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Hardoi News: मेडिकल कॉलेज और प्राइवेट अस्पतालों में ठप रही ओपीडी, भटकते रहे मरीज

Sat, 17 Aug 2024 11:19 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 17 Aug 2024 11:19 PM IST
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OPD stalled in medical colleges and private hospitals, patients kept wandering
हरदोई। कलकत्ता कांड के विरोध में चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों में गुस्सा बढ़ता जा रहा है। शनिवार को न सिर्फ मेडिकल कॉलेज बल्कि प्राइवेट अस्पतालों में भी ओपीडी बिल्कुल ठप रही।
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दूर-दूर से इलाज कराने आए मरीजों को हड़ताल के कारण वापस जाना पड़ा। गनीमत रही कि आकस्मिक चिकित्सा कक्ष की सेवाएं मानवीयता दिखाते हुए चिकित्सकों ने चालू रखीं। मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों ने पैदल मार्च भी निकाला। एक ज्ञापन भी नगर मजिस्ट्रेट को सौंपा।
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कलकत्ता में महिला डॉक्टर के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या किए जाने के बाद डॉक्टर अपनी सुरक्षा को लेकर खासे गंभीर हैं। जघन्य कांड के विरोध में चिकित्सक और स्वास्थ्य कर्मी लामबंद हैं। शनिवार को लगातार दूसरे दिन भी मेडिकल कॉलेज की ओपीडी बंद रही। ओपीडी बंद रहने के कारण काउंटरों पर सन्नाटा नजर आया। हालांकि, बड़ी संख्या में मरीज और उनके तीमारदार ओपीडी में चिकित्सक से परामर्श और इलाज के लिए पहुंचे थे, लेकिन इन सभी को निराश होना पड़ा।
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मेडिकल कॉलेज परिसर में स्वास्थ्य कर्मियों ने कलकत्ता कांड के विरोध में पोस्टर बनाए और फिर इन पोस्टरों को हाथ में लेकर शहर में पैदल मार्च निकालते हुए कलक्ट्रेट पहुंचे। कलक्ट्रेट में नगर मजिस्ट्रेट एसके त्रिवेदी को ज्ञापन सौंपकर कलकत्ता कांड की निंदा की। आरोपियों पर सख्त कार्रवाई किए जाने के साथ ही चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा को लेकर भी वृहद योजना बनाने की मांग की है।

मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में हर रोज औसतन 2,200 नए पर्चे बनते हैं। इससे इतर पुराने पर्चे लेकर भी बड़ी संख्या में मरीज ओपीडी में आते हैं। शुक्रवार और शनिवार को ओपीडी का एक भी पर्चा नहीं बना। इतना ही नहीं मेडिकल कॉलेज में तीन सर्जन हैं। तीनों सर्जन एक दिन में औसतन 20 ऑपरेशन करते हैं। शुक्रवार और शनिवार को एक भी ऑपरेशन नहीं हुआ।
जिन मरीजों को ऑपरेशन की तारीख दी गई थी उन्हें कुछ दिन बाद नई तारीख देने की बात चर्चा में रही। इसी तरह मेडिकल कॉलेज की लैब में हर रोज 300 से 350 तक रक्त नमूने विभिन्न जांचों के लिए आते थे। शनिवार को सिर्फ 16 नमूने लैब पहुंचे। यह भी उन मरीजों के थे जो मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती हैं। ओपीडी के दिनों में औसतन हर रोज 60 से 70 सीटी स्कैन भी चिकित्सकों की सलाह पर किए जाते हैं। शनिवार को सिर्फ पांच सीटी स्कैन हुए। यह लोग भी मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती हैं।

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की ओर से शनिवार सुबह छह बजे से ओपीडी ठप रखे जाने का निर्णय लिया गया था। इस निर्णय के क्रम में जनपद के ज्यादातर प्राइवेट अस्पतालों में ओपीडी सेवाएं ठप रहीं। हालांकि, आकस्मिक सेवाएं चालू रहने से गंभीर मरीजों को इलाज मिलता रहा। शनिवार सुबह नौ बजे आईएमए के बैनर तले चिकित्सक घंटाघर में एकत्र हुए और शांति मार्च निकाला।
शांति मार्च नुमाइश चौराहे से बड़ा चौराहा होते हुए कलक्ट्रेट परिसर पहुंचा। यहां डीएम को संबोधित ज्ञापन नगर मजिस्ट्रेट एसके त्रिवेदी को सौंपा गया। इस दौरान आईएमए के अध्यक्ष डॉ. अजय अस्थाना, सचिव डॉ. संदीप कटियार, डॉ. अरुण मौर्य, डॉ. सीपी कटियार, डॉ. अमरजीत सिंह अजमानी, डॉ. नवीन सक्सेना, डॉ. धीरज वर्मा, डॉ. शिवानी मिश्रा आदि शामिल रहीं।


मेडिकल कॉलेज में पैरामेडिकल स्टॉफ और चिकित्सकों ने पोस्टर भी बनाए। इनमें एक पोस्टर पर लिखा था बेटी पढ़ी तो पर बची नहीं...। इसकी चर्चा खूब रही। साथ ही सुरक्षा नहीं तो सेवा नहीं, न्याय में देरी, न्याय से इन्कार। जान बचाने वाले हाथ कौन बचाएगा आदि स्लोगन पोस्टर पर लिखे नजर आए।
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