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Hardoi News: हत्या में आरोपी का नाम हटाने पर विवेचक पर कार्रवाई के आदेश
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- सीजेएम ने तत्कालीन सांडी और मौजूदा लोनार प्रभारी निरीक्षक राकेश यादव के खिलाफ दिए आदेशसंवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। सांडी थाना क्षेत्र में एक साल पहले भूमि विवाद में हुई हत्या में नामजद शख्स का नाम आरोप पत्र से निकाले जाने पर कोर्ट ने सख्त रुख दिखाया है। सीजएम रिचा वर्मा ने बिना किसी ठोस सबूत के आरोपी का नाम बाहर किए जाने पर लोनार कोतवाल के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के निर्देश देते हुए डीजीपी को भी पत्र भेजने के लिए कहा है। साथ ही संबंधित शख्स काे न्यायालय में भी तलब कर लिया है।
सांडी थाना क्षेत्र के लाहौरीपुरवा निवासी वीरेंद्र ने 11 जुलाई 2025 को प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि 10 जुलाई 2025 की शाम उनका भाई नरेंद्र मंगला देवी मंदिर से साइकिल से घर जा रहा था। रास्ते में चचेरे भाई शिशुपाल ने भूमि विवाद में उसे गाली गलौज की थी। विरोध करने पर शिशुपाल ने बेटे पंकज और अंकित व गांव के सचिन के साथ मिलकर नरेंद्र पर हमला कर दिया था। शिशुपाल ने नरेंद्र के पेट में भाला मार दिया था। सीएचसी में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया था। पुलिस ने शिकायत के आधार पर चारों आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। सांडी के तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक राकेश यादव ने विवेचना की थी। उन्होेंने शिशुपाल, पंकज और अंकित के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था, जबकि विपिन कुमार का नाम बाहर कर दिया था। गत वर्ष 16 अक्तूबर को हुई सुनवाई में वादी समेत गवाहों ने प्राथमिकी का समर्थन किया था और विपिन की संलिप्तता भी बताई थी। विवेचक ने बयानों को नजरअंदाज कर दिया। केस डायरी में सीसीटीवी फुटेज और सीडीआर का हवाला दिया, लेकिन न्यायालय में कोई ठोस तथ्य पेश नहीं कर पाए। अभियोजन अधिकारी ने भी इस पर आपत्ति दर्ज कर लापरवाही की बात कही थी। सीजेएम ने इस मामले में विपिन कुमार को दोबारा तलब करने के साथ ही राकेश यादव के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए पुलिस अधीक्षक को निर्देशित किया है और सात दिन के अंदर इसकी आख्या भी मांगी है।
इनसेट
न्यायालय को गुमराह करने जैसा, न्याय की आधारशिला को किया क्षतिग्रस्त
पूरे मामले पर सीजेएम रिचा वर्मा ने कठोर टिप्पणी की है। पूरी विवेचना को संदिग्ध करार देते हुए कहा कि उच्चतम और उच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन नहीं किया। विवेचक ने विधिक प्रक्रिया को औपचारिकता बनाकर रख दिया, जो न्यायालय को गुमराह करने जैसा है। सीजेएम ने टिप्पणी करते हुए लिखा है कि राकेश कुमार यादव ने न सिर्फ अविधिक पूर्ण विवेचना की है, बल्कि न्याय की आधार शिला को भी क्षतिग्रस्त किया है। साथ ही पदीय उद्दंडता भी की है।
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हरदोई। सांडी थाना क्षेत्र में एक साल पहले भूमि विवाद में हुई हत्या में नामजद शख्स का नाम आरोप पत्र से निकाले जाने पर कोर्ट ने सख्त रुख दिखाया है। सीजएम रिचा वर्मा ने बिना किसी ठोस सबूत के आरोपी का नाम बाहर किए जाने पर लोनार कोतवाल के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के निर्देश देते हुए डीजीपी को भी पत्र भेजने के लिए कहा है। साथ ही संबंधित शख्स काे न्यायालय में भी तलब कर लिया है।
सांडी थाना क्षेत्र के लाहौरीपुरवा निवासी वीरेंद्र ने 11 जुलाई 2025 को प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि 10 जुलाई 2025 की शाम उनका भाई नरेंद्र मंगला देवी मंदिर से साइकिल से घर जा रहा था। रास्ते में चचेरे भाई शिशुपाल ने भूमि विवाद में उसे गाली गलौज की थी। विरोध करने पर शिशुपाल ने बेटे पंकज और अंकित व गांव के सचिन के साथ मिलकर नरेंद्र पर हमला कर दिया था। शिशुपाल ने नरेंद्र के पेट में भाला मार दिया था। सीएचसी में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया था। पुलिस ने शिकायत के आधार पर चारों आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। सांडी के तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक राकेश यादव ने विवेचना की थी। उन्होेंने शिशुपाल, पंकज और अंकित के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था, जबकि विपिन कुमार का नाम बाहर कर दिया था। गत वर्ष 16 अक्तूबर को हुई सुनवाई में वादी समेत गवाहों ने प्राथमिकी का समर्थन किया था और विपिन की संलिप्तता भी बताई थी। विवेचक ने बयानों को नजरअंदाज कर दिया। केस डायरी में सीसीटीवी फुटेज और सीडीआर का हवाला दिया, लेकिन न्यायालय में कोई ठोस तथ्य पेश नहीं कर पाए। अभियोजन अधिकारी ने भी इस पर आपत्ति दर्ज कर लापरवाही की बात कही थी। सीजेएम ने इस मामले में विपिन कुमार को दोबारा तलब करने के साथ ही राकेश यादव के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए पुलिस अधीक्षक को निर्देशित किया है और सात दिन के अंदर इसकी आख्या भी मांगी है।
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न्यायालय को गुमराह करने जैसा, न्याय की आधारशिला को किया क्षतिग्रस्त
पूरे मामले पर सीजेएम रिचा वर्मा ने कठोर टिप्पणी की है। पूरी विवेचना को संदिग्ध करार देते हुए कहा कि उच्चतम और उच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन नहीं किया। विवेचक ने विधिक प्रक्रिया को औपचारिकता बनाकर रख दिया, जो न्यायालय को गुमराह करने जैसा है। सीजेएम ने टिप्पणी करते हुए लिखा है कि राकेश कुमार यादव ने न सिर्फ अविधिक पूर्ण विवेचना की है, बल्कि न्याय की आधार शिला को भी क्षतिग्रस्त किया है। साथ ही पदीय उद्दंडता भी की है।
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