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Hardoi News: कछौना क्षेत्र पंचायत में कार्यों और भुगतान में एक कराेड़ से की गड़बड़ी
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हरदोई। क्षेत्र पंचायतों की ओर से कराए जाने वाले कार्यों और भुगतान में एक करोड़ से अधिक की गड़बड़ी सामने आई है। यह काम वर्ष 2020-21 और 2021-22 में कराए गए थे। इसमें 27 लाख से अधिक का भुगतान श्रमिकों के खातों में न देकर कार्य प्रभारियों को किया गया है। ऐसे ही अन्य गड़बड़ियां सामने आई हैं।
क्षेत्र पंचायत की ओर से गांवों में विकास और अन्य कार्य कराने के साथ ही सामग्री की खरीदारी भी की जाती है। काम पर लगाए जाने वाले श्रमिकों को मजदूरी का भुगतान उनके खातों में किए जाने की व्यवस्था है। इसी के साथ राज्य वित्त आयोग, केंद्रीय वित्त आयोग और मनरेगा मद से कराए जाने वाले कार्यों का ऑडिट भी कराया जाता है।
विकास खंड कछौना में क्षेत्र पंचायत की ओर किए गए वर्ष 2020-21 और वर्ष 2021-22 में कुल 137 कार्य कराए गए। ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि वर्ष 2020-21 में 56 कार्यों पर लगाए श्रमिकों को उनके खातों में मजदूरी न देकर 37,66,245 रुपये का भुगतान जिम्मेदारों ने कार्यप्रभारी राजेंद्र नाथ पांडेय और शेर सिंह को किया है। ऐसे ही वर्ष 2021-22 में भी मजदूरी के 3,49,965 रुपये के भुगतान के पीएफएमएस भुगतान के प्रमाण-पत्र नहीं मिले हैं। इसके लिए तत्कालीन ब्लॉक प्रमुख सहित दो बीडीओ और लेखाकार को जिम्मेदार बताया गया है। ऐसे ही वर्ष 2022-2023 में 72,91,830 रुपये की अनियमितता मिली है। इसमें निविदा प्रक्रिया का पालन न करते हुए फर्मों को अंतिम बिल से भुगतान के समय पांच प्रतिशत की कटौती नहीं की गई है। इसमें 69,73,725 रुपये और लेबर सेस की कटौती न किए जाने से 73,858 रुपये की क्षति पहुंचाई गई है।
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ज्येष्ठ लेखा परीक्षक महेश कुमार की ओर से दी गई रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि क्षेत्र पंचायत कछौना वर्ष 2020-21 में 57 कार्य कराए गए हैं। इन कार्यों के लिए निविदा प्रपत्र मूल्य 500 रुपये तय था। एक कार्य के लिए कम से कम तीन प्रपत्र की बिक्री के आधार पर इससे 85,500 रुपये हुए, जबकि निविदा प्रपत्र मूल्य में 9,000 रुपये ही जमा किए गए हैं। इस प्रकार से 76,500 रुपये का गबन किया गया है। ऐसे ही वर्ष 2021-22 में 80 कार्य कराए गए हैं। इन कार्यों के निविदा प्रपत्र बिक्री से 1,20,000 रुपये प्राप्त हुए जो, जमा ही नहीं किए गए हैं। यह रुपये गबन किए गए हैं और इसकी वसूली भी तत्कालीन दो बीडीओ और लेखाकार से किए जाने की संस्तुति की गई है।
ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया कि वर्ष 2020-21 के 56 कार्यों और वर्ष 2021-22 में 80 कार्यों के लिए सामग्री की खरीदारी कई फर्मों से की गई है। इन फर्मों को सामग्री खरीदारी के सापेक्ष किए गए भुगतान में दो प्रतिशत की जीएसटी कटौती नहीं की गई है। फर्म को पूरा भुगतान करते हुए वर्ष 2020-21 में 4,42,333 रुपये और वर्ष 2021-22 में 33,88,588 रुपये की शासकीय क्षति पहुंचाई गई है। ऐसे ही वर्ष 2022-2023 में 2,44,247 रुपये की क्षति पहुंचाई गई है।
क्षेत्र पंचायत कछौना में वर्ष 2020-21 से 2022-23 में कराए गए कार्यों और भुगतान में गड़बड़ी की जानकारी अमर उजाला के माध्यम से हुई है। प्रथम दृष्टया मामला गंभीर है। ऑडिट रिपोर्ट के साथ ही पूरे मामले की समिति से जांच कराई जाएगी। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। वसूली की भी प्रक्रिया अपनाई जाएगी। -मंगला प्रसाद सिंह, जिलाधिकारी
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क्षेत्र पंचायत की ओर से गांवों में विकास और अन्य कार्य कराने के साथ ही सामग्री की खरीदारी भी की जाती है। काम पर लगाए जाने वाले श्रमिकों को मजदूरी का भुगतान उनके खातों में किए जाने की व्यवस्था है। इसी के साथ राज्य वित्त आयोग, केंद्रीय वित्त आयोग और मनरेगा मद से कराए जाने वाले कार्यों का ऑडिट भी कराया जाता है।
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विकास खंड कछौना में क्षेत्र पंचायत की ओर किए गए वर्ष 2020-21 और वर्ष 2021-22 में कुल 137 कार्य कराए गए। ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि वर्ष 2020-21 में 56 कार्यों पर लगाए श्रमिकों को उनके खातों में मजदूरी न देकर 37,66,245 रुपये का भुगतान जिम्मेदारों ने कार्यप्रभारी राजेंद्र नाथ पांडेय और शेर सिंह को किया है। ऐसे ही वर्ष 2021-22 में भी मजदूरी के 3,49,965 रुपये के भुगतान के पीएफएमएस भुगतान के प्रमाण-पत्र नहीं मिले हैं। इसके लिए तत्कालीन ब्लॉक प्रमुख सहित दो बीडीओ और लेखाकार को जिम्मेदार बताया गया है। ऐसे ही वर्ष 2022-2023 में 72,91,830 रुपये की अनियमितता मिली है। इसमें निविदा प्रक्रिया का पालन न करते हुए फर्मों को अंतिम बिल से भुगतान के समय पांच प्रतिशत की कटौती नहीं की गई है। इसमें 69,73,725 रुपये और लेबर सेस की कटौती न किए जाने से 73,858 रुपये की क्षति पहुंचाई गई है।
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ज्येष्ठ लेखा परीक्षक महेश कुमार की ओर से दी गई रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि क्षेत्र पंचायत कछौना वर्ष 2020-21 में 57 कार्य कराए गए हैं। इन कार्यों के लिए निविदा प्रपत्र मूल्य 500 रुपये तय था। एक कार्य के लिए कम से कम तीन प्रपत्र की बिक्री के आधार पर इससे 85,500 रुपये हुए, जबकि निविदा प्रपत्र मूल्य में 9,000 रुपये ही जमा किए गए हैं। इस प्रकार से 76,500 रुपये का गबन किया गया है। ऐसे ही वर्ष 2021-22 में 80 कार्य कराए गए हैं। इन कार्यों के निविदा प्रपत्र बिक्री से 1,20,000 रुपये प्राप्त हुए जो, जमा ही नहीं किए गए हैं। यह रुपये गबन किए गए हैं और इसकी वसूली भी तत्कालीन दो बीडीओ और लेखाकार से किए जाने की संस्तुति की गई है।
ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया कि वर्ष 2020-21 के 56 कार्यों और वर्ष 2021-22 में 80 कार्यों के लिए सामग्री की खरीदारी कई फर्मों से की गई है। इन फर्मों को सामग्री खरीदारी के सापेक्ष किए गए भुगतान में दो प्रतिशत की जीएसटी कटौती नहीं की गई है। फर्म को पूरा भुगतान करते हुए वर्ष 2020-21 में 4,42,333 रुपये और वर्ष 2021-22 में 33,88,588 रुपये की शासकीय क्षति पहुंचाई गई है। ऐसे ही वर्ष 2022-2023 में 2,44,247 रुपये की क्षति पहुंचाई गई है।
क्षेत्र पंचायत कछौना में वर्ष 2020-21 से 2022-23 में कराए गए कार्यों और भुगतान में गड़बड़ी की जानकारी अमर उजाला के माध्यम से हुई है। प्रथम दृष्टया मामला गंभीर है। ऑडिट रिपोर्ट के साथ ही पूरे मामले की समिति से जांच कराई जाएगी। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। वसूली की भी प्रक्रिया अपनाई जाएगी। -मंगला प्रसाद सिंह, जिलाधिकारी