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लाडले की वीरता पर गर्व और आंसू: बेटा खोने की हर दिल में रही कसक, श्रद्धांजलि देने के लिए उमड़ी भीड़
Sun, 25 Jul 2021 09:12 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरदोई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरदोई
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sun, 25 Jul 2021 09:12 PM IST
सार
असम के लेखापानी में शनिवार की सुबह गार्ड ऑफ ऑनर देकर उनका अंतिम संस्कार कराया गया।
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शहीद को दी श्रद्धांजलि
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हरदोई जिले के लाडले की वीरता पर जहां हर शख्स ने अपने आप को गौरवांवित महसूस किया, वहीं अपना बेटा खोने के बाद पूरा जनपद सिसक-सिसक कर रोया भी है। अरुणाचल प्रदेश में साथी को बचाने में जान गंवाने वाले शहीद पंकज पांडे के आवास पर रविवार को श्रद्धांजलि सभा हुई।
बी सिक्ख रेजीमेंट के अफसर, जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारियों के साथ जनमानस के नमन करने का क्रम देर शाम तक जारी रहा। गुरुवार की शाम सीतापुर बाईपास के निकट निवासी व्यापारी अवधेश पांडे के बड़े बेटे मेजर पंकज कुमार पांडे का इलाज दौरान गुवाहाटी हास्पिटल में निधन हो गया था।
वे अपनी यूनिट के ही साथी को खाई में गिरने से बचाने के लिए स्वयं उसके साथ खाई में गिरे और गंभीर रूप से घायल हो गए थे। असम के लेखापानी में शनिवार की सुबह गार्ड ऑफ ऑनर देकर उनका अंतिम संस्कार कराया गया।
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रविवार को उनके आवास पर श्रद्धांजलि सभा हुई। इसमें बी सिक्ख रेजीमेंट के ही कर्नल के मदार व लेफ्टीनेंट विवेक सब्बरवाल ने शोक संवेदना व्यक्त की। सवायजपुर विधायक माधवेंद्र प्रताप सिंह, गोपामऊ विधायक श्याम प्रकाश के अलावा जिलाधिकारी अविनाश कुमार, पुलिस अधीक्षक अजय कुमार, एडीएम संजय कुमार सिंह, सैनिक कल्याण अधिकारी कर्नल ओपी शुक्ला ने भी परिवार को सांत्वना दीं। इस मौके पर भाजपा जिलाध्यक्ष सौरभ मिश्रा, नगर पालिका चेयरमैन सुख सागर मिश्रा, सुशील चंद्र त्रिवेदी, कमलेश पाठक, राजीव रंजन मिश्रा, अरुणेश बाजपेई, पारुल दीक्षित आदि मौजूद रहे।
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बी सिक्ख रेजीमेंट के अफसर, जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारियों के साथ जनमानस के नमन करने का क्रम देर शाम तक जारी रहा। गुरुवार की शाम सीतापुर बाईपास के निकट निवासी व्यापारी अवधेश पांडे के बड़े बेटे मेजर पंकज कुमार पांडे का इलाज दौरान गुवाहाटी हास्पिटल में निधन हो गया था।
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वे अपनी यूनिट के ही साथी को खाई में गिरने से बचाने के लिए स्वयं उसके साथ खाई में गिरे और गंभीर रूप से घायल हो गए थे। असम के लेखापानी में शनिवार की सुबह गार्ड ऑफ ऑनर देकर उनका अंतिम संस्कार कराया गया।
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रविवार को उनके आवास पर श्रद्धांजलि सभा हुई। इसमें बी सिक्ख रेजीमेंट के ही कर्नल के मदार व लेफ्टीनेंट विवेक सब्बरवाल ने शोक संवेदना व्यक्त की। सवायजपुर विधायक माधवेंद्र प्रताप सिंह, गोपामऊ विधायक श्याम प्रकाश के अलावा जिलाधिकारी अविनाश कुमार, पुलिस अधीक्षक अजय कुमार, एडीएम संजय कुमार सिंह, सैनिक कल्याण अधिकारी कर्नल ओपी शुक्ला ने भी परिवार को सांत्वना दीं। इस मौके पर भाजपा जिलाध्यक्ष सौरभ मिश्रा, नगर पालिका चेयरमैन सुख सागर मिश्रा, सुशील चंद्र त्रिवेदी, कमलेश पाठक, राजीव रंजन मिश्रा, अरुणेश बाजपेई, पारुल दीक्षित आदि मौजूद रहे।
शहीद मेजर पंकज के नाम होगी जिले की एक सड़क
हरदोई जिले के शहीद मेजर पंकज कुमार पांडे के नाम जिले की एक सड़क होगी और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी भी दिलाई जाएगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से रविवार दोपहर बाद शोक संवेदना व्यक्त हुए उक्त घोषणाओं का पत्र जारी कर दिया गया। जारी पत्र में मुख्यमंत्री ने शहीद के परिजनों को 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की एवं शहीद के नाम जिले की एक सड़क का नामकरण करने की भी घोषणा की।
देर शाम सदर विधायक नितिन अग्रवाल ने सौंपा चेक
सदर विधायक नितिन अग्रवाल ने शहीद मेजर पंकज पांडे के आवास पर पहुंचकर परिजनों को सांत्वना दी और शोक संवेदना व्यक्त की। इसके बाद मुख्यमंत्री द्वारा घोषित 50 लाख राशि का चेक पिता अवधेश पांडे को सौंपा।
मेजर साहब ने बोला था, मेरे घर होके आना...
पीलीभीत के पूरनपुर से आए हवलदार दलजीत सिंह व हरजीत सिंह ने भी रविवार को शहीद मेजर के चित्र पर श्रद्धासुमन अर्पित किए। रूंधे गले से कहा कि मेजर साहब ऐसे घर बुलाएंगे पता नहीं था। उन्होंने बताया कि वे दोनों उन्हीं की टुकड़ी में हैं। जब छुट्टी पर वे आए थे तो मेजर साहब ने कहा कि जब वापस आना तो मेरे घर होते आना, कुछ मंगाना है। उन दोनों का कहना था कि सूचना सुनकर दिल कांप उठा। ऐसे घर आना होगा पता नहीं था। इस दौरान जब पिता अवधेश पांडे बिलख के रो उठे तो दोनों हवलदारों ने उनको भी सांत्वना दी।
हरदोई जिले के शहीद मेजर पंकज कुमार पांडे के नाम जिले की एक सड़क होगी और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी भी दिलाई जाएगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से रविवार दोपहर बाद शोक संवेदना व्यक्त हुए उक्त घोषणाओं का पत्र जारी कर दिया गया। जारी पत्र में मुख्यमंत्री ने शहीद के परिजनों को 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की एवं शहीद के नाम जिले की एक सड़क का नामकरण करने की भी घोषणा की।
देर शाम सदर विधायक नितिन अग्रवाल ने सौंपा चेक
सदर विधायक नितिन अग्रवाल ने शहीद मेजर पंकज पांडे के आवास पर पहुंचकर परिजनों को सांत्वना दी और शोक संवेदना व्यक्त की। इसके बाद मुख्यमंत्री द्वारा घोषित 50 लाख राशि का चेक पिता अवधेश पांडे को सौंपा।
मेजर साहब ने बोला था, मेरे घर होके आना...
पीलीभीत के पूरनपुर से आए हवलदार दलजीत सिंह व हरजीत सिंह ने भी रविवार को शहीद मेजर के चित्र पर श्रद्धासुमन अर्पित किए। रूंधे गले से कहा कि मेजर साहब ऐसे घर बुलाएंगे पता नहीं था। उन्होंने बताया कि वे दोनों उन्हीं की टुकड़ी में हैं। जब छुट्टी पर वे आए थे तो मेजर साहब ने कहा कि जब वापस आना तो मेरे घर होते आना, कुछ मंगाना है। उन दोनों का कहना था कि सूचना सुनकर दिल कांप उठा। ऐसे घर आना होगा पता नहीं था। इस दौरान जब पिता अवधेश पांडे बिलख के रो उठे तो दोनों हवलदारों ने उनको भी सांत्वना दी।
मेजर पंकज ने ही तैयार की थी तंबौला चौकी
शोक संवेदना व्यक्त करने आए बी सिख रेजीमेंट के अधिकारियों व साथ के जवानों ने बताया कि तंबौला की जिस चौकी पर वे सब थे और जहां की अगुवाई स्वयं मेजर साहब कर रहे थे वह चौकी उनकी ही खेाजी हुई थी। इस स्थान को उन्होंने ही विकसित किया था। इस पर पहले चाइना का कब्जा हुआ करता था, लेकिन सात माह पूर्व इस स्थान को चाइना से खाली करवाने के बाद मेजर पंकज की सिफारिश पर यहां चौकी बना दी गई। उनकी निगरानी में चाइना से यह चौकी भारत के इस हिस्से को सुरक्षित रखे थी।
और डीएम ने शहीद के पिता को गले से लगाया
बेटा खोने के बाद पिता पूरे दिन बेसुध ही रहे। डीएम अविनाश कुमार के भी वहां पहुंचने पर जब पिता अवधेश बिलख रहे थे तो डीएम ने उन्हें गले से लगाकर सांत्वना दी।
डेढ़ साल की बेटी ने अर्पित किए श्रद्धासुमन
डेढ़ साल की बेटी अरू ने भी शहीद पिता के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। यह देखकर परिजनों के साथ सैन्य जवान भी फफक कर रो उठे।
शोक संवेदना व्यक्त करने आए बी सिख रेजीमेंट के अधिकारियों व साथ के जवानों ने बताया कि तंबौला की जिस चौकी पर वे सब थे और जहां की अगुवाई स्वयं मेजर साहब कर रहे थे वह चौकी उनकी ही खेाजी हुई थी। इस स्थान को उन्होंने ही विकसित किया था। इस पर पहले चाइना का कब्जा हुआ करता था, लेकिन सात माह पूर्व इस स्थान को चाइना से खाली करवाने के बाद मेजर पंकज की सिफारिश पर यहां चौकी बना दी गई। उनकी निगरानी में चाइना से यह चौकी भारत के इस हिस्से को सुरक्षित रखे थी।
और डीएम ने शहीद के पिता को गले से लगाया
बेटा खोने के बाद पिता पूरे दिन बेसुध ही रहे। डीएम अविनाश कुमार के भी वहां पहुंचने पर जब पिता अवधेश बिलख रहे थे तो डीएम ने उन्हें गले से लगाकर सांत्वना दी।
डेढ़ साल की बेटी ने अर्पित किए श्रद्धासुमन
डेढ़ साल की बेटी अरू ने भी शहीद पिता के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। यह देखकर परिजनों के साथ सैन्य जवान भी फफक कर रो उठे।