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Hardoi News: वादी बयान से मुकरा, मौत से पहले विवाहिता के बयानों ने पति को दिलाई आजीवन कारावास की सजा
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हरदोई। गवाही के दौरान पिता के मुकर जाने के बाद भी मौत से पहले दिया गया विवाहिता का बयान आरोपी पति के लिए सजा की वजह बन गया।
साढ़े छह साल पहले विवाहिता को जिंदा जलाकर मार डालने के आरोप में अपर जिला जज कोर्ट संख्या तीन कुसुमलता ने आरोपी पति धनंजय सिंह को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। उस पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। जुर्माने की आधी रकत मृतका के बेटे को देने के आदेश दिए हैं। जुर्माना न देने पर छह माह की अतिरिक्त सजा अभियुक्त को भुगतनी पड़ेगी।
लखनऊ के मड़ियांवा थाना क्षेत्र के ग्राम दुग्गौर निवासी महेंद्र पाल सिंह ने शहर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। बताया था कि पुत्री विभा की शादी शहर के मोहल्ला राधानगर निवासी धनंजय सिंह के साथ 20 अप्रैल 2012 को की थी। शादी के कुछ दिन बाद से ही पुत्री की सास, ससुर व पति दहेज की मांग करने लगे। मांग पूरी न होने पर पुत्री को मारते-पीटते थे। छह दिसंबर 2018 को ससुरालीजनों ने फोन पर सूचना दी कि विभा जल गई है। उसको जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। प्राथमिक उपचार के बाद उसे लखनऊ रेफर कर दिया गया। लखनऊ में 12 दिसंबर 2018 को इलाज के दौरान विभा की मौत हो गई।
पुलिस ने पति धनंजय, सास पुष्पा और ससुर हरिनाथ के खिलाफ दहेज हत्या की रिपोर्ट दर्ज की थी। गंभीर हालत में अस्पताल में मजिस्ट्रेट को विभा ने बयान दिए थे। इसमें बताया था कि पति धनंजय दहेज न मिलने पर मारपीट करते थे। घटना वाले दिन केरोसिन डालकर धनंजय ने आग लगा दी थी। उसने बयान में सास ससुर को निर्दोष बताया था। इस पर विवेचना के दौरान पुष्पा और हरिनाम का नाम आरोप पत्र से निकाल दिया गया था। मामले की सुनवाई के दौरान वादी महेंद्र, उसकी पत्नी और भाई न्यायालय में बयानों से मुकर गए। मौत से पहले विवाहिता के बयान, डॉक्टर और पुलिस की गवाही के आधार पर धनंजय को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।
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धनंजय पर दर्ज होगा प्रकीर्णवाद
मामले की सुनवाई के दौरान रिपोर्ट दर्ज कराने वाले ने बयान बदल दिए। खास बात यह है कि रिपोर्ट मृतका के पिता ने ही दर्ज कराई थी। बयान बदलने के कारण अपर जिला जज ने महेंद्र काे झूठी गवाही देने का आरोपी माना है। न्यायालय ने उसके खिलाफ प्रकीर्णवाद दर्ज कराने के आदेश दिए हैं।
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साढ़े छह साल पहले विवाहिता को जिंदा जलाकर मार डालने के आरोप में अपर जिला जज कोर्ट संख्या तीन कुसुमलता ने आरोपी पति धनंजय सिंह को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। उस पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। जुर्माने की आधी रकत मृतका के बेटे को देने के आदेश दिए हैं। जुर्माना न देने पर छह माह की अतिरिक्त सजा अभियुक्त को भुगतनी पड़ेगी।
लखनऊ के मड़ियांवा थाना क्षेत्र के ग्राम दुग्गौर निवासी महेंद्र पाल सिंह ने शहर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। बताया था कि पुत्री विभा की शादी शहर के मोहल्ला राधानगर निवासी धनंजय सिंह के साथ 20 अप्रैल 2012 को की थी। शादी के कुछ दिन बाद से ही पुत्री की सास, ससुर व पति दहेज की मांग करने लगे। मांग पूरी न होने पर पुत्री को मारते-पीटते थे। छह दिसंबर 2018 को ससुरालीजनों ने फोन पर सूचना दी कि विभा जल गई है। उसको जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। प्राथमिक उपचार के बाद उसे लखनऊ रेफर कर दिया गया। लखनऊ में 12 दिसंबर 2018 को इलाज के दौरान विभा की मौत हो गई।
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पुलिस ने पति धनंजय, सास पुष्पा और ससुर हरिनाथ के खिलाफ दहेज हत्या की रिपोर्ट दर्ज की थी। गंभीर हालत में अस्पताल में मजिस्ट्रेट को विभा ने बयान दिए थे। इसमें बताया था कि पति धनंजय दहेज न मिलने पर मारपीट करते थे। घटना वाले दिन केरोसिन डालकर धनंजय ने आग लगा दी थी। उसने बयान में सास ससुर को निर्दोष बताया था। इस पर विवेचना के दौरान पुष्पा और हरिनाम का नाम आरोप पत्र से निकाल दिया गया था। मामले की सुनवाई के दौरान वादी महेंद्र, उसकी पत्नी और भाई न्यायालय में बयानों से मुकर गए। मौत से पहले विवाहिता के बयान, डॉक्टर और पुलिस की गवाही के आधार पर धनंजय को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।
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धनंजय पर दर्ज होगा प्रकीर्णवाद
मामले की सुनवाई के दौरान रिपोर्ट दर्ज कराने वाले ने बयान बदल दिए। खास बात यह है कि रिपोर्ट मृतका के पिता ने ही दर्ज कराई थी। बयान बदलने के कारण अपर जिला जज ने महेंद्र काे झूठी गवाही देने का आरोपी माना है। न्यायालय ने उसके खिलाफ प्रकीर्णवाद दर्ज कराने के आदेश दिए हैं।