अधिकारी