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Hardoi News: अब अस्पताल के मन कक्ष में उलझनों से मिलेगी निजात

Fri, 06 Dec 2024 10:54 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हरदोई
संवाद न्यूज एजेंसी, हरदोई Updated Fri, 06 Dec 2024 10:54 PM IST
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Now you will get relief from confusion in the mental room of the hospital
फोटो-05- मेडिकल कालेज में मानसिक रोग विभाग में मरीजों को परामर्श देते डाॅ. रोहित। संवाद
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- मेडिकल कॉलेज के मनोरोगी विभाग में सप्ताह में तीन दिन दिया जा रहा परामर्श
- टोल फ्री नंबर 14416 और 1800-891-4416 पर मरीज ले सकते हैं जानकारी
संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। भागदौड़ भरी जिंदगी में तमाम उलझने हैं, कभी तो मन अच्छा होता है लेकिन कभी व्यक्ति खुद के हारा महसूस करता है। मन से हारे व्यक्ति का अब मेडिकल कॉलेज में इलाज किया जा रहा है। मानसिक रोग विभाग में चिकित्सक मनोरोगियों का इलाज करने के साथ मन कक्ष में मनोरोगियों से की बात सुनकर उनको परामर्श भी दिया जा रहा है।
बदलते परिवेश में इन दिनों बड़ी संख्या में लोग मानसिक समस्याओं से ग्रसित हैं। चिंता, घबराहट, बहुत अधिक सोचना, आत्मविश्वास में कमी, पढ़ाई में मन न लगना, बच्चों को मानसिक विकास न होना, अधिक नशा करना, नींद न आना, न समझ आने वाली बात करना, यादाश्त में कमी, तंबाकू सेवन आदि समस्याओं से ग्रसित लोगों की भीड़ लगी हुई है।
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मेडिकल कॉलेज के मनोरोगी विभाग में सप्ताह में तीन दिन चिकित्सक आते हैं। जिनसे इलाज कराने के लिए 80 से 120 मनोरोगियों की समस्या का समाधान किया जाता है। मनोचिकित्सक डॉ. रोहित बताते हैं कि मनोरोगियों की बात सुनकर उनकी चिकित्सीय उपचार तो दिया जाता है, उनकी मन कक्ष में मनोचिकित्सक विशेषज्ञ से परामर्श दिलाकर उनकी काउंसिलिंग भी कराई जाती है।
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फोटो-06- मनोरोगी विशेषज्ञ अंशू सूरी। संवाद
काम का दबाव व तनाव बना रहा मनोरोगी
मन कक्ष की मनोचिकित्सक विशेषज्ञ डॉ. अंजू सूरी बताती हैं कि काम का दबाव और तनाव लोगों को मनोरोगी बना रहा है। नींद कम आना, उदास रहना, किसी काम में मन न लगना, निराशा के भाव जैसे लक्षण अवसाद के कारण बनते हैं। इससे आत्महत्या की प्रवृत्ति बढ़ती है एंजायटी डिसऑर्डर लोगों में तनाव बढ़ाता है। जल्द थकान, अनजाना भय, जल्दी थकान, अत्याधिक सपने आना, एकाग्रता में कमी, मन में उत्साह की कमी भी मनाेरोग के लक्षण हैं। बाइपोलर डिसऑर्डर की समस्या से लोग जूझते हैं।

मरीज को यह कहें
तुम खुद को अकेला मत समझो, सब तुम्हारे साथ हैं। शायद मैं तुम्हारी बातों को समझ नहीं पा रहा हूं, लेकिन फिक्रमंद हूं। मैं तुम्हारी हर बात को ध्यान से सुन रहा हूं।


मरीज को यह न कहें
- क्यों नाटक कर रहे हो। ऐसी परेशानियों से हम सभी गुजरते हैं। परेशान होना बंद करो और बेहतर भविष्य की ओर देखो। परिवार के सदस्य मरीज से कभी भी बहस व तर्क न करें। मानसिक बीमार से न कहें कि अपनी हालत क्या बना ली है। इससे मरीज चिढ़ जाते हैं।
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